इन दिनों जब भी मौसमी बदलाव आता है तो स्वाइन फ्लू यानी H1N1 और दूसरे इन्फ्लुएंजा वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि फ्लू का मतलब सिर्फ तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना और बदन दर्द ही होता है. आम तौर पर हफ्ते-दस दिन में लोग दवा खाकर ठीक भी हो जाते हैं. लेकिन कई बार यह वायरस फेफड़ों और गले से आगे बढ़कर सीधे इंसान के दिमाग और नर्वस सिस्टम पर हमला कर देता है.
हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है, मगर जब यह स्थिति बनती है तो यह सीधे जानलेवा साबित हो सकती है. अगर फ्लू के दौरान या ठीक होने के बाद मरीज को असहनीय सिरदर्द, चक्कर, दौरे या दिमागी भ्रम जैसी दिक्कतें होने लगें, तो इसे सिर्फ कमजोरी समझकर टालना भारी पड़ सकता है.
दिमाग पर फ्लू का असर: क्या कहते हैं न्यूरोलॉजिस्ट
गुरुग्राम के मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता का कहना है कि वायरल फीवर में हल्का सिरदर्द होना आम बात है. लेकिन अगर यह दर्द बहुत भयानक हो जाए, दवा लेने के बाद भी न थमे और साथ में मरीज अजीब-अजीब हरकतें करने लगे, तो तुरंत सचेत हो जाना चाहिए.
- फ्लू वायरस के कारण मरीज के नर्वस सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी पैदा हो सकती है.
- कुछ मामलों में मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में एन्सेफलाइटिस कहा जाता है.
- वहीं जब दिमाग की कार्यप्रणाली व्यापक स्तर पर बाधित होने लगती है, तो उसे एन्सेफैलोपैथी कहते हैं.
- अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी (CDC) ने भी माना है कि फ्लू के बाद दौरे (seizures), एन्सेफैलोपैथी और एन्सेफलाइटिस जैसी न्यूरोलॉजिकल परेशानियां हो सकती हैं.
- साल 2009 में फैली H1N1 महामारी के दौरान भी दुनिया भर में मरीजों के दिमाग से जुड़ी ऐसी गंभीर जटिलताएं दर्ज की गई थीं.
साधारण सिरदर्द और गंभीर खतरे में क्या फर्क है
फ्लू के समय होने वाले सामान्य दर्द और न्यूरोलॉजिकल खतरे के लक्षणों में जमीन-आसमान का फर्क होता है. यदि मरीज में नीचे दिए गए लक्षण नजर आएं तो घर पर बैठने के बजाय तुरंत अस्पताल का रुख करना चाहिए:
- सिर में असहनीय और लगातार बढ़ता हुआ दर्द.
- बार-बार उल्टी आना और जी मिचलाना.
- गर्दन में अकड़न होना जिससे गर्दन झुकाने में तेज तकलीफ हो.
- मरीज का बहुत ज्यादा सोना या जगाने पर भी ठीक से होश में न आना.
- तेज रोशनी या आवाज से बहुत ज्यादा चिड़चिड़ाहट और असहजता होना.
- बोलने में जुबान लड़खड़ाना या अचानक साफ न बोल पाना.
- अपनों को या अपनी जगह को पहचानने में भारी कन्फ्यूजन होना.
ये रेड फ्लैग साइन दिखें तो न करें एक मिनट की भी देरी
डॉ. गुप्ता के अनुसार जब भी H1N1 का कोई मरीज इस तरह के लक्षण दिखाए, तो उसे फौरन इमरजेंसी में ले जाना चाहिए:
- अचानक तेज दौरा पड़ना या शरीर का कांपने लगना.
- मरीज की चेतना में अचानक गिरावट आना या बेहोशी छाना.
- शरीर के किसी एक हिस्से या हाथ-पैर को हिलाने में असमर्थता महसूस होना.
- चलते समय पैर लड़खड़ाना या संतुलन खो बैठना.
- अचानक आंखों के आगे धुंधलापन आना या दिखना बंद होना.
- व्यवहार में अचानक गुस्सा, बड़बड़ाना या डरावने बदलाव दिखना.
अस्पताल में कैसे होती है इसकी जांच
जब कोई मरीज ऐसे न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के साथ आता है, तो डॉक्टर सिर्फ बुखार की दवा देकर नहीं छोड़ते. स्थिति की गंभीरता भांपने के लिए तुरंत कई जरूरी टेस्ट किए जाते हैं:
- सीटी स्कैन (CT Scan) या ब्रेन एमआरआई (MRI) ताकि दिमाग की सूजन और आंतरिक नुकसान का पता चल सके.
- दिमाग की नसों की तरंगों को मापने के लिए ईईजी (EEG) टेस्ट कराया जाता है.
- रीढ़ की हड्डी से पानी का नमूना लेकर सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) की विशेष जांच की जाती है ताकि इन्फेक्शन की जड़ समझ आ सके.
- खून के जरूरी पैरामीटर्स और इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स को चेक किया जाता है.
बच्चों और बुजुर्गों के मामले में बरतें दोगुनी सावधानी
छोटे बच्चों में इन्फ्लुएंजा से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बड़ों की तुलना में ज्यादा तेजी से असर दिखाती हैं. सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लू से पीड़ित बच्चों में अगर अचानक व्यवहार बदले, बच्चा सुस्त पड़ जाए, माता-पिता को न पहचाने या उसे झटके आने लगें, तो यह एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है.
इसलिए छोटे बच्चों और बुजुर्गों में फ्लू के दौरान किसी भी तरह के मानसिक या व्यवहारिक बदलाव को बिल्कुल नजरअंदाज न करें.
वायरल के बाद ठीक होने के दौरान भी रखें नजर
अक्सर लोग बुखार उतरते ही मान लेते हैं कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है. लेकिन रिकवरी फेज के दौरान भी शरीर का इम्यून रिस्पॉन्स नसों पर असर डाल सकता है.
- अगर बुखार खत्म होने के दो-तीन दिन बाद भी मरीज बहुत ज्यादा भ्रमित या थका हुआ दिख रहा है, तो लापरवाही न बरतें.
- किसी भी नीम-हकीम या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद न करें.
- दिमाग से जुड़ी दिक्कतों में हर एक मिनट कीमती होता है. सही समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख और सही इलाज से दिमाग को किसी भी स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है.
संक्रमण के इस दौर में फ्लू के आम लक्षणों के साथ-साथ न्यूरोलॉजिकल चेतावनियों को पहचानना ही सबसे बड़ी समझदारी और सुरक्षा है.
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