दुनियाभर में क्लाइमेट चेंज अब सिर्फ मौसम या पर्यावरण की समस्या नहीं रह गया है. बल्कि ये इंसानी सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि बढ़ता तापमान और बदलते बारिश के पैटर्न बैक्टीरिया को ज्यादा खतरनाक बना रहे हैं. इससे एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है और इंफेक्शन का इलाज मुश्किल होता जा रहा है. रिसर्च में खास तौर पर साल्मोनेला बैक्टीरिया पर अध्ययन किया गया. जो फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों का बड़ा कारण माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ये संकट और गंभीर हो सकता है.
क्या कहती है नई स्टडी? (What Does the New Study Say?)
ये रिसर्च ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड और चीन के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. स्टडी के मुताबिक 1940 से 2023 के बीच क्लाइमेट चेंज की वजह से साल्मोनेला में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन करीब 10% तक बढ़े हैं. ये स्टडी मेडिकल जर्नल Lancet Planetary Health में प्रकाशित हुई है. वैज्ञानिकों ने 139 देशों से जुटाए गए 4.8 लाख से ज्यादा साल्मोनेला सैंपल्स का एनालिसिस किया. इसमें टेंपरेचर, बारिश और बैक्टीरिया में मौजूद रेजिस्टेंस जीन के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई.
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्यों है खतरनाक? (Why Is Antibiotic Resistance Dangerous?)
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का मतलब है कि बैक्टीरिया दवाओं के असर से बचने लगते हैं. ऐसे में नॉर्मल इंफेक्शन का इलाज भी मुश्किल हो जाता है. दुनियाभर में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से जुड़ी समस्याओं के कारण होने का अनुमान है. विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा और गलत इस्तेमाल इसकी सबसे बड़ी वजह है. लेकिन अब क्लाइमेट चेंज भी इस खतरे को तेजी से बढ़ा रहा है.
जलवायु परिवर्तन कैसे बढ़ा रहा खतरा? (How Climate Change Is Worsening the Problem?)
रिसर्चर्स का कहना है कि बढ़ता टेंपरेचर और बदलता मौसम बैक्टीरिया के जिंदा रहने, फैलने और तेजी से बदलने की क्षमता को प्रभावित करता है. इससे बैक्टीरिया के बीच एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन का एक्सचेंज ज्यादा तेजी से होने लगता है.
स्टडी में पाया गया कि 82% देशों में साल्मोनेला के रेजिस्टेंस जीन बढ़े हैं. सबसे ज्यादा असर मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका, दक्षिण एशिया और सब सहारा अफ्रीका में देखा गया.
विशेषज्ञों की चेतावनी (Experts' Warning)
इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने कहा है कि सिर्फ एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल से काम नहीं चलेगा. जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे. रिसर्चर्स के मुताबिक अगर दुनिया पेरिस एग्रीमेंट जैसे कम एमिशन वाले फेक्ट्स पर गंभीरता से काम करे, तो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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