Science Behind Blue Vains : हम में से कई लोगों ने अपने हाथ-पैरों या फिर कलाई की नसों को देखकर ये जरूर सोचा होगा कि आखिर नसें नीली क्यों दिखाई देती हैं? कुछ लोगों का तो ये भी मानना होता है कि नसों में बहने वाला खून नीला होता है और फेफड़ों से ऑक्सीजन मिलने के बाद ही लाल रंग का बनता है. लेकिन क्या सच में ऐसा है?
दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी डॉ. अंशुल कुमार जैन का कहना है कि ये हम लोगों के बीच ये काफी गलत धारणा है. किसी भी इंसान का खून कभी भी नीला नहीं होता. नसों का नीला दिखाई देना सिर्फ प्रकाश और स्किन के बीच होने वाले एक ऑप्टिकल प्रभाव का नतीजा है.
इस विषय को डॉक्टर से यहां विस्तार से समझते हैं-
क्या नसों में बहता है नीला खून?
डॉ. जैन का कहना है कि हमारे शरीर में खून हमेशा नीला ही रहता है. आर्टरी में बहने वाला ऑक्सीजन युक्त खून चमकीला लाल दिखाई देता है. वहीं, नसों से वापस लौटने वाला ऑक्सीजन की तुलना में कम मात्रा वाला खून गहरे लाल रंग का होता है. हालांकि, ये कभी भी नीला नहीं होता है.
कुछ लोगों में वर्षों से ये धारणा है कि नसों में खून नीला होता है, लेकिन इसका कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है. अगर नस से खून निकालकर देखा जाए, तो वह भी लाल ही दिखाई देगा.
फिर नसें नीली क्यों नजर आती हैं?
डॉक्टर कहते हैं कि इसका जवाब शरीर की बनावट और प्रकाश की नैचर में छिपा है. जब लाइट्स स्किन पर पड़ती है, तो उसकी अलग-अलग वेवलेंथ वाली किरणें स्किन और उसके नीचे मौजूद टिश्यूज से अलग-अलग तरीके से प्रभावित होती हैं. लाल रंग की रोशनी स्किन की गहराई तक पहुंचती है और अधिक मात्रा में अवशोषित हो जाती है. वहीं, नीली रोशनी कम गहराई तक जाती है और वापस आंखों की ओर अधिक मात्रा में परावर्तित होती है.
इसी वजह से स्किन के नीचे मौजूद नसों से आने वाला प्रकाश हमारी आंखों को नीला या हरा-नीला दिखाई देता है. वहीं, नस के अंदर बह रहा खून वास्तव में लाल ही होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं