देश में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं. हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के डीजी डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया है कि H1N1 के बढ़ते मामलों को देखकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये कोई नया वायरस स्ट्रेन नहीं है. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में इन्फ्लूएंजा A के ज्यादातर मामलों में H1N1 वैरिएंट ही पाया जा रहा है.
H1N1 वैरिएंट के कारण आ रहे हैं इंफ्लूएंजा के मामले
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. बहल ने बताया कि देश में चल रही रेस्पिरेटरी डिजीज निगरानी से पता चलता है कि H1N1 वायरस व्यापक रूप से फैल रहा है. इन्फ्लूएंजा ए के मामलों में इस समय काफी ज्यादा देखे जा रहे हैं, तो फ्लू का सबसे कॉमन टाइप है, इसमें H1N1 प्रमुख वैरिएंट है और कुल संक्रमणों में इसकी हिस्सेदारी 97-98 प्रतिशत है. इसके अलावा इन्फ्लूएंजा B के विक्टोरिया लाइनिएज के कुछ मामले भी सामने आ रहे हैं.
#WATCH | Delhi | ICMR DG Dr Rajiv Bahl says, "Respiratory surveillance indicates that H1N1 are circulating widely... Among Influenza A cases—the most common type we are observing—H1N1 is the predominant variant, accounting for the vast majority of infections - 97-98%...… pic.twitter.com/flGIdoPSkb
— ANI (@ANI) August 25, 2026
ICMR चीफ का कहना है कि कुछ समय पहले तक कोविड-19 (SARS-CoV-2) के मामलों में वृद्धि देखी जा रही थी, लेकिन अब उनमें कमी आ रही है. हालांकि, नए कोविड संक्रमण अब भी सामने आ रहे हैं.
2009 में इसी वायरस के कारण फैली थी महामारी
डॉ. बहल ने कहा कि H1N1 वही वायरस है जिसे पहले स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता था. वर्ष 2009 में इसी वायरस के कारण दुनिया भर में महामारी फैली थी. उस समय विभिन्न वायरस स्ट्रेनों के आपस में मिलकर एक नया स्ट्रेन बनने की प्रक्रिया, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है, के कारण बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला था.
उन्होंने बताया कि इन्फ्लूएंजा वायरस में हर साल छोटे-छोटे बदलाव या म्यूटेशन होते रहते हैं. इसे एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है. यही वजह है कि वायरस लगातार लोगों को संक्रमित करता रहता है. हालांकि, इस बार जो H1N1 संक्रमण सामने आ रहे हैं, वे किसी नए वैरिएंट या नए वायरस स्ट्रेन के कारण नहीं हैं.
H1N1 से बचने की सलाह
ICMR के प्रमुख का कहना है कि बदलते मौसम, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संपर्क और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में खांसी, बुखार, गले में खराश, शरीर में दर्द और सांस संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि हमेशा अपने हाथों को साफ रखें, मास्क पहनने, भीड़भाड़ से बचने और फ्लू जैसे लक्षण होने पर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.
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