युवाओं में हार्ट अटैक के मामले अब पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. तंबाकू का सेवन, ज्यादा तनाव, नींद पूरी न होना और शरीर में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं. पहले हार्ट अटैक को ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों से जुड़ी बीमारी माना जाता था. लेकिन अब डॉक्टर कम उम्र के लोगों में भी दिल से जुड़ी समस्याओं और उनके जोखिम को देख रहे हैं. मुंबई के घाटकोपर स्थित ज़ायनोवा शाल्बी हॉस्पिटल के जाने-माने कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिलाष मिश्रा का कहना है कि आज की लाइफस्टाइल में शारीरिक मेहनत या व्यायाम की कमी, तंबाकू का सेवन, वेपिंग, ज्यादा तनाव, नींद की कमी, गलत खान-पान और शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं धीरे-धीरे दिल को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
क्यों बढ़ रहा 40 साल से कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा-
कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. इसलिए सिर्फ कम उम्र होने के कारण यह मान लेना सही नहीं है कि आपको दिल की बीमारी का खतरा नहीं हो सकता. 20 या 30 साल की उम्र का व्यक्ति देखने में पूरी तरह स्वस्थ लग सकता है, लेकिन उसके शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ, ब्लड प्रेशर ज्यादा, डायबिटीज या परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी होने का इतिहास हो सकता है. ये सभी चीजें लंबे समय तक शरीर के अंदर बिना किसी बड़े लक्षण के रक्त की नसों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए युवाओं को अपनी दिल की सेहत के बारे में कम उम्र से ही ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए. पहली बार स्वास्थ्य जांच कराने के लिए 40 या 50 साल की उम्र तक इंतजार नहीं करना चाहिए. समय-समय पर अपनी सेहत की जांच कराना जरूरी है.
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तंबाकू और वेपिंग कैसे पहुंचा रही नुकसान-
धूम्रपान दिल की बीमारी और हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण है. वहीं, वेपिंग को भी पूरी तरह सुरक्षित या नुकसानरहित नहीं माना जाना चाहिए. तंबाकू और वेपिंग में मौजूद निकोटीन दिल की धड़कन को तेज कर सकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है. यह शरीर की रक्त वाहिकाओं यानी खून ले जाने वाली नसों पर भी असर डाल सकता है.
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक तंबाकू या निकोटीन का इस्तेमाल करता है, तो उसके दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. यह खतरा तब और बढ़ सकता है जब व्यक्ति की लाइफस्टाइल में अन्य गलत आदतें भी हों, जैसे व्यायाम की कमी, खराब खान-पान, ज्यादा तनाव या नींद पूरी न होना.
तनाव और नींद का दिल पर असर-
आज के समय में लंबे समय तक काम करना, लगातार मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन देखना और रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा तनाव भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है. लगातार तनाव रहने से शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है. इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने, वजन बढ़ने और शरीर में दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ सकता है. युवाओं को हर दिन पर्याप्त और अच्छी नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए. इसके साथ अपनी दिनचर्या में रोजाना कुछ शारीरिक गतिविधि, जैसे पैदल चलना, व्यायाम या कोई खेल शामिल करना चाहिए. तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग, आराम के लिए समय निकालना या अपनी पसंद की गतिविधियां करना भी मददगार हो सकता है.
कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं-
कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने के लिए हमेशा अधिक उम्र होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है. खासकर उन लोगों को कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल की जांच पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें मोटापे की समस्या है, डायबिटीज है, ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है, धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं या परिवार में कम उम्र में किसी को दिल की बीमारी हो चुकी है. समय पर जांच कराने से शरीर में मौजूद जोखिमों का जल्दी पता चल सकता है. अगर कोलेस्ट्रॉल या कोई दूसरी समस्या शुरुआत में ही पता चल जाए, तो खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके उसे कंट्रोल करने की कोशिश की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाइयां भी शुरू कर सकते हैं. समय पर जांच और सही इलाज से आगे चलकर दिल की बीमारी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें-
- सीने में दर्द
- भारीपन
- सांस लेने में परेशानी
- बिना किसी वजह के ज्यादा पसीना आना
- जी मिचलाना
- चक्कर आना
- अचानक या असामान्य थकान महसूस होना
- पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द
हर व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण एक जैसे नहीं होते. कुछ लोगों में लक्षण हल्के हो सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में अचानक और गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर अचानक सीने में तेज दर्द या भारीपन, सांस लेने में परेशानी या ऐसे अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
दिल की सेहत का ध्यान कम उम्र से ही रखें
दिल की सेहत का ध्यान रखने के लिए किसी बीमारी या चेतावनी के संकेत का इंतजार नहीं करना चाहिए. दिल को स्वस्थ रखने की कोशिश बहुत कम उम्र से ही शुरू कर देनी चाहिए. युवा भारतीयों को तंबाकू और निकोटीन से दूर रहना चाहिए, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए, सतुलित और पौष्टिक खाना खाना चाहिए, तनाव को कम करने की कोशिश करनी चाहिए और पर्याप्त नींद लेनी चाहिए. इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसे जरूरी स्वास्थ्य संकेतकों की समय-समय पर जांच करानी चाहिए. अगर परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास है या कोई अन्य जोखिम मौजूद है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. दिल की बीमारी का खतरा केवल बड़ी उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है. कम उम्र में ही अपनी दिल की सेहत पर ध्यान देना भविष्य में हार्ट अटैक और दूसरी हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है.
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