हिमालय के ऊंचे पहाड़ों पर पाई जाने वाली बेहद दुर्लभ और चमत्कारी जड़ी-बूटी है कीड़ा जड़ी, इसे हिमालयन गोल्ड और यार्सागुम्बा के नाम से भी जाना जाता है. आपको बता दें कि कीड़ा जड़ी मुख्य रूप से भारत के हिमालयी इलाकों, तिब्बत, नेपाल और भूटान के ऊंचे पहाड़ों पर पाई जाती है. देखने में इसकी जड़ किसी कीड़े जैसी ही लगती है, इसलिए भारत में लोग इसे कीड़ा जड़ी कहते हैं.
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान की मई 2020 की एक रिसर्च में बताया गया है कि इसका उपयोग कई बीमारियों जैसे दस्त, सिरदर्द, खांसी, गठिया, अस्थमा, फुफ्फुसीय रोग, हृदय संबंधी विकार, यौन रोग, गुर्दे और यकृत रोग के उपचार के लिए सदियों से चीनी पारंपरिक चिकित्सा और भूटानी स्वदेशी चिकित्सा में किया जाता है. बताया गया है कि चीन ने 1964 में इसे आधिकारिक तौर पर एक दवाई के रूप में चिह्नित किया था.

कीड़ा जड़ी बूटी के फायदे. (Image NDTV)
कीड़ा जड़ी बूटी के फायदे- (Keeda Jadi Ke Fayde)
1. सांस और फेफड़ों-
खांसी, अस्थमा और सांस की पुरानी तकलीफों में इसे बेहद उपयोगी माना गया है.
2. थकान और कमजोरी-
यह शरीर को तुरंत एनर्जी देने और खून के बहाव को बेहतर बनाने में मददगार है.
3. लिवर और किडनी-
पारंपरिक रूप से इसका सेवन गुर्दे और लिवर को ठीक करने के लिए किया जाता है.
4. गठिया और पेट दर्द-
यह जोड़ों के दर्द, दस्त और सिरदर्द में भी मददगार मानी जाती है.
5. हाइपरटेंशन-
कीड़ा जड़ी में एंटी-प्रोलिफेरेटिव और वैसो-रिलैक्सेंट गुण होते हैं, इसलिए यह पल्मोनरी हाइपरटेंशन के इलाज के लिए एक असरदार ऑप्शन हो सकती है.
कैसे करें सेवन और क्या बरतें सावधानियां-
- आम तौर पर लोग कीड़ा जड़ी को सुखाकर पाउडर के रूप में, काढ़ा बनाकर या गुनगुने दूध के साथ लेते हैं.
- कीड़ा जड़ी बहुत गर्म और तेज तासीर की होती है, इसलिए डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के बिना इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
क्या कहती है रिसर्च-
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की इस रिसर्च में कीड़ा जड़ी (यार्सागुम्बा) के औषधीय गुणों, फेफड़ों की बीमारी में इसकी उपयोगिता और एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है.
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