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VeloCD Blood Test: अब ब्लड टेस्ट से पहले ही चल सकेगा पता, बीमारी बढ़ेगी या मरीज जल्दी होगा ठीक!

VeloCD Blood Test: बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है और इलाज का असर मरीज पर कैसा पड़ेगा, यह जानना डॉक्टरों के लिए हमेशा बड़ी चुनौती माना जाता रहा है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो ब्लड में मौजूद जीन और RNA मार्कर्स को पढ़कर यह अंदाजा लगाने में मदद कर सकती है कि मरीज की हालत सुधरेगी या बीमारी और ज्यादा बढ़ेगी.

VeloCD Blood Test: अब ब्लड टेस्ट से पहले ही चल सकेगा पता, बीमारी बढ़ेगी या मरीज जल्दी होगा ठीक!
VeloCD Blood Test
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VeloCD Blood Test: बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है और इलाज का असर मरीज पर कैसा पड़ेगा, यह जानना डॉक्टरों के लिए हमेशा बड़ी चुनौती माना जाता रहा है. लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस दिशा में बड़ी उम्मीद जगाई है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो ब्लड में मौजूद जीन और RNA मार्कर्स को पढ़कर यह अंदाजा लगाने में मदद कर सकती है कि मरीज की हालत सुधरेगी या बीमारी ज्यादा गंभीर बन सकती है. इस तकनीक को “VelociD” नाम दिया गया है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भविष्य में यह टेस्ट इलाज को ज्यादा तेज, सटीक और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है.

किसने की यह रिसर्च?

यह रिसर्च Imperial College London के वैज्ञानिकों ने की है. इस स्टडी की अगुवाई प्रोफेसर Aubrey Cunnington और रिसर्चर Claire Dunican ने की. रिसर्च जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुई है. वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को “VeloCD” नाम दिया है, जो RNA velocity के सिद्धांत पर आधारित बताई जा रही है.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

जब शरीर किसी संक्रमण या बीमारी से लड़ता है, तब शरीर के कई जीन (Gene) एक्टिव और इनएक्टिव होते रहते हैं. इस प्रक्रिया में RNA मार्कर्स बनते हैं, जो ब्लड में पाए जा सकते हैं. VeloCD इन्हीं मार्कर्स को पढ़कर यह समझने की कोशिश करता है कि बीमारी किस दिशा में जा रही है. सरल शब्दों में कहें तो यह टेस्ट सिर्फ यह नहीं बताता कि मरीज अभी कैसा है, बल्कि यह भी संकेत दे सकता है कि अगले कुछ घंटों या दिनों में उसकी हालत बेहतर होगी या बिगड़ सकती है.

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किन बीमारियों में हो सकता है इस्तेमाल?

फ्लू और वायरल फीवर

सामान्य वायरल इंफेक्शन में शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है. ऐसे मामलों में यह तकनीक जोखिम पहचानने में मदद कर सकती है.

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कोविड-19

कोविड-19 के दौरान कई मरीजों की हालत अचानक बिगड़ती देखी गई थी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में इस तरह की तकनीक यह अनुमान लगाने में मदद कर सकती है कि किस मरीज को ICU या ज्यादा निगरानी की जरूरत पड़ सकती है.

बच्चों में गंभीर संक्रमण

रिसर्च में बच्चों के ब्लड सैंपल का भी अध्ययन किया गया. तकनीक ने यह पहचानने में मदद की कि कौन-से बच्चों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और किन्हें इंटेंसिव केयर (Intensive Care) की जरूरत पड़ सकती है.

गंभीर रूप से बीमार मरीज

ICU में भर्ती मरीजों के लिए भी यह तकनीक काफी उपयोगी मानी जा रही है. इससे डॉक्टर यह समझ सकते हैं कि इलाज असर कर रहा है या मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा बना हुआ है.

क्यों खास मानी जा रही है यह खोज?

  • बीमारी की गंभीरता का पहले से अंदाजा लगाया जा सकता है.
  • सही मरीज को सही समय पर इलाज देना आसान हो सकता है.
  • ICU और इमरजेंसी फैसले ज्यादा तेज और सटीक हो सकते हैं.
  • इलाज को ज्यादा पर्सनलाइज्ड बनाने में मदद मिल सकती है.

हालांकि इस तकनीक पर अभी और रिसर्च की जरूरत बताई जा रही है, लेकिन शुरुआती नतीजों ने मेडिकल दुनिया में नई उम्मीद जरूर जगा दी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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