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NFHS 6 Survey- भारत में बढ़ रही है दोहरी स्वास्थ्य चुनौती, शहरों में एक तरफ मोटापा-डायबिटीज तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी

Diabetes, Obesity And Malnutrition In India: भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी एक नई चुनौती तेजी से सामने आ रही है. एक तरफ शहरी इलाकों में मोटापा और डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में लाखों लोग आज भी पोषण की कमी से जूझ रहे हैं. NFHS-6 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश को अब इन दोनों समस्याओं से एक साथ लड़ना होगा.

NFHS 6 Survey- भारत में बढ़ रही है दोहरी स्वास्थ्य चुनौती, शहरों में एक तरफ मोटापा-डायबिटीज तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी
Diabetes, Obesity And Malnutrition In India

Diabetes, Obesity And Malnutrition In India: भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी हैं. जहां पहले देश की सबसे बड़ी चिंता भूख और पोषण की कमी को दूर करना थी, वहीं अब मोटापा और डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक तरफ बड़ी संख्या में लोग जरूरत से ज्यादा कैलोरी का सेवन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ लाखों लोग अभी भी पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं पा रहे हैं.

विशेषज्ञ इस स्थिति को "डबल न्यूट्रिशन बर्डन" यानी दोहरी पोषण चुनौती कहते हैं. यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी संकेत माना जा रहा है.

मोटापा बन रहा है बड़ी चिंता

सर्वेक्षण के अनुसार देश में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और 27 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं. खासकर शहरी क्षेत्रों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बैठे रहना, फास्ट फूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारण हैं. हालांकि अब यह समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों का असर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई देने लगा है.

डायबिटीज के बढ़ते मामले

मोटापे के साथ-साथ डायबिटीज के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. NFHS-6 के अनुसार करीब 18 प्रतिशत महिलाओं और 21 प्रतिशत पुरुषों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया या वे डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोगों ने समय रहते अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं किया तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग, किडनी संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

पोषण की कमी अब भी चिंता का विषय

जहां एक ओर मोटापा और डायबिटीज बढ़ रहे हैं, वहीं लगभग 20 प्रतिशत वयस्क अब भी कम वजन वाले हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पोषण की कमी की समस्या चिंता का विषय बनी हुई है. यह स्थिति बताती है कि देश में भोजन की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद सभी लोगों तक समान रूप से पौष्टिक आहार नहीं पहुंच पा रहा है. यही कारण है कि एक ही देश में स्वास्थ्य की दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दे रही हैं.

क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब केवल भूख मिटाने पर नहीं, बल्कि बेहतर पोषण सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, समय पर स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है.

भारत के सामने चुनौती केवल भोजन उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक सही पोषण पहुंचाने की है. मोटापा, डायबिटीज और पोषण की कमी जैसी समस्याओं से एक साथ निपटकर ही देश स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ सकता है.

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