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Desk Job करने वालों के लिए वरदान है गोमुखासन, सांस से लेकर कंधों तक देगा राहत

Gomukhasana Karne Ke Fayde: लंबे समय तक बैठने से होने वाली समस्याओं से राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने गोमुखासन की सलाह दी है. जानिए कैसे यह योगासन सांस, पोस्चर और मांसपेशियों के तनाव को दूर करता है.

Desk Job करने वालों के लिए वरदान है गोमुखासन, सांस से लेकर कंधों तक देगा राहत
गोमुखासन करने का तरीका और फायदे

Gomukhasana Karne Ke Fayde: आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे रहने, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इन समस्याओं के समाधान के लिए गोमुखासन की सलाह दी है. मंत्रालय के अनुसार, सांस लेने में दिक्कत, कंधों में अकड़न, शरीर की खराब पोस्चर और शरीर के निचले हिस्से में समस्याओं का संबंध अस्थमा से हो सकता है.

आयुष मंत्रालय ने क्यों दी गोमुखासन की सलाह?

मंत्रालय के अनुसार, बेचैनी समेत अन्य परेशानियां अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, तनाव और गतिशीलता की कमी के कारण होती हैं. आपका अस्थमा, कंधों में अकड़न, पीठ में कमजोरी, कूल्हे में दर्द या खराब पोस्चर भी टाइट मसल्स और कम मूवमेंट से जुड़ा हो सकता है. ऐसे में इन समस्याओं को दूर करने और शरीर को संतुलित रखने के लिए आयुष मंत्रालय गोमुखासन के नियमित अभ्यास की सलाह देता है.

आयुष मंत्रालय विश्व योग दिवस की तैयारियों के तहत आम लोगों को ऐसे सरल और प्रभावी योगासनों के बारे में जानकारी दे रहा है, जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सकता है. गोमुखासन उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो डेस्क जॉब करते हैं या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहते हैं.

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Photo Credit: AI

गोमुखासन करने से मिलते हैं ये बड़े फायदे

गोमुखासन छाती को खोलने, कंधों और कूल्हों को अच्छी तरह स्ट्रेच करने व रीढ़ की हड्डी को बेहतर बनाने में मददगार है. यह आसन शरीर के संतुलन और आराम के लिए बेहद फायदेमंद है, इसका नियमित अभ्यास श्वसन स्वास्थ्य को सुधारता है और लंबे समय तक बैठे रहने या शारीरिक निष्क्रियता से पैदा हुए मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद करता है.

गोमुखासन के अभ्यास से शारीरिक व मानसिक फायदे मिलते हैं, इसके अभ्यास से छाती खुलती है, जिससे सांस लेना आसान होता है और अस्थमा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. कंधों और पीठ की अकड़न दूर होती है. कूल्हों और निचले शरीर के जोड़ों की लचक बढ़ती है. रीढ़ की हड्डी सीधी होती है, जिससे पोस्चर सुधरता है. शरीर में तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है.

किन लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत?

हालांकि, गोमुखासन का अभ्यास सही तरीके से और उचित मार्गदर्शन में करना चाहिए. शुरुआत में अगर कठिनाई हो तो धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं. गर्भवती महिलाएं, घुटने या कंधे की गंभीर समस्या वाले व्यक्ति डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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