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पार्लर में कराते हैं बार-बार थ्रेडिंग? लिवर हो सकता है डैमेज... डॉक्टर ने बताया क्या है वजह

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि 28 साल की महिला का लिवर थ्रेडिंग कराने के बाद खराब हो गया. यहां जानते हैं थ्रेडिंग कैसे लिवर को प्रभावित कर सकता है?

पार्लर में कराते हैं बार-बार थ्रेडिंग? लिवर हो सकता है डैमेज... डॉक्टर ने बताया क्या है वजह
Eyebrow threading could risk your liver : क्या थ्रेडिंग कराने से लिवर खराब हो सकता है?

ब्यूटी पार्लर में आईब्रो बनवाना अधिकतर लोगों के लिए यह एक सामान्य रूटीन का हिस्सा है. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे, एक वीडियो ने इस नॉर्मल से प्रोसेस से जुड़े एक अहम सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है. इस वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि अगर थ्रेडिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाला धागा बार-बार अलग-अलग कस्टमर पर इस्तेमाल किया जाए, तो इससे हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी जैसी गंभीर बीमारियों के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि साफ-सफाई को लेकर लापरवाही किसी भी ब्यूटी ट्रीटमेंट में जोखिम बढ़ा सकती है.

आखिर थ्रेडिंग कैसे बनता है इंफेक्शन का कारण?

मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और हेपेटोलॉजी, कंसल्टेंट डॉ. रोहन ग्रोत्रा का कहना है कि थ्रेडिंग एक ऐसा प्रोसेस है, जिसमें कॉटन धागे को मोड़कर स्किन पर चलाया जाता है और बालों को जड़ से निकाला जाता है. ये तरीका देखने में काफी सुरक्षित लगता है, लेकिन आईब्रो और अपर लिप जैसे सेंसटिव स्किन के हिस्सों पर कई बार दर्द, जलन और कट भी लग जाता है. 

ऐसे में अगर एक ही धागे का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों पर किया जाए, तो वैज्ञानिक रूप से उस पर मौजूद ब्लड कट लगने पर स्किन की कोशिकाओं के जरिए इंफेक्शन फैला सकती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट धागे को भी उतनी ही गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं जितनी रेजर, टैटू नीडल या पियर्सिंग इंस्ट्रूमेंट के मामले में बरती जाती है.

थ्रेडिंग से कैसे फैल सकता है हेपेटाइटिस बी और सी?

डॉ. रोहन ग्रोत्रा का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से संक्रमित खून के संपर्क में आने से फैलते हैं. इसलिए कोई भी ऐसा उपकरण जो स्किन को नुकसान पहुंचाता हो और जिसे बिना बदले कई लोगों पर इस्तेमाल किया जाए, संभावित जोखिम पैदा कर सकता है.

हालांकि, थ्रेडिंग को आमतौर पर हाई-रिस्क एक्टिविटी की कैटगरी में नहीं रखा जाता, लेकिन खराब हाइजीन अपनाने पर संक्रमण की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.

ब्यूटी पार्लर को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

डॉक्टर का कहना है कि हर कस्टमर के लिए नया धागा इस्तेमाल करना जरूरी होता है. एक बार इस्तेमाल होने के बाद धागे को तुरंत फेंक दें. इसके अलावा कुछ हाइजीन मेंटेंन करके रखना चाहिए, जैसे-

  • थ्रेडिंग करने से पहले हाथों को अच्छी तरह से धोएं. 
  • संक्रमित या कटी हुई त्वचा पर थ्रेडिंग से बचा जाए.
  • इस्तेमाल होने वाले ट्रे और अन्य उपकरण नियमित रूप से साफ किए जाएं.
  • साफ-सफाई के नियमों का सख्ती से पालन किया जाए.

कस्टमर को क्या करना चाहिए?

अगर आप नियमित रूप से थ्रेडिंग करवाते हैं, तो ये पूछने में बिल्कुल संकोच नहीं करना चाहिए कि आपके लिए नया धागा इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं. साथ ही ऐसे ब्यूटी सैलून चुनना बेहतर है जहां साफ-सफाई के नियम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हों और हाइजीन को प्राथमिकता दी जाती हो.

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