Why Do Some People Stay Fresh Even With Less Sleep: कई बार आपने महसूस किया होगा कि 7-8 घंटे की नींद पूरी न हो तो हमें सुस्ती आती रहती है. जाहिर है कि दिन भर फ्रेश और एक्टिव रहने के लिए रात में अच्छी नींद होना बहुत जरूरी है. लेकिन वहीं आपने कुछ ऐसे लोगों के बारे में भी सुना होगा कि वो महज 4-5 घंटे सोकर भी पूरी तरह से फिट और एक्टिव नजर आते हैं. ऐसे में सवाल ये है कि क्यों कुछ लोगों के लिए 7-8 घंटे की भरपूर नींद जरूरी है और कुछ के लिए 4-5 घंटे ही काफी होते हैं? आइए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं.
क्यों कुछ लोग कम सोकर भी रहते हैं फ्रेश? (Why do some people stay fresh even with less sleep?)

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों की एक स्टडी में पाया गया कि कुछ लोगों में एक खास जीन की वजह से उन्हें कम नींद की जरूरत होती है. रिसर्च के मुताबिक, ADRB1 नाम के जीन में बदलाव ऐसे लोगों में पाया गया, जो सामान्य से कम सोकर भी पूरी तरह आराम महसूस करते हैं.
यह जीन शरीर के स्लीप-वेक साइकल को प्रभावित करता है. जिन लोगों में यह बदलाव होता है, उनके दिमाग के कुछ हिस्से ज्यादा एक्टिव रहते हैं, जिससे वे कम समय में भी बेहतर क्वालिटी की नींद ले पाते हैं. यही वजह है कि उन्हें लंबी नींद की जरूरत नहीं पड़ती. रिसर्च में यह भी देखा गया कि ऐसे लोग सिर्फ कम नहीं सोते, बल्कि उनकी नींद ज्यादा “एफिशिएंट” होती है. यानी कम समय में ही उनका शरीर उतना आराम हासिल कर लेता है, जितना आम लोगों को ज्यादा समय में मिलता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर कोई कम सोकर स्वस्थ रह सकता है. ज्यादातर वयस्कों के लिए 7 घंटे या उससे ज्यादा की नींद जरूरी है. कम नींद लेने से शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
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ADRB1 जीन की खासियत (Characteristics of the ADRB1 Gene)
दरअसल, अच्छी नींद सिर्फ घंटों पर नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी पर भी निर्भर करती है. नींद के दौरान दो अहम फेज होते हैं, REM और non-REM. REM फेज में दिमाग एक्टिव रहता है और सपने आते हैं, जबकि non-REM फेज में शरीर गहरी नींद में जाकर खुद को ठीक करता है. अगर ये फेज ठीक से पूरे नहीं होते, तो लंबे समय तक हेल्थ इश्यूज का खतरा बढ़ सकता है. जिन लोगों में ADRB1 जीन में बदलाव होता है, उनके दिमाग के कुछ सेल REM फेज और जागने की अवस्था में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिससे उनकी नींद का पैटर्न अलग हो जाता है और वे कम समय में भी खुद को तरोताजा महसूस कर पाते हैं.
कुल मिलाकर, कुछ लोगों के लिए 4-5 घंटे की नींद पर्याप्त हो सकती है, लेकिन यह एक खास जैविक स्थिति से जुड़ा मामला है, न कि हर किसी के लिए अपनाने लायक आदत. इसलिए कम सोने को ट्रेंड बनाने के बजाय, अपने शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी की नींद लेना ही बेहतर है.
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