Guna School Urine Case: मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है. आरोन इलाके के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की पानी की बोतल में कथित तौर पर पेशाब मिला दिया गया. बच्चियों ने जब पानी पिया तो उन्हें अजीब सी बदबू आई, जिसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत की. बात सामने आते ही परिजनों और गांव वालों ने स्कूल में जमकर हंगामा किया. अब प्रशासन ने जांच बैठा दी है और स्कूल के प्रिंसिपल को नोटिस थमा दिया है.
पर इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या पेशाब मिला दूषित पानी पीने से बच्चों की सेहत पर कोई गंभीर खतरा हो सकता है? ऐसी हालत में शरीर में कौन से इन्फेक्शन फैल सकते हैं और माता-पिता को क्या कदम उठाने चाहिए?
पेशाब मिला पानी पीने से शरीर पर क्या असर होता है?
डाक्टरों का कहना है कि अगर किसी ने गलती से या धोखे से पेशाब मिला पानी पी लिया है, तो हर बार कोई जानलेवा बीमारी हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है. लेकिन इसे किसी भी हाल में सेफ या सुरक्षित नही माना जा सकता.
पेशाब शरीर की गंदगी बाहर निकालने का जरिया है. इसमें कई तरह के बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं. खास तौर पर अगर पेशाब करने वाले इंसान को पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या कोई दूसरी बीमारी है, तो वह इन्फेक्शन पानी के जरिए बच्चे के पेट में चला जाता है. गंदा या दूषित पानी पेट में जाते ही कई दिक्कतें शुरू हो सकती हैं-
- बच्चे को तुरंत उल्टी जैसा महसूस होना
- जी मिचलाना
- पेट में तेज मरोड़ या दर्द
- दस्त लगना
- गले में खराश या जलन
- मुंह का स्वाद पूरी तरह कड़वा या खराब हो जाना बहुत आम बात है.
डाक्टर क्या सलाह देते हैं?
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल मॉडल टाउन, नई दिल्ली के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अनिल गोम्बर बताते हैं कि यह मामला सिर्फ घिन या बदबू का नहीं है, बल्कि बच्चों की सेहत से जुड़ा एक बेहद संजीदा मुद्दा है.
डॉ. अनिल गोम्बर के अनुसार अगर किसी बच्चे के साथ ऐसा हुआ है, तो सबसे पहले उसे डराएं बिल्कुल नहीं. न ही उसे इस बात के लिए डांटे या शर्मिंदा महसूस कराएं. बच्चे को शांत रखें, सबसे पहले साफ और ताजे पानी से उसका मुंह अच्छी तरह कुल्ला करवाएं और उसकी तबीयत पर नजर रखें. अगर बच्चे को लगातार उल्टी, पेट दर्द, दस्त या बुखार आने लगे, तो तुरंत डाक्टर से जांच करानी चाहिए. साथ ही बच्चे के दिमाग पर इस घटना का जो बुरा असर पड़ा है, उसे संभालना सबसे ज्यादा जरूरी है.
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ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करें और कब जाएं डाक्टर के पास?
अगर किसी बच्चे ने ऐसा दूषित पानी पी लिया है तो घर पर ये सावधानियां बरतें.
- सबसे पहले साफ पानी से कई बार कुल्ला और गरारे करवाएं ताकि मुंह का गंदा स्वाद और बैक्टीरिया साफ हो सकें.
- कभी भी बच्चे को जबरन उल्टी कराने की कोशिश न करें. जबरदस्ती उल्टी कराने से गले की नली छिल सकती है या एसिड फेफड़ों की तरफ जा सकता है.
- बच्चे को सादा और साफ उबला हुआ पानी पीने को दें ताकि शरीर से गंदगी बाहर निकल सके.
- अगले 24 से 48 घंटे तक बच्चे की हर हरकत और तबीयत पर नजर रखें.
अगर बच्चे को लगातार पेट दर्द हो रहा हो, उल्टियां न रुक रही हों, तेज बुखार चढ़ जाए, चक्कर आएं या बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त पड़ जाए, तो बिना देरी किए अस्पताल ले जाएं. छोटे बच्चों में दस्त और उल्टी की वजह से बहुत तेजी से पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है, जो उनकी जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
शारीरिक तकलीफ से ज्यादा गहरा है मानसिक सदमा
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू बच्चों का मानसिक तनाव है. स्कूल जैसी जगह पर जहा बच्चे खुद को सबसे सुरक्षित महसूस करते हैं, वहा ऐसा गंदा बर्ताव होना उनके मासूम मन को अंदर तक तोड़ देता है.
ऐसी घटना के बाद बच्चा बहुत ज्यादा डर जाता है. उसे शर्मिंदगी और अपमान का अहसास होता है. कई बार बच्चे घबराहट में स्कूल जाने से पूरी तरह मना कर देते हैं और गुमसुम रहने लगते हैं. माता-पिता की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चे को अहसास दिलाएं कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी.
बार-बार बच्चे से वही बात पूछकर या कुरेदकर उसे और ज्यादा मानसिक तनाव न दें. स्कूल प्रशासन का भी यह फर्ज बनता है कि वो ऐसी शिकायतों को दबाने या टालने के बजाय तुरंत एक्शन ले.
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स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों के पीने के पानी और उनकी निजी चीजों की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है. प्रशासन की जांच के बाद जो भी दोषी हो, उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. फिलहाल सबसे जरूरी यही है कि पीड़ित बच्चों को सही मेडिकल इलाज मिले और उनका डर दूर करने के लिए उन्हें पूरा मानसिक सहारा दिया जाए.
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