कभी भारत की पहचान दाल, रोटी, चावल और सब्ज़ी से होती थी. घर का सादा, ताजा और पौष्टिक खाना ही रोज़ की थाली का हिस्सा था. लेकिन, अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. संसद में 29 जनवरी को पेश इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, भारतीय हर साल करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये का प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खा रहे हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 20 सालों में ऐसे खाने की बिक्री करीब 4000 फीसदी तक बढ़ चुकी है. यह बदलाव सिर्फ स्वाद या सुविधा का नहीं, बल्कि हमारी सेहत और भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.
गांवों तक पहुंचा जंक फूड
रिपोर्ट बताती है कि भारत आज उन देशों में शामिल है, जहां अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बाजार सबसे तेजी से बढ़ रहा है. इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट वाले चिप्स, मीठे ड्रिंक्स, बिस्कुट और रेडी-टू-ईट खाना अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. गांवों की दुकानों पर भी ये चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं. तेज लाइफस्टाइल, समय की कमी और आसानी से उपलब्ध होने की वजह से जंक फूड धीरे-धीरे लोगों की रोज की डाइट का हिस्सा बनता जा रहा है. कई बार सस्ता और जल्दी मिलने वाला खाना सेहत से ज्यादा अहम बन जाता है.
सेहत पर पड़ रहा है सीधा असर
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, साल 2005 से 2019 के बीच भारत में मोटापा लगभग दोगुना हो गया है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि आज करीब 24 फीसदी महिलाएं और 23 फीसदी पुरुष ओवरवेट या मोटापे से जूझ रहे हैं. जंक फूड में मौजूद ज़्यादा शुगर, नमक और खराब फैट शरीर के संतुलन को बिगाड़ देते हैं। इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन एक बार बीमारी शुरू हो जाए तो उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
खतरे में बच्चों की हेल्थ
बच्चों के मामले में हालात और भी चिंताजनक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में करीब 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार थे. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2035 तक यह संख्या बढ़कर 8.3 करोड़ तक पहुंच सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि बचपन में गलत खान-पान की आदतें आगे चलकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकती हैं.

कई बीमारियों की जड़ बनता जंक फूड
इकोनॉमिक सर्वे साफ़ तौर पर कहता है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सिर्फ मोटापा ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और यहां तक कि मानसिक सेहत से जुड़ी दिक्कतों का खतरा भी बढ़ा रहा है. ज्यादा शुगर, नमक और ट्रांस फैट वाला खाना धीरे-धीरे पारंपरिक भारतीय भोजन को पीछे छोड़ रहा है.
टैक्स बढ़ाने का सुझाव:
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले जंक फूड पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए. इसका मकसद लोगों को हेल्दी खाने की तरफ प्रेरित करना और जंक फूड की खपत को कम करना है.
आखिर में, इकोनॉमिक सर्वे का संदेश साफ है अगर समय रहते खान-पान की आदतें नहीं बदली गईं, तो बदलती थाली भारत की सेहत पर भारी पड़ सकती है. अब जरूरत है कि सुविधा के साथ-साथ सेहत को भी उतनी ही अहमियत दी जाए.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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