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भारत में बंद हुई मेनोपॉज की दवा प्रेमारिन क्रीम, अब महिलाओं के सामने क्या हैं ऑप्शन?

भारत में मेनोपॉज की दवा प्रेमारिन क्रीम बंद हो गई है. इस आर्टिकल में जानें अब महिलाओं के पास क्या-क्या विकल्प बचे हैं?

भारत में बंद हुई मेनोपॉज की दवा प्रेमारिन क्रीम, अब महिलाओं के सामने क्या हैं ऑप्शन?
भारत में बंद हुई प्रेमारिन क्रीम.
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दुनिया की जानी-मानी दवा कंपनी फाइजर (Pfizer) ने भारत में अपनी बेहद पॉपुलर 'प्रेमारिन वेजाइनल क्रीम' (Premarin Vaginal Cream) की सप्लाई को कुछ समय के लिए रोक दिया है. इस फैसले के बाद से डॉक्टरों और मरीजों, दोनों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि भारत में इस बीमारी के इलाज के लिए पहले से ही बहुत कम दवाएं मौजूद हैं.

​फाइजर ने क्यों लिया यह फैसला?

कंपनी की एशिया-पैसिफिक (APAC) मीडिया रिलेशंस की सीनियर डायरेक्टर तृप्ति वाघ ने गुरुवार को बताया कि सप्लाई चेन में आ रही कुछ दिक्कतों (Supply Challenges) की वजह से कंपनी को यह फैसला लेना पड़ा है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि कंपनी इस समस्या को सुलझाने की पूरी कोशिश कर रही है ताकि बाजार में इस क्रीम की सप्लाई को जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जा सके. 

​क्या काम आती है यह क्रीम?

प्रेमारिन क्रीम में कई तरह के एस्ट्रोजन हार्मोन्स का मिक्चर होता है. महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान जब एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है, तो उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. यह क्रीम वेजाइनल ड्राइनेस, संबंध बनाते समय होने वाले दर्द और मेनोपॉज से जुड़े दूसरे लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों द्वारा दी जाती है. यह क्रीम सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा और सिंगापुर जैसे बड़े देशों में भी बेची जाती है. 

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इस दवा के रोक के बाद महिलाओं के पास क्या ऑप्शन. (Image NDTV) 

​भारत के बाजार पर कितना बड़ा असर?

पुणे की रिसर्च फर्म फार्मारैक (Pharmarack) के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक के 12 महीनों में भारत में इस क्रीम के 6 लाख 20 हजार से ज्यादा यूनिट्स बिके थे. इसका सीधा मतलब यह है कि इस कैटेगरी में बिकने वाली कुल दवाओं में से आधी से ज्यादा हिस्सेदारी अकेले प्रेमारिन क्रीम की थी. ​कमाई के मामले में भी इसका दबदबा साफ दिखता है. इस दौरान प्रेमारिन क्रीम ने करीब 26.6 करोड़ रुपये (2.76 मिलियन डॉलर) का बिजनेस किया, जो भारत के पूरे कॉन्जुगेटेड एस्ट्रोजन मार्केट का 37% हिस्सा है. साल 2022 में इसकी बिक्री सिर्फ 6.2 करोड़ रुपये थी, जो अब चार गुना से भी ज्यादा बढ़ चुकी है. इससे पता चलता है कि भारतीय महिलाएं इस इलाज पर कितना भरोसा कर रही थीं.

​अब मरीजों के पास क्या ऑप्शन बचे हैं?

मेनोपॉज के लक्षणों के इलाज के लिए भारत में ऑप्शन पहले से ही बहुत सीमित हैं. मेनोपॉज अवेयरनेस के लिए काम करने वाले प्लेटफॉर्म मेनोपॉजवाइज की फाउंडर और जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुखप्रीत पटेल ने बताया, अगर हम पूरी दुनिया की बात करें तो महिलाओं के लिए क्रीम, रिंग्स और ओव्यूल्स जैसे कई ऑप्शंस मौजूद हैं. लेकिन भारत में मुख्य रूप से सिर्फ दो ही ऑपशन थे फाइजर की प्रेमारिन और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स की इवलॉन (Evalon) क्रीम.  ​डॉ. पटेल ने बताया कि पिछले साल के आखिर से ही मरीज शिकायत कर रहे थे कि उन्हें प्रेमारिन क्रीम नहीं मिल रही है. शुरुआत में लगा कि यह पूरी दुनिया में चल रही हार्मोन थेरेपी की कमी का हिस्सा है, क्योंकि अमेरिका जैसे देशों में भी एस्ट्रोजन पैच और प्रोजेस्टेरोन कैप्सूल की भारी किल्लत देखी गई है.

​ऑनलाइन फार्मेसी पर भी आउट ऑफ स्टॉक

अगर आप आज के समय में टाटा 1MG, नेटमेड्स (Netmeds), मेडप्लस मार्ट (MedPlus Mart) या ट्रूमैड्स (Truemeds) जैसी बड़ी ऑनलाइन दवाओं की वेबसाइट्स पर जाएंगे, तो आपको प्रेमारिन क्रीम आउट ऑफ स्टॉक (Out of Stock) ही मिलेगी.

​भारत में तेजी से बढ़ रही है मरीजों की संख्या-

मार्केट रिसर्च फर्म ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, साल 2025 में दुनिया के एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2.8% थी. यह मार्केट 2025 में 334.5 मिलियन डॉलर का था, जिसके 2033 तक बढ़कर 604.6 मिलियन डॉलर होने की उम्मीद है. ​इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी का अनुमान है कि साल 2026 तक भारत में 45 साल और उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं की संख्या करीब 40 करोड़ (400 मिलियन) तक पहुंच जाएगी. इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद, आज भी हमारे देश में मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं को लेकर जागरूकता और इलाज की दर बहुत कम है. ऐसे में एक जरूरी दवा का बाजार से अचानक गायब होना महिलाओं की सेहत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.

(By Mrinalika Roy)

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