H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में एक बात अक्सर देखने को मिलती है. कुछ दिनों तक तेज बुखार रहने के बाद मरीज को राहत मिलने लगती है और वह मान लेता है कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है. लेकिन कई बार कुछ दिनों की राहत के बाद फिर से बुखार लौट आता है या खांसी पहले से ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे संकेतों को सामान्य कमजोरी या रिकवरी का हिस्सा समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
क्या H1N1 से ठीक होने के बाद खांसी और थकान रहना सामान्य है?
फ्लू से उबरने के बाद शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में समय लगता है. बुखार उतरने के बाद भी कुछ दिनों तक खांसी, थकान और कमजोरी बने रहना सामान्य हो सकता है.
कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने, लंबी दूरी चलने या रोजमर्रा के काम करने में जल्दी थकान महसूस होती है. अगर हर दिन शरीर पहले से बेहतर महसूस कर रहा है और कोई नया लक्षण नहीं जुड़ रहा, तो यह रिकवरी का सामान्य हिस्सा माना जा सकता है. ऐसे समय में घबराने की बजाय पर्याप्त आराम, पौष्टिक भोजन और अच्छी नींद पर ध्यान देना जरूरी है.
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
चिंता की बात तब होती है जब मरीज ठीक होने के बाद फिर से बिगड़ने लगे.
इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है:
- बुखार दोबारा लौट आए
- खांसी पहले से ज्यादा बढ़ जाए
- सांस लेने में तकलीफ होने लगे
- सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो
- बलगम का रंग या मात्रा बदल जाए
ऐसे लक्षण फेफड़ों में दूसरे संक्रमण या निमोनिया का संकेत हो सकते हैं. इसलिए इन्हें सिर्फ फ्लू के बाद की कमजोरी समझकर टालना सही नहीं है.
क्या हर बार दोबारा बुखार आना निमोनिया का संकेत होता है?
नहीं. बुखार लौटने का मतलब हमेशा निमोनिया नहीं होता. इसकी असली वजह मरीज की पूरी स्थिति देखने के बाद ही पता चलती है.
डॉक्टर यह देखते हैं कि:
- बुखार कितने दिनों से है
- खांसी किस तरह की है
- मरीज को सांस लेने में परेशानी है या नहीं
- पहले से कोई बीमारी तो नहीं है
जरूरत पड़ने पर कुछ जांचों की मदद से यह पता लगाया जाता है कि मामला सामान्य रिकवरी का है या किसी नए संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है.
जल्दबाजी में सामान्य दिनचर्या शुरू करना पड़ सकता है भारी
बहुत से लोग बुखार उतरते ही ऑफिस जाना, यात्रा करना या पहले की तरह काम करना शुरू कर देते हैं. लेकिन फ्लू के बाद शरीर अंदर से पूरी तरह रिकवर नहीं हुआ होता.
ठीक महसूस होने के बाद भी कुछ दिनों तक शरीर को संभलने का मौका देना चाहिए. पर्याप्त पानी पीना, समय पर खाना खाना और भरपूर नींद लेना रिकवरी को तेज करने में मदद करता है.
बुखार लौटने पर खुद से एंटीबायोटिक लेना क्यों गलत है?
यह एक बड़ी गलती है जो कई मरीज करते हैं.
H1N1 एक वायरल संक्रमण है और हर बार बुखार आने का मतलब यह नहीं कि एंटीबायोटिक की जरूरत है. अगर डॉक्टर को बैक्टीरियल इंफेक्शन का संदेह होता है, तभी जांच और लक्षणों के आधार पर एंटीबायोटिक दी जाती है.
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से:
- बीमारी का सही कारण छिप सकता है
- सही इलाज में देरी हो सकती है
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है
- इन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
कुछ लोगों में H1N1 के बाद जटिलताओं का खतरा ज्यादा होता है.
हाई-रिस्क ग्रुप में शामिल हैं:
- बुजुर्ग
- छोटे बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
- दिल या फेफड़ों की बीमारी वाले मरीज
अगर इन लोगों में लगातार बुखार, सांस फूलना या अचानक कमजोरी बढ़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए.
फ्लू वैक्सीन क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों के मुताबिक, फ्लू वैक्सीन संक्रमण के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाती है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में टीकाकरण बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं और अस्पताल में भर्ती होने की आशंका को कम कर सकता है.
सिर्फ बुखार उतर जाना इस बात का संकेत नहीं है कि H1N1 पूरी तरह खत्म हो गया है. अगर हर दिन तबीयत में सुधार हो रहा है तो चिंता की बात नहीं है. लेकिन बुखार दोबारा लौट आए, खांसी बढ़ जाए, सांस लेने में परेशानी हो या शरीर पहले से ज्यादा कमजोर महसूस हो, तो इसे सामान्य रिकवरी समझने की गलती न करें. समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं