दाल हमारे मील का अहम हिस्सा है. जब खाने की थाली सामने आती है, तो उसमें गरमा-गरम दाल और चावल या रोटी मिल जाए, तो दिल खुश हो जाता है. बचपन से लेकर आज तक, हमारे घर में रोज दाल बनती है. लेकिन कभी आपने सोचा है कि इन सभी दालों में से हमारे शरीर के लिए सबसे बेस्ट कौन सी है? हर दाल का स्वाद अलग है, और सेहत के लिए उनका फायदा भी अलग-अलग है. हाल ही में हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. शुभम वात्स्य ने अलग-अलग दालों को उनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू के आधार पर 10 में से नंबर दिए हैं. आइए आसान भाषा में जानते हैं कि कौन सी दाल आपकी सेहत के लिए सबसे ऊपर है और किसे आपको कितनी बार खाना चाहिए.
यहां देखें वीडियो-
कौन सी दाल खाना सेहत के लिए है फायदेमंद-
1. मूंग दाल (रेटिंग: 9.5/10) -
अगर सबसे हल्की और आसानी से पचने वाली दाल की बात करें, तो मूंग दाल का कोई मुकाबला नहीं है. डॉ. शुभम ने इसे 10 में से पूरे 9.5 नंबर दिए हैं.
फायदे- सबसे अच्छी बात ये है कि यह पेट के लिए बहुत ही लाइट होती है. जिन लोगों का पेट अक्सर गड़बड़ रहता है या जिन्हें गैस-एसिडिटी की शिकायत होती है, उनके लिए मूंग दाल वरदान जैसी है. इसमें बढ़िया क्वालिटी का प्लांट प्रोटीन और फाइबर होता है, जो बिना पेट पर भारी पड़े ताकत देता है. तभी तो बीमार होने पर भी सबसे पहले डॉक्टर मूंग की खिचड़ी या दाल खाने की सलाह देते हैं.
2. मसूर दाल (रेटिंग: 9/10)
लाल या गुलाबी रंग वाली मसूर दाल दूसरे नंबर पर आती है, जिसे डॉक्टर शुभम ने 9 नंबर दिए हैं. यह एक शानदार ऑल-राउंडर दाल है.
फायदे- इसमें प्रोटीन और फाइबर तो भरपूर होता ही है, साथ ही यह आयरन, फोलेट और पोटैशियम का भी बेहतरीन सोर्स है. अगर आप रोज अलग-अलग दाल खाने का सोच रहे हैं, तो मसूर दाल को अपनी डेली डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं. यह शरीर को ताकत देती है और खून की कमी से भी बचाती है.
3. तूर या अरहर की दाल (रेटिंग: 8.5/10)
हमारे देश के ज्यादातर घरों में रोज दोपहर में अरहर या तूर की दाल ही बनती है. डॉ. शुभम ने इसे 8.5 नंबर दिए हैं.
फायदे- यह दाल प्रोटीन, फाइबर, फोलेट और कई जरूरी मिनरल्स से भरी होती है. स्वाद में जबरदस्त और पचाने में भी ठीक-ठाक, यह दाल शरीर के विकास और रोजमर्रा की एनर्जी के लिए बहुत जरूरी है. दाल-चावल का जो असली मजा है, वो इसी दाल के साथ आता है.
4. चने की दाल (रेटिंग: 8.5/10)
चने की दाल को भी 8.5 रेटिंग मिली है. डॉक्टर बताते हैं कि इस दाल में फाइबर कूट-कूट कर भरा होता है.
फायदे- इसमें आयरन, फोलेट और प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में मिलता है.
नोटः लेकिन, एक छोटी सी बात का ध्यान रखना जरूरी है चने की दाल थोड़ी भारी होती है, इसलिए अगर इसे बहुत ज्यादा खा लिया जाए, तो कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की दिक्कत हो सकती है. इसलिए स्वाद के चक्कर में बहुत ज्यादा खाने के बजाय इसे लिमिट में खाएं.
5. राजमा (रेटिंग: 7.5/10) -
तकनीकी रूप से राजमा कोई दाल नहीं है, बल्कि यह फलियों यानी लेग्यूम्स की कैटेगरी में आता है. लेकिन सन्डे के दिन राजमा-चावल का नाम सुनते ही किसके मुंह में पानी नहीं आता? डॉ. शुभम इसे इग्नोर करने की सलाह नहीं देते और इसे 7.5 नंबर देते हैं.
फायदे- राजमा प्रोटीन, फाइबर, आयरन और पोटैशियम का बेहतरीन सोर्स है. हां, यह पचने में थोड़ा भारी होता है, इसलिए खाने के बाद थोड़ा भारीपन या गैस बनना आम बात है.
6. उड़द दाल (रेटिंग: 7/10)
उड़द की दाल, जिससे हमारी फेवरेट दाल मखनी या मां की दाल बनती है, को डॉक्टर शुभम ने 10 में से 7 नंबर दिए हैं.
फायदे- उड़द दाल प्रोटीन, फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर होती है, जो शरीर को मजबूत बनाती है.
नोट- लेकिन दिक्कत यह है कि यह बाकी दालों के मुकाबले काफी भारी होती है. जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर है, उन्हें उड़द दाल खाने के बाद ब्लोटिंग या गैस की समस्या हो सकती है. इसलिए इसे कभी-कभार मजे से खाना ज्यादा सही रहता है.
क्यों जरूरी है दालों में वैरायटी रखना?
डॉ. शुभम वात्स्य का सीधा सा कहना है कि कोई एक अकेली दाल आपको सारे पोषक तत्व नहीं दे सकती. हर दाल की अपनी खूबी और न्यूट्रिशनल प्रोफाइल अलग होती है. कोई प्रोटीन में आगे है, तो कोई फाइबर में. इसलिए अपनी थाली में बदलाव करते रहें कभी मूंग खाएं, कभी मसूर तो कभी अरहर. इससे आपके शरीर को सभी जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन आसानी से मिलते रहेंगे.
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