Tukaram Mundhe IAS: महाराष्ट्र के बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और होटलों में आजकल एक ही नाम का खौफ है.. IAS तुकाराम मुंढे. मुंबई के नामी होटलों के मालिक इन दिनों सुबह उठकर यही दुआ करते हैं कि गलती से भी इनकी टीम उनके यहां चेकिंग करने न आ जाए. उनकी लगातार छापेमारी और मिलावटी खाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है. उसके ताबड़तोड़ छापों से तंग आकर एक फाइव स्टार होटल वाले हाईकोर्ट पहुंच गए. लेकिन कोर्ट में जो हुआ, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया. मुंबई हाईकोर्ट ने तुकाराम मुंढे को मंत्रालय, हाईकोर्ट और दूसरे सरकारी संस्थानों की कैंटीन की भी जांच करने के निर्देश दिए. इसके बाद हाईकोर्ट की कैंटीन में भी जांच हुई और तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा में आ गए. आइए जानते हैं तुकाराम मुंढे कौन हैं, जिनके नाम से होटल वालों के पसीने छूट रहे हैं और जिनके खिलाफ अब उनके ही डिपार्टमेंट के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है.
तुकाराम मुंढे कौन हैं
तुकाराम मुंढे फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर हैं. वे 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं. तुकाराम महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे से किसान परिवार से आते हैं. पिता के साथ खेतों में काम करने और बाजार में सब्जी बेचने से लेकर IAS बनने तक का उनका सफर बहुत शानदार रहा है. उनकी पहचान बिना डरे काम करने की है.
20 साल में 25 बार हुआ ट्रांसफर
तुकाराम मुंढे का नाम जितना उनके काम की वजह से चर्चा में रहा, उतना ही उनके लगातार ट्रांसफर भी सुर्खियों में रहे. बताया जाता है कि करीब 20 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है. इसके बावजूद उन्होंने अपने काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं किया.
दबंग मंत्री का काफिला रोका, 'वाटर मैन' का खिताब
2015 में तुकाराम मुंढे ने एक दबंग मंत्री के काफिले को ही रोक दिया था. सोलापुर में जब वो पोस्टेड थे, तो उन्होंने सूखे से तड़पते गांवों में पानी पहुंचाकर 'वाटर मैन' का खिताब जीता था. नेता उन्हें जिद्दी मानते हैं, लेकिन जनता के बीच उनकी छवि हीरो की तरह है. यहां तक कि विधानसभा में विपक्ष के नेता भी कह रहे हैं कि उनका ट्रांसफर न किया जाए और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.
FDA का चार्ज मिलते ही ताबड़तोड़ एक्शन
25 मई को जब उन्हें फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) का कमिश्नर बनाया गया, तो उन्होंने सिर्फ 3 दिन बाद ही मिलावटखोरों के खिलाफ हल्ला बोल दिया. सिर्फ 2 महीने के अंदर पूरे महाराष्ट्र में दनादन रेड मारी गई और 1100 से ज्यादा छापे पड़े. रुस्तम एंड कंपनी और नूर मोहम्मदी जैसे 56 नामी ब्रांड्स और बड़े-बड़े रेस्टोरेंट के फूड लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए. 49 करोड़ रुपए से ज्यादा का खराब और मिलावटी खाना जब्त किया गया. गुटखा माफियाओं पर तो मकोका (MCOCA) लगा दिया. पहले जहां साल भर में 15,000 सैंपल चेक होते थे, मुंढे के आने के बाद सिर्फ 15 दिन में 8700 सैंपल की टेस्टिंग हो गई.
हाईकोर्ट की कैंटीन पर छापे मारे
मुंढे की टीम ने नवी मुंबई के एक बड़े फाइव स्टार होटल का लाइसेंस रद्द कर दिया. होटल वाले इसके खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट चले गए. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान FDA (मुंढे के विभाग) से कहा,'सिर्फ एक-दो कॉकरोच मिलने पर सीधे लाइसेंस रद्द कर देना थोड़ा ज्यादा है. आप लोग सिर्फ प्राइवेट होटलों पर ही डंडा क्यों चला रहे हैं. अगर आप इतने ही सख्त हैं, तो जाइए मंत्रालय, सरकारी ऑफिस और हाईकोर्ट की कैंटीनों में भी छापा मारिए और हमें रिपोर्ट दीजिए.' इसके बाद हाईकोर्ट परिसर की कैंटीन भी जांच के दायरे में आई और तुकाराम की टीम ने छापेमारी की.
तुकाराम से अपने डिपार्टमेंट वाले क्यों नाराज हैं
तुकाराम मुंढे खुद सुबह 9:30 बजे ऑफिस पहुंच जाते हैं, लेकिन उनका यही वर्क कल्चर अब उनके स्टाफ को भारी पड़ रहा है. औरंगाबाद के छत्रपति संभाजीनगर की FDA लैब के 29 कर्मचारियों ने मंत्री को चिट्ठी लिखकर मुंढे की शिकायत कर दी है. कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ कम है और मुंढे सर ने लैब को दो शिफ्ट में सुबह 9 से रात 12 बजे तक चालू कर दिया है. शनिवार, रविवार और छुट्टी के दिन भी काम कराया जा रहा है. इतने दबाव और जल्दबाजी में टेस्टिंग होगी, तो काम की क्वालिटी खराब हो सकती है.
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