आजकल लोग दूसरों के सामने खुद को सभ्य या स्मार्ट दिखाने के लिए कई बार गैस, डकार, छींक, उबासी या दूसरी प्राकृतिक जरूरतों को रोक लेते हैं. शुरुआत में यह मामूली बात लग सकती है, लेकिन अगर यह आदत रोज की बन जाए तो धीरे-धीरे इसका असर शरीर और स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर किसी चीज की जरूरत महसूस करता है, तो वह हमें संकेत देता है जैसे भूख लगना, प्यास लगना, नींद आना, पेशाब या शौच की जरूरत महसूस होना. इन संकेतों को लंबे समय तक दबाना सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता.
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यूरिन और मल को रोकना पड़ सकता है भारी
काम की जल्दबाजी, यात्रा या साफ टॉयलेट न मिलने की वजह से कई लोग लंबे समय तक यूरिन या मल को रोककर रखते हैं. बताया जाता है कि ऐसा करने से कब्ज जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. बार-बार पेशाब रोकने की आदत ब्लैडर, किडनी और कब्ज जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है.
गैस और डकार दबाने की आदत
कई बार लोग पब्लिक जगहों पर गैस या डकार आने पर उसे रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या ये करना सही है? इन्हें लगातार दबाना पेट फूलना, असहनीय दर्द, सीने में जलन और एसिडिटी जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है.
छींक और उबासी रोकना सही नहीं
कभी मीटिंग में या लोगों के बीच बैठे होने पर हम छींक या उबासी को रोक लेते हैं, लेकिन यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. बार-बार ऐसा करने से सिर, गर्दन और चेहरे में तनाव महसूस हो सकता है.
भूख और प्यास को नजरअंदाज न करें
काम के दबाव में कई लोग समय पर खाना नहीं खाते या पानी पीना टाल देते हैं, लेकिन लंबे समय तक भूख और प्यास को अनदेखा करना से कमजोरी, चक्कर आने जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.
आंसुओं को हमेशा न रोकें
अक्सर लोगों को यह सिखाया जाता है कि रोना कमजोरी की निशानी है. इसी वजह से कई लोग अपनी भावनाएं दबाकर रखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं लगातार अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करने से तनाव बढ़ सकता है.
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