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This Article is From Dec 24, 2025

भारत में 62% मुंह के कैंसर के पीछे शराब और गुटखा-खैनी की खतरनाक जोड़ी, स्टडी में हुआ खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 10 में से 6 से ज्यादा लोग जो मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं, वे लोकल शराब के साथ गुटखा, खैनी, पान जैसे धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करते रहे हैं.

भारत में 62% मुंह के कैंसर के पीछे शराब और गुटखा-खैनी की खतरनाक जोड़ी, स्टडी में हुआ खुलासा
यह स्टडी महाराष्ट्र स्थित सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है.

भारत में मुंह का कैंसर एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. ताजा अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देश में मुंह के कैंसर के 62 प्रतिशत मामलों की वजह शराब और धुआं रहित तंबाकू का एक साथ सेवन है. यह अध्ययन महाराष्ट्र स्थित सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जिसे प्रतिष्ठित ओपन-एक्सेस जर्नल BMJ ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित किया गया है.

शराब और तंबाकू का खतरनाक कॉम्बिनेशन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 10 में से 6 से ज्यादा लोग जो मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं, वे लोकल शराब के साथ गुटखा, खैनी, पान जैसे धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करते रहे हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि जब शराब और तंबाकू साथ में शरीर में जाते हैं, तो उनका असर कई गुना ज्यादा खतरनाक हो जाता है.

अध्ययन में यह भी पाया गया कि दिन में 2 ग्राम से भी कम बीयर पीना बक्कल म्यूकोसा (गाल की अंदरूनी परत) के कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. वहीं, दिन में करीब 9 ग्राम शराब (एक स्टैंडर्ड ड्रिंक) लेने से मुंह के कैंसर का जोखिम लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

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बक्कल म्यूकोसा कैंसर क्यों है ज्यादा आम?

भारत में मुंह के कैंसर का सबसे आम रूप बक्कल म्यूकोसा कैंसर है, जो गालों और होठों की अंदरूनी मुलायम गुलाबी परत में होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस तरह के कैंसर के करीब 11.5 प्रतिशत मामले सिर्फ शराब की वजह से होते हैं. मेघालय, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी दर और भी ज्यादा है, जहां कुछ इलाकों में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत तक पहुंच जाता है.

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लोकल शराब ज्यादा खतरनाक क्यों?

स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता ग्रेस सारा जॉर्ज के अनुसार, शराब में मौजूद इथेनॉल मुंह की अंदरूनी परत में मौजूद फैट को नुकसान पहुंचाता है, जिससे यह परत कमजोर हो जाती है. ऐसी स्थिति में तंबाकू में मौजूद कैंसर पैदा करने वाले तत्व (कार्सिनोजेन) आसानी से असर करने लगते हैं.

उन्होंने बताया कि लोकल रूप से बनी शराब जैसे महुआ, देसी दारू, चुल्ली, अपोंग और बांग्ला में अक्सर मेथनॉल और एसीटैल्डिहाइड जैसे जहरीले तत्व ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि इनका सेवन मुंह के कैंसर का खतरा और बढ़ा देता है. अध्ययन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की शराब पीने वालों में जोखिम 72 प्रतिशत, जबकि लोकल शराब पीने वालों में यह 87 प्रतिशत तक पाया गया.

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भारत में मुंह के कैंसर की भयावह स्थिति

मुंह का कैंसर भारत में दूसरा सबसे आम कैंसर है. अनुमान है कि हर साल देश में इसके 1.43 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं और करीब 80 हजार लोगों की मौत हो जाती है. चिंता की बात यह है कि इस बीमारी की दर लगातार बढ़ रही है. हर 1 लाख भारतीय पुरुषों में से लगभग 15 लोग इस कैंसर से प्रभावित हैं.

सबसे दुखद पहलू यह है कि मुंह के कैंसर से पीड़ित लोगों में से सिर्फ 43 प्रतिशत मरीज ही 5 साल या उससे ज्यादा समय तक जीवित रह पाते हैं.

युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा

अध्ययन में 2010 से 2021 के बीच 5 अलग-अलग केंद्रों पर 1,803 कैंसर मरीजों और 1,903 हेल्दी लोगों की तुलना की गई. ज्यादा मरीजों की उम्र 35 से 54 साल के बीच थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब 46 प्रतिशत मामले 25 से 45 साल की उम्र के लोगों में पाए गए. यह साफ संकेत है कि युवाओं में तंबाकू और शराब की आदतें तेजी से इस घातक बीमारी की ओर ले जा रही हैं.

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कोई सुरक्षित सीमा नहीं

शोधकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि मुंह के कैंसर से बचने के लिए शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा नहीं है. शराब और तंबाकू खासकर धुआं रहित तंबाकू से दूरी ही सबसे प्रभावी बचाव है.

क्या जरूरी है आगे?

विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ जागरूकता काफी नहीं है, बल्कि पब्लिक हेल्थ एक्शन, सख्त नीतियां और स्थानीय स्तर पर रोकथाम अभियान चलाने की जरूरत है. तभी भारत में बढ़ते बक्कल म्यूकोसा और मुंह के कैंसर के मामलों पर काबू पाया जा सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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