सिरदर्द हुआ, बुखार आया या गला दर्द करने लगा और आपने अलमारी से पुराना प्रिस्क्रिप्शन निकालकर वही दवा शुरू कर दी? अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो सावधान हो जाइए. सेम लक्षण होने का मतलब यह नहीं कि बीमारी भी वही हो. कई बार एक जैसी परेशानी के पीछे बिल्कुल अलग वजह हो सकती है. ऐसे में बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के पुरानी दवा लेना फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान भी कर सकता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट हर नई परेशानी में खुद से दवा शुरू करने की बजाय डॉक्टर को दिखाने की सलाह देते हैं.
बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द या पेट दर्द जैसी दिक्कतें कई अलग-अलग बीमारियों में हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, बुखार वायरल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, डेंगू, टाइफाइड या दूसरी कई वजहों से आ सकता है. ऐसे में सिर्फ लक्षण देखकर पुरानी दवा शुरू कर देना सही फैसला नहीं होता.
डॉ नेहा जोशी कहती है कि अक्सर ये चीज बच्चों के साथ माता-पिता करते हैं. क्योंकि बच्चों को बुखार आया तो एक बार जो दवा दी वही वो दोबारा बुखार आने पर देने लगते हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. क्योंकि आपको बुखार आने का कारण नहीं पता, जो बच्चे की सेहत को खराब कर सकता है.

हर बार इलाज भी एक जैसा नहीं होता-
मान लीजिए पिछली बार गले के इंफेक्शन में डॉक्टर ने एंटीबायोटिक दी थी. इसका मतलब यह नहीं कि अगली बार भी वही दवा काम करेगी. अगर इस बार इंफेक्शन की वजह अलग है, तो हो सकता है एंटीबायोटिक की जरूरत ही न पड़े. गलत दवा लेने से बीमारी ठीक होने में देर लग सकती है और बेवजह साइड इफेक्ट का खतरा भी बढ़ सकता है.
इसके अलावा कई दवाओं की जरूरत मरीज की उम्र, वजन, दूसरी बीमारियों या उस समय चल रही दूसरी दवाओं के हिसाब से बदल जाती है. ऐसे में पुराना प्रिस्क्रिप्शन दोहराना नुकसानदायक साबित हो सकता है. एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल पड़ सकता है भारी.
डॉक्टर का कहना है कि बिना सलाह एंटीबायोटिक लेना सबसे बड़ी गलतियों में से एक है. जरूरत न होने पर एंटीबायोटिक लेने से आगे चलकर इन दवाओं का असर कम हो सकता है. इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) कहा जाता है, जो आज पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है.
तो फिर क्या करना चाहिए?
अगर बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, तेज दर्द हो, बार-बार उल्टी हो, पेशाब में दिक्कत हो, शरीर पर रैश दिखाई दें या कोई भी लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों, तो पुरानी दवा लेने की बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. अगर कोई पुरानी बीमारी है, गर्भावस्था है या मरीज बच्चा या बुजुर्ग है, तब भी खुद से इलाज शुरू करना ठीक नहीं है.
बेहतर होगा कि अगर पहले जैसे ही लक्षण दोबारा दिखें, तो पुराना प्रिस्क्रिप्शन साथ लेकर डॉक्टर के पास जाएं. इससे डॉक्टर को आपकी पिछली बीमारी और इलाज समझने में आसानी होगी. लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना उसी दवा को दोबारा शुरू न करें. सही जांच और सही इलाज ही बीमारी को जल्दी ठीक करने का सबसे सुरक्षित तरीका है.
डॉ. नेहा जोशी पीडियाट्रिशियन हैं और सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च में सीनियर कंसल्टेंट के तौर पर काम करती हैं. उन्हें इस क्षेत्र में लगभग 18 वर्षों का अनुभव है.
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