सोचिए, आधी रात को तेज बुखार हो या किसी गर्भवती महिला को अचानक लेबर पेन शुरू हो जाए, और सबसे नजदीकी अस्पताल 40 किलोमीटर दूर पहाड़ी रास्ते पर हो. ऐसे में दिल की धड़कनें बढ़ना लाजिमी है. भारत के दूरदराज के गांवों और पहाड़ी इलाकों में सालों से लोग इसी डर में जी रहे थे. लेकिन अब वक्त बदल रहा है. मोबाइल हेल्थ वैन (Mobile Health Vans) ने इन पिछड़े और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी है. जहां कभी सड़कें तक नहीं थीं, वहां अब 'पहियों वाला अस्पताल' खुद मरीजों के दरवाजे तक पहुंच रहा है.
पहाड़ के लोगों की जुबानी-
अब लगता है कि कोई हमारा भी ख्याल रखने वाला है. उत्तराखंड के एक छोटे से पहाड़ी गांव में रहने वाली 62 साल की बिमला देवी बताती हैं, पहले हल्की सी बीमारी में भी पूरा दिन खराब हो जाता था. पहाड़ उतरी, फिर बस पकड़कर शहर के अस्पताल जाओ. लाइनों में लगो. कई बार तो कंधे और खाट पर ढोकर मरीज को ले जाना पड़ता था, लेकिन अब तो यह वैन हर हफ्ते हमारे गांव के पास आती है. डॉक्टर बाबू खुद ब्लड प्रेशर मापते हैं, शुगर चेक करते हैं और फ्री में दवा भी दे देते हैं. हमारे लिए तो यह भगवान के भेजे फरिश्ते जैसे है.
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वहीं हिमाचल प्रदेश के एक गांव के रमेश सिंह का कहना है, पहाड़ों में एम्बुलेंस बुलाना एक बड़ा टास्क होता था. लेकिन नई वैन आने से अब छोटे-मोटे इलाज के लिए शहर भागने का झंझट खत्म हो गया है.

लोगों ने बताया कैसे उनके लिए वदान बन रही ये बैन. (Image NDTV)
कैसे वरदान बन रही है मोबाइल हेल्थ वैन?
यह सिर्फ एक गाड़ी नहीं है, बल्कि एक चलता-फिरता छोटा अस्पताल है. इसमें एक डॉक्टर, एक नर्स या इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और जरूरी दवाइयों का पूरा स्टॉक होता है.
घर बैठे फ्री इलाज- इन वैनों की वजह से ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, बुखार, बीपी और शुगर की जांच के लिए पैसे और समय खर्च कर शहर नहीं जाना पड़ता
क्या-क्या सुविधा होती है-
जांच की सुविधा- कई मोबाइल वैन में खून की बेसिक जांच और ईसीजी (ECG) जैसी सुविधाएं भी मौजूद होती हैं.
गर्भवती महिलाओं और बच्चों- गांवों में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) को बढ़ावा देने और बच्चों को समय पर टीका लगाने में इन वैनों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है.
क्या है National Ambulance Service (NAS) की नई गाइडलाइंस-
स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए The Ambulance Service (NAS) Operational Guidelines, 2026 लागू की गई हैं. यह सरकार की तरफ से उठाया गया एक ऐसा कदम है, जो इमरजेंसी के समय लाखों जानें बचाएगा. 20 मिनट में पहुंचेगी एम्बुलेंस. सरकार का लक्ष्य है कि जैसे ही कोई इमरजेंसी कॉल आए, औसतन 20 मिनट के अंदर एम्बुलेंस घटना वाली जगह पर पहुंच जाए.
- कंट्रोल रूम में बैठे होंगे डॉक्टर- अगर मरीज की हालत गंभीर है, तो एम्बुलेंस के अंदर से ही कंट्रोल रूम में बैठे सीनियर डॉक्टरों से तुरंत मेडिकल सलाह ली जा सकेगी.
- ट्रेन्ड स्टाफ की मौजूदगी- हर एम्बुलेंस में एक कुशल इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) मौजूद रहेगा, जो अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज की जान बचाने के लिए जरूरी फर्स्ट-एड दे सकेगा.
- GPS से लाइव ट्रैकिंग- सभी एम्बुलेंस को जीपीएस से जोड़ा गया है, जिससे कंट्रोल रूम रीयल-टाइम में देख सकेगा कि गाड़ी कहां है और मरीज तक कितनी देर में पहुंचेगी.
कैसे बदल रही है देश की सेहत-
मोबाइल हेल्थ वैन और नई एम्बुलेंस गाइडलाइंस ने मिलकर देश के उन हिस्सों में भी उम्मीद की किरण जगाई है. स्वास्थ्य सेवाएं अब सिर्फ बड़े शहरों के आलीशान अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश के हर नागरिक का अधिकार बन रही हैं.
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