सीने में अचानक जकड़न, दिल की धड़कन का तेज हो जाना और सांस लेने में परेशानी... अगर इन में से कोई एक भी लक्षण किसी 25-30 साल की उम्र में ही दिखता है, तो उनके मन में एक ही सवाल उठता है, 'क्या मुझे हार्ट अटैक आ रहा है या यह सिर्फ पैनिक अटैक है?'
सीके बिड़ला हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अंशुल कुमार जैन का कहना है कि आजकल हॉस्पिटल की इमरजेंसी में ऐसे युवा लगातार पहुंच रहे हैं, जो हेल्दी दिखते हैं लेकिन अचानक हुए इन लक्षणों से घबरा जाते हैं. परेशानी ये है कि पैनिक अटैक और हार्ट अटैक के कई लक्षण एक जैसे होते हैं, जिससे दोनों में अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है.
लोगों में क्यों होता है, पैनिक अटैक और हार्ट अटैक को लेकर कंफ्यूजन?
डॉक्टर अंशुल कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा स्ट्रेस या डर महसूस होता है, तो शरीर में एड्रेनालिन नाम का हार्मोन तेजी से बढ़ता है. इसी तरह हार्ट अटैक के दौरान भी शरीर में कई बदलाव होते हैं. दोनों ही स्थितियों में कुछ समान लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे-
- दिल की धड़कन का तेज हो जाना
- काफी ज्यादा पसीना आना
- जी मिचलाना
- बेचैनी या डर महसूस होना
- सीने में भारीपन
दोनों के लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं, जिसकी वजह से कई बार लोग समझ नहीं पाते कि उन्हें पैनिक अटैक हो रहा है या हार्ट अटैक.
हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों को आता है, ऐसा सोचना है गलत
डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर लोगों को लगता है कि हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों को आता है. इसलिए 20 या 30 की उम्र में सीने में दर्द होने पर युवा इसे स्ट्रेस, ज्यादा कॉफी पीने या नींद की कमी का असर मान लेते हैं.
अधिकतर मामलों में इस एज के लोगों को ये डर सही भी नहीं होता और समस्या चिंता या तनाव से जुड़ी होती है. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि युवाओं को हार्ट डिजीज नहीं हो सकती है. आज के समय में युवाओं में भी हार्ट से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं.
युवाओं में क्यों बढ़ रहा है हार्ट डिजीज?
आज के समय में न सिर्फ बुजुर्गों को बल्कि युवाओं को भी हार्ट डिजीज का खतरा रहता है, जिसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जैसे-
- धूम्रपान या वेपिंग
- काफी ज्यादा नसीले पदार्थ का सेवन
- दिल की धड़कन से जुड़ी जन्मजात समस्याएं
- परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास
- खराब लाइफस्टाइल
पैनिक अटैक और हार्ट अटैक में कैसे करें फर्क?
पैनिक अटैक और हार्ट अटैक के कुछ लक्षण लगभग एक जैसे दिखते हैं, लेकिन इसकी पहचान शरीर में दिखने वाले बदलावों की की जा सकती है, जैसे-
अक्सर किसी तनावपूर्ण स्थिति या इमोशमल कारण के बाद सीने में दर्द होना और कुछ मिनटों में ही स्थिति काफी गंभीर हो जाना. इस स्थिति में ऐसा लग सकता है कि नियंत्रण खो रहा है या कुछ बुरा होने वाला है. फिर थोड़ी देर बाद लक्षण कम होने लगते हैं. ऐसे संकेत दिखे, तो समझ जाएं कि पैनिक अटैक है.
हार्ट अटैक की स्थिति में सीने का दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और आसानी से कम नहीं होता. इस स्थिति में आराम करने या गहरी सांस लेने से राहत नहीं मिलती. धीरे-धीरे हार् अटैक का दर्द कंधे, हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है. साथ ही ठंडा पसीना आना, शरीर की स्थिति बदलने से दर्द में खास फर्क नहीं पड़ता. वहीं, चलने, सीढ़ियां चढ़ने या किसी शारीरिक गतिविधि से दर्द बढ़ सकता है.
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