ढाका. कबाड़ को भी 'ताजमहल' बनाया जा सकता है, बशर्ते आपके पास लीक से हटकर सोचने वाली जिद हो. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बांग्लादेश के एक डेंटिस्ट ने, जिन्होंने यूट्यूब के एक आइडिया को सच करने के लिए हजारों प्लास्टिक की बोतलों से अपना सपनों का आशियाना खड़ा कर दिया.
बांग्लादेश के बरीशाल जिले के राजीहार गांव में रहने वाले पेशे से डेंटिस्ट, पलाश चंद्र बरई हमेशा से एक अलग तरह का घर बनाना चाहते थे. एक दिन यूट्यूब देखते हुए उन्हें प्लास्टिक की बोतलों से घर बनाने का अनोखा आइडिया मिला. पलाश सिर्फ वीडियो देखकर नहीं रुके; उन्होंने मदारिपुर जाकर खुद ऐसा घर देखा, बारीकियों को समझा और जुट गए रिसर्च में.
कबाड़ को बना दिया 'कोहिनूर'
सुनने में यह जितना आसान लगता है, असल में उतना था नहीं. इस तकनीक में सबसे मेहनत का काम था प्लास्टिक की खाली बोतलों में सूखी रेत को ठूस-ठूस कर भरना, ताकि वे पत्थर की तरह मजबूत हो जाएं. इसके बाद पलाश ने इन रेत भरी बोतलों को दीवारों में ईंटों की तरह एक के बाद एक सजाया और सीमेंट-मसाले से पक्का कर दिया.
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बाहर से देखने पर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि इस खूबसूरत 140 वर्ग मीटर (लगभग 1,512 स्क्वायर फीट) के घर की दीवारों के भीतर हजारों प्लास्टिक की बोतलें छिपी हैं. पलाश ने इस साढ़े पांच मीटर ऊंचे घर को बनाने में पारंपरिक लोहे के सरियों, सीमेंट और कंक्रीट का भी बखूबी इस्तेमाल किया है, जिससे घर को मजबूती मिले. करीब 6 लाख टका (भारतीय रुपए में तकरीबन साढ़े चार लाख) के बजट में बना यह 'बोतल हाउस' आज पूरे इलाके में कौतूहल का विषय बन गया है.

क्या आम घरों से मजबूत है ये प्लास्टिक वाला घर?
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या यह घर वाकई सुरक्षित है? पलाश का दावा है कि यह घर आम ईंट के घरों से ज्यादा मजबूत है और भूकंप या चक्रवात को भी आसानी से झेल सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का मानना थोड़ा अलग है. रिसर्च कहती है कि रेत भरी बोतलें बेहद मजबूत तो होती हैं, लेकिन पूरे घर की सुरक्षा सिर्फ बोतलों पर नहीं, बल्कि उसकी नींव और बीम-कॉलम के तालमेल पर टिकी होती है.
खैर, सुरक्षा की कसौटी जो भी हो, पलाश ने अपनी जिद और अनोखी सोच से प्लास्टिक कचरे के रीसाइक्लिंग का जो बेहतरीन उदाहरण पेश किया है, उसने सबका दिल जीत लिया है. आज वे अपने इस अनोखे आशियाने में अपने बरसों पुराने सपने को सच होते देख रहे हैं.
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