15 अगस्त से भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का आगाज होने जा रहा है. इस हाई-वोल्टेज एक्शन से पहले हम टेस्ट क्रिकेट के एक ऐसे विवाद का जिक्र करने जा रहे हैं, जिसने फैंस को हैरान कर दिया था. यह मामला साल 2001 का है, जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर पर बॉल टैंपरिंग का आरोप लगा. हां सही सुना, और आरोप के बाद जो हुआ वो और भी ज्यादा चौंकाने वाला था. इस फैसले ने भारत में ऐसा बवाल मचाया कि बीसीसीआई और आईसीसी आमने-सामने आ गए थे.
सचिन पर लगा मैच फीस का 75 प्रतिशत जुर्माना
दरअसल, यह मामला नवंबर 2001 में दक्षिण अफ्रीका के पोर्ट एलिजाबेथ में खेले गए दूसरे टेस्ट के बाद सामने आया था. मैच रेफरी माइक डेनेस ने वीडियो फुटेज देखने के बाद सचिन तेंदुलकर पर गेंद की सीम (गेंद के बीच मौजूद सिलाई वाली लाइन) साफ करने के दौरान अंपायर की अनुमति नहीं लेने का आरोप लगाया. डेनेस ने इसे नियमों का उल्लंघन माना और सचिन पर एक टेस्ट मैच का निलंबित प्रतिबंध (Suspended Ban) लगा दिया. इसके साथ ही उनकी मैच फीस का 75 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया.
सचिन के अलावा पांच भारतीय खिलाड़ी भी हुए थे दंडित
इस टेस्ट के बाद केवल सचिन ही नहीं, बल्कि कई भारतीय खिलाड़ियों पर भी कार्रवाई हुई. वीरेंद्र सहवाग पर अत्यधिक अपील (Excessive Appealing) करने के कारण एक टेस्ट का प्रतिबंध और 75 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया गया. कप्तान सौरव गांगुली पर खिलाड़ियों को कंट्रोल नहीं कर पाने के आरोप में एक टेस्ट और दो वनडे का निलंबित प्रतिबंध लगाया गया. वहीं हरभजन सिंह, शिवसुंदर दास और दीप दासगुप्ता को भी अत्यधिक अपील करने के कारण जुर्माना और निलंबित सजा मिली.
सचिन के सपोर्ट में भड़क उठा था विरोध, बीसीसीआई ने भी दिया साथ
माइक डेनेस के फैसले का भारत में जबरदस्त विरोध हुआ. बीसीसीआई ने साफ कहा कि सचिन ने गेंद से कोई छेड़छाड़ नहीं की थी, बल्कि वह सिर्फ गेंद की सीम साफ कर रहे थे. क्रिकेट फैंस से लेकर पूर्व खिलाड़ियों तक ने इस फैसले की आलोचना की. देखते ही देखते यह विवाद भारत और आईसीसी के बीच टकराव का कारण बन गया.
ICC को बदलना पड़ा अपना रुख
विवाद बढ़ने के बाद आईसीसी ने सफाई दी कि सचिन को बॉल टैंपरिंग का दोषी नहीं ठहराया गया था. बोर्ड के मुताबिक उनका अपराध केवल अंपायर की अनुमति के बिना गेंद को साफ करना था, जो नियमों का उल्लंघन जरूर था, लेकिन इसे बॉल टैंपरिंग जैसी गंभीर श्रेणी में नहीं रखा गया. हालांकि तब तक पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था.
भारत-इंग्लैंड टेस्ट भी विवादों में घिर गया था
इस विवाद का असर दक्षिण अफ्रीका दौरे तक सीमित नहीं रहा. भारत ने माइक डेनेस को मैच रेफरी मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद भारत और इंग्लैंड के बीच मोहाली में खेला गया पहला टेस्ट आईसीसी की आधिकारिक मान्यता से बाहर हो गया. इस मुकाबले को बाद में अनऑफिशियल टेस्ट माना गया, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे असाधारण घटनाओं में गिना जाता है. करीब 25 साल बाद भी सचिन तेंदुलकर से जुड़ा यह मामला क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में गिना जाता है.
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