किडनी की बीमारी जब अपनी आखिरी स्टेज पर पहुंचती है, तब मरीज के सामने सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं या तो जिंदगी भर डायलिसिस करवाते रहो या फिर किडनी ट्रांसप्लांट कराओ, लेकिन ट्रांसप्लांट की आस में बैठे मरीजों की कतार हर रोज लंबी होती जा रही है और अंग देने वाले हाथ बहुत कम हैं.
संसद की स्वास्थ्य समिति की ताजा रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है. इस समय देश भर में लगभग 61,000 से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जो किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग लिस्ट में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. वहीं अगर बात करें कि एक साल में कितने ट्रांसप्लांट हो पाते हैं, तो यह आंकड़ा महज 13,000 से 14,000 के आसपास आकर सिमट जाता है. हर साल देश में तकरीबन 2 लाख नए मरीजों की किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर देती है.
ट्रांसप्लांट की ज्यादातर सुविधाएं भी देश के कुछ गिने-चुने राज्यों जैसे दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक तक ही सीमित हैं बाकी राज्यों के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ते हैं.
डॉक्टर का क्या कहना है?
एम्स दिल्ली के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. संदीप महाजन का कहना हैं कि किडनी फेल होने की सबसे बड़ी वजह हाई शुगर और हाई बीपी ही है. हर साल लगभग 2 लाख लोगों की किडनी फेल हो रही है, लेकिन अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी बहुत कम है.
61,000+ patients are currently waiting for a kidney transplant in India, while only ~13,000-14,000 such transplants happen each year.
— AIIMS, New Delhi 🇮🇳 (@aiims_newdelhi) August 28, 2026
In this article, Prof. (Dr.) Sandeep Mahajan, Professor, Department of Nephrology, AIIMS, New Delhi, explains that uncontrolled diabetes and high… pic.twitter.com/WKyePVkgbY
आज भी हमारे देश में ज्यादातर वही लोग किडनी दे पाते हैं जो मरीज के अपने रिश्तेदार होते हैं. साल 2024 में करीब 11,558 रिश्तेदारों ने अपनी किडनी दी, लेकिन जिन लोगों की एक्सीडेंट या किसी वजह से अस्पताल में मौत हो जाती है (ब्रेन डेड), उनसे सिर्फ 1,918 किडनियां ही मिल पाईं. एक और ध्यान देने वाली बात यह है कि किडनी दान करने वाली 64 परसेंट महिलाएं होती हैं, जबकि किडनी लेने वाले 70 परसेंट पुरुष होते हैं.
किडनी खराब होती ही क्यों है?
एम्स दिल्ली के डॉक्टर संदीप महाजन बताते हैं कि किडनी खराब होने के दो सबसे बड़े दुश्मन हैं शुगर और बीपी. जब ये दोनों चीजें काफी समय तक काबू में नहीं रहतीं, तो किडनी के अंदर की पतली नसें गल जाती हैं. इसके अलावा, बात-बात पर बिना डॉक्टर से पूछे दर्द की गोलियां (पेनकिलर) खा लेना, खाने में बहुत ज्यादा नमक खाना, ज्यादा वजन होना और बार-बार पेशाब में इंफेक्शन या पथरी को नजरअंदाज करना भी धीरे-धीरे किडनी को पूरी तरह खराब कर सकता है.
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