अक्सर आपने देखा होगा कि महीना खत्म होते-होते हमारे अकाउंट के पैसे भी खत्म हो जाते हैं. कुछ लोगों का तो 15 दिन में बैंक बैलेंस गड़बड हो जाता है. फिर सोचते हैं यार, अभी तो महीना आधा भी नहीं हुआ, पैसे गए कहां? दिल्ली के रहने वाले 26 साल के राहुल (बदला हुआ नाम) की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. राहुल दिल्ली की एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और उनकी सैलरी काफी अच्छी है. लेकिन पिछले कई महीनों से उनका एक ही रोना था महीने के आखिरी हफ्ते में जेब खाली. आखिरकार, उन्होंने तय किया कि इस बार वो इस गायब होते पैसे का हिसाब रखेंगे.
राहुल ने पूरे एक महीने तक अपना हर एक छोटा-बड़ा खर्च लिखना शुरू किया. 30 दिन बाद जब उन्होंने अपना 'खर्चों का कच्चा चिट्ठा देखा, तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ.
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सबसे ज्यादा पैसे कहां खर्च होते. (Image NDTV)
कहां खर्च होते हैं सबसे ज्यादा पैसे-
छोटे-छोटे खर्च-
राहुल ने बताया, "मुझे लगता था कि मेरा सबसे बड़ा खर्च घर का किराया, बिजली का बिल और वीकेंड की पार्टियां हैं. लेकिन जब मैंने डायरी देखी, तो असली विलेन कुछ और ही निकले.
राहुल के मुताबिक, ऑफिस के नीचे रोज़ दो बार पी जाने वाली 20-30 रुपये की चाय और उसके साथ समोसा या बिस्कुट, महीने के आखिर में करीब 2,000 रुपये का बैठ रहा था. इसके अलावा, चलो आज थक गया हूं, ऑटो या कैब कर लेता हूं. वाली आदत ने उनके बजट में हर महीने 3,500 रुपये का बड़ा हमला किया था.
ओटीटी सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन शॉपिंग-
हम अक्सर 199, 299 या 499 रुपये के ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन को बहुत छोटा खर्च मानते हैं. राहुल ने नोटिस किया कि उनके फोन में 4 ऐसी ऐप्स के सब्सक्रिप्शन थे, जिन्हें वो महीने में एक बार भी नहीं खोलते थे. बिना सोचे-समझे की जाने वाली ऑनलाइन शॉपिंग और फ्री डिलीवरी के चक्कर में कुछ न कुछ ऑर्डर कर देने की आदत ने भी हजारों रुपये पानी में बहा दिए थे.
डायरी लिखने से क्या बदला?

इस एक्सपेरिमेंट के बाद राहुल ने फिजूल के सब्सक्रिप्शन बंद कर दिए, छोटी दूरी के लिए कैब की जगह मेट्रो या वॉक करना शुरू किया और बाहर से खाना मंगाने की आदत कम की. नतीजा यह हुआ कि महीने के आखिर में उनकी जेब में 10,000 से 15, 000 रुपये एक्स्ट्रा बच गए.
अगर आप भी इस महीने की 1 तारीख से अपनी जेब का हाल सुधारना चाहते हैं, तो बस एक पेन और डायरी उठाइए. चाहे 10 रुपये की पानी की बोतल हो या 2000 रुपये के कपड़े, हर एक खर्च को नोट करना शुरू कीजिए.
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