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मोबाइल स्क्रीन छोटे बच्चों में ला रहा साइलेंट हेल्थ क्राइसिस, AIIMS के डॉक्टर्स ने दी बड़ी चेतावनी

मोबाइल स्क्रीन और खाने-पीनी की गलत आदतों की वजह से कम उम्र में भी कई तरह की हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ता है. यहां जानते हैं AIIMS के डॉक्टर ने क्या दी चेतावनी और सलाह?

मोबाइल स्क्रीन छोटे बच्चों में ला रहा साइलेंट हेल्थ क्राइसिस, AIIMS के डॉक्टर्स ने दी बड़ी चेतावनी
Child Screen Time Effects : छोटे बच्चों में मोबाइल ला रहा है हेल्थ क्राइसिस

देश में टीन-एजर्स के बीच तेजी से बढ़ रहे मोटापे और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है. AIIMS के डॉक्टर्स का इन मामलों में कहना है कि बदलती जीवनशैली, जंक फूड की बढ़ती आदत, फिजिकल एक्टिविटी में कमी और स्क्रीन पर बढ़ता समय युवाओं की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अगर समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले सालों में डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल डिजीज के मामले और अधिक बढ़ सकते हैं.

आज के दौर में बच्चों और किशोरों का अधिकांश समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी के सामने बीतता है. इसके कारण उनकी शारीरिक गतिविधियां सीमित हो गई हैं. साथ ही फास्ट फूड, शुगर युक्त ड्रिंक पदार्थ और असंतुलित खानपान भी वजन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. AIIMS हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि मोटापा अब सिर्फ एक सौंदर्य संबंधी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि ये कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है.

मोटापा बढ़ा रहा कई गंभीर बीमारियों का खतरा

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि टीनएज में बढ़ने वाला मोटापा शरीर के कई अंगों और कार्य प्रणालियों को प्रभावित करता है. अधिक वजन के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, फैटी लिवर और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी मोटापे से जुड़ी हुई हैं.

डॉक्टर्स का कहना है कि अगर बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या को शुरुआती चरण में कंट्रोल कर लिया जाए, तो भविष्य में कई गंभीर स्थितियों के रिस्क से बचा जा सकता है. इसलिए स्कूल, परिवार और समाज को मिलकर बच्चों में नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन की आदत विकसित करनी चाहिए.

किशोरियों में बढ़ रहा PCOS, लाइफस्टाइल में सुधार करना है जरूरी

AIIMS विशेषज्ञों ने किशोरियों में बढ़ते PCOS के मामलों पर भी चिंता जताई है. PCOS एक हार्मोनल विकार है, जिसके कारण मासिक धर्म अनियमित होना, वजन बढ़ना, चेहरे पर अतिरिक्त बाल आना और भविष्य में प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली PCOS के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.

डॉक्टर कहते हैं कि संतुलित पोषण, रोजाना कम से कम 30 से 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम को सीमित करके इस समस्या के जोखिम को कम किया जा सकता है. 

उन्होंने माता-पिता और स्कूलों से भी अपील की है कि वे बच्चों में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा दें और डिजिटल वेल-बीइंग पर ध्यान दें. डॉक्टरों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली ही मोटापा और PCOS जैसी बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

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