Kida Jadi: हिमालय की ऊंची और बर्फीली पहाड़ियों में पाई जाने वाली कीड़ा जड़ी की डिमांड दुनियाभर में है. यही कारण है कि इसकी कीमत सोने-चांदी से भी ज्यादा है और यह सबसे महंगी जड़ी-बूटियों में गिनी जाती है. दुनिया इसे यार्सागुम्बा के नाम से जानती है. इसे 'हिमालयन वियाग्रा' भी कहा जाता है. कीड़ा-जड़ी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी हैं, जिनमें से एक कि क्या सचमुच कीड़ा जड़ी कीड़े से बनी होती है या इसके नाम में कीड़ा शब्द किसी और वजह से है? आइए जानते हैं..
कीड़ा जड़ी क्या है, कैसे बनती है
कीड़ा-जड़ी कोई आम पौधा नहीं है. ये असल में एक कीड़े और फंगस का अनोखा मेल होती है. हिमालयी इलाकों में एक खास तरह का कैटरपिलर जमीन के अंदर रहता है. उसी पर एक फंगस अटैक करता है और धीरे-धीरे पूरे कीड़े को अपने अंदर ले लेता है. जब बर्फ पिघलती है, तो जमीन से कीड़े जैसी एक जड़ी बाहर दिखती है. इसी को कीड़ा-जड़ी यानी यार्सागुम्बा कहते हैं. यही वजह है कि कहा जाता है यह कीड़े से बनी हुई जड़ी है.
कीड़ा-जड़ी कहां-कहां मिलती है
कीड़ा जड़ी सिर्फ कुछ खास जगहों पर ही मिलती है. ये नेपाल, भूटान, तिब्बत और भारत के हिमालयी इलाकों में पाई जाती है. इसे ढूंढने के लिए लोग 3000 से 5000 मीटर की ऊंचाई तक जाते हैं, जहां ऑक्सीजन कम होती है और ठंड बहुत ज्यादा होती है. मई से जुलाई के बीच का वक्त इसका सीजन माना जाता है.
कीड़ा-जड़ी की कीमत सोने से भी ज्यादा क्यों है
असल में इसकी पैदावार बहुत कम होती है और इसे ढूंढना बेहद मुश्किल है. यही वजह है कि इसकी कीमत आसमान छूती है. नेपाल में 2025 तक इसकी कीमत करीब 20 से 30 लाख नेपाली रुपये प्रति किलो बताई जाती है. भारतीय रुपये में ये कीमत लगभग 12 से 18 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है. भारत में इसकी कीमत 15 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है. विदेशों में तो इसके दाम इससे भी ज्यादा हैं. यही कारण है कि लोग इसे सोने से भी ज्यादा कीमती मानते हैं.
कीड़ा जड़ी के फायदे
कीड़ा जड़ी को हिमालयन वियाग्रा यूं ही नहीं कहा जाता है. माना जाता है कि ये शरीर में ताकत और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है. इसके सेवन से कमजोरी दूर होती है, अच्छी नींद आती है और पुरुषों का स्टैमिना बढ़ता है. यही वजह है कि लोग इसे वियाग्रा जैसा असरदार मानते हैं. \
ताकत बढ़ाने के अलावा भी इसके कई फायदे बताए जाते हैं. कहा जाता है कि ये इम्यून सिस्टम मजबूत करती है, उम्र बढ़ने के असर को कम करती है, फेफड़ों की ताकत बढ़ाने में मदद करती है, शरीर को अंदर से एक्टिव रखती है. हालांकि, हर किसी पर इसका असर अलग हो सकता है.
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