अगर आपको लगता है कि मोटापा सिर्फ ज्यादा खाने या मीठा खाने से बढ़ता है, लेकिन हाल में हुए कई हेल्थ सर्वे और रिसर्च इससे बिल्कुल ही अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. इनकी रिपोर्ट कहती है कि भारतीयों की थाली का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है. हमारी थाली में रोटी, चावल और दूसरे अनाज का हिस्सा बढ़ता जा रहा है, जबकि प्रोटीन वाले फूड अब भी जरूरत के मुकाबले कम हैं. इसके साथ पैकेट वाले और ज्यादा प्रोसेस्ड खाने का बढ़ता चलन, कम होती शारीरिक गतिविधि और बदलती लाइफस्टाइल ने समस्या को और बढ़ा दिया है. यही वजह है कि देश में बढ़े हुए वजन और मोटापे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के मुताबिक, 15 से 49 साल की उम्र की 30.7 फीसदी महिलाएं और 27.3 फीसदी पुरुष अब ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं. करीब एक दशक पहले के मुकाबले यह आंकड़ा लगभग 10 फीसदी अंक बढ़ चुका है. महिलाओं में यह समस्या पहले के मुकाबले लगभग तीन गुना तक बढ़ गई है, जबकि पुरुषों में भी बढ़े हुए वजन के मामले तेजी से बढ़े हैं.

बिगड़ता खान-पान और तेजी से बढ़ता मोटापा. Photo Credit: Unsplash
अनाज ज्यादा, प्रोटीन कम... यहीं बिगड़ रहा है खेल-
भारतीयों की थाली में सबसे बड़ा बदलाव खाने के संतुलन में आया है. रोटी, चावल और दूसरी कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें ज्यादा खाई जा रही हैं, जबकि दाल, अंडे, दूध, दही, मांस, मछली और दूसरे प्रोटीन वाले फूड उतनी मात्रा में नहीं पहुंच पा रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि मांसपेशियां मजबूत रखने, हार्मोन ठीक रखने और लंबे समय तक भूख नियंत्रित रखने के लिए भी प्रोटीन की जरूरत होती है. जब खाने में इसकी कमी रहती है, तो शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता.
पैकेट वाले खाने ने बढ़ाई मुश्किल-
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाने का बाजार सबसे तेजी से बढ़ रहा है. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे फूड की बिक्री कई गुना बढ़ी है. पैकेट वाले स्नैक्स, मीठे ड्रिंक और रेडीमेड फूड प्रोडक्ट्स में अक्सर ज्यादा चीनी, नमक और फैट होता है, जबकि जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं. ऐसे खाने की बढ़ती आदत भी मोटापे की बड़ी वजह बन रही है.
शहर ही नहीं, गांव भी चपेट में-
पहले मोटापा शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब गांवों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में बढ़े हुए वजन वाले लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है. बदलती खाने की आदतें, पोषण की कमी और शारीरिक गतिविधियों में बदलाव इसके पीछे अहम वजह माने जा रहे हैं.
महिलाओं में ज्यादा दिख रही है ये समस्या-
लगभग हर राज्य में महिलाओं में मोटापा पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है. गर्भावस्था, रजोनिवृत्ति, हार्मोन में बदलाव, कम प्रोटीन वाला भोजन, तनाव और नींद की कमी जैसी कई वजहें महिलाओं में वजन बढ़ने का खतरा बढ़ा देती हैं.
कम उम्र में बढ़ रहा खतरा-
अब 20 और 30 साल की उम्र में ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए वजन के मामले पहले से ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. लंबे समय तक बैठे रहना, दफ्तरों में घंटों काम करना और नियमित व्यायाम की कमी भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है.
नोट- दरअसल, मोटापे से बचने के लिए सिर्फ कैलोरी गिनना काफी नहीं है. थाली में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना, दाल, दूध, दही, अंडे, मछली या दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को जगह देना, फल और सब्जियां खाना, पैकेट वाले खाने को कम करना और रोज शारीरिक गतिविधि करना ज्यादा जरूरी है. साफ है कि अगर भारतीयों की थाली में अनाज और प्रोटीन का संतुलन नहीं सुधरा, तो आने वाले वर्षों में मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियां और तेजी से बढ़ सकती हैं.
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