देश की पहले हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) को जुलाई 2026 में लॉन्च किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हरी झंडी दिखाई थी. दो महीने पहले लॉन्च की गई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता को साबित कर दिया है. यह ट्रेन तकनीकी क्षमता के रूप में अब तक काफी सफल रही है. लेकिन इसमें यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम रही है. ऐसे में अब रेलवे अधिकारियों ने हाइड्रोजन ट्रेन के मार्ग का विस्तार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक करने की योजना बनाई है.
2600 यात्री क्षमता वाले ट्रेन में केवल 60 लोग करते हैं सफर
अधिकारियों ने PTI को बताया कि हरियाणा में 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन चलती है, लेकिन ट्रेन में बहुत कम यात्रियों की संख्या दर्ज की गई है. ऐसे में अब भारतीय रेलवे इसके परिचालन को दिल्ली तक ले जाने पर विचार कर रहा है अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन की अधिकतम क्षमता 2,600 यात्रियों की है, लेकिन जींद और सोनीपत के बीच पूरी यात्रा के दौरान सिर्फ 40 से 60 लोग ही इसमें सवार होते हैं.
इस हाइड्रोजन ट्रेन ने उसी रूट पर पहले से चल रही DEMU सेवा की जगह ली है. रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि उस पुरानी DEMU सेवा में भी यात्रियों की संख्या इसी तरह बेहद कम हुआ करती थी.
दिल्ली से चलाने की हो रही है मांग
ट्रेन संचालन से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया, फिलहाल हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के अलावा इस रूट पर तीन अन्य DEMU ट्रेनें भी चल रही हैं, और दोनों शहरों के बीच ऑफिस जाने वाले यात्रियों या औद्योगिक कामगारों की कमी के कारण इनमें से किसी में भी यात्रियों की भारी भीड़ नहीं होती. उन्होंने आगे कहा, इस रूट पर मुश्किल से ही कोई ऑफिस जाने वाला या इंडस्ट्रियल वर्कर है. स्थानीय लोग भी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इसका बेहतर इस्तेमाल करने के लिए इसे दिल्ली तक बढ़ाया जाना चाहिए.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह 10 कोच की ट्रेन है जिसमें 2,600 यात्री बैठ सकते हैं, जबकि दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों को रेलवे ट्रैक पर क्षमता की कमी के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालने के लिए 18 से 20 से अधिक कोचों की आवश्यकता होती है. अधिकारी ने यह भी बताया कि ईंधन की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि यह ट्रेन फुल टैंक में 250 किमी से 300 किमी तक की दूरी तय कर सकती है.
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को 17 जुलाई को लॉन्च किया गया था, जो अगली पीढ़ी की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक कदम है. रेलवे अधिकारियों ने इस सेवा को एक पायलट प्रोजेक्ट बताया है जो भारत को जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करता है, जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल परिवहन की खोज कर रहे हैं.
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