दीवाली को आमतौर पर खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ जश्न मनाने का त्योहार माना जाता है. लेकिन हर व्यक्ति के लिए त्योहारों का समय खुशियों से भरा हो, ये जरूरी नहीं है. कुछ लोगों को दीवाली नजदीक आते ही बेचैनी, तनाव, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान महसूस होने लगती है. बाजारों की भीड़, घर की सफाई, शॉपिंग, मेहमानों की मेजबानी, सोशल मीडिया पर दूसरों की खुशहाल फोटोज और प्रदूषण की चिंता उनके स्ट्रेस को बढ़ा सकती है. इस स्थिति को आम बोलचाल में फेस्टिव स्ट्रेस या फेस्टिव फोबिया कहा जाता है. फेस्टिव फोबिया को समझने के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के साइकाइट्रिक कंसल्टेंट डॉ. सुरभि माथुर से बातचीत की. यहां जानते हैं त्योहारों पर क्यों घर लेता है फेस्टिव फोबिया?
खुशी के बजाय स्ट्रेस का कारण क्यों बनते हैं त्योहार?
डॉ. सुरभि का कहना है कि त्योहारों के दौरान सबसे बड़ा दबाव हर चीज को परफेक्ट बनाने का होता है. घर की सजावट से लेकर कपड़ों, मिठाइयों और गिफ्ट्स तक, हर चीज में दूसरों से बेहतर दिखने की कोशिश कई लोगों पर मेंटल प्रेशर डालती है. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर लोगों की महंगी शॉपिंग, शानदार सजावट और सेलिब्रेशन देखकर व्यक्ति अपनी जिंदगी की तुलना दूसरों से करने लगता है. इससे असंतोष और खुद को पीछे महसूस होने का डर होने लगता है.
शॉपिंग और खर्च के कारण भी बनता है प्रेशर
साइकाइट्रिस का कहना है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी और गिफ्ट देने की उम्मीदें कई बार बजट से बाहर चली जाती हैं. परिवार और समाज की एक्सपेक्टेशन को पूरा करने के लिए लोग अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं. आर्थिक चिंता और कर्ज का डर त्योहारों की खुशी को स्ट्रेस में बदल सकता है.
प्रदूषण और शोर की चिंता भी बढ़ाती है तनाव
डॉक्टर सुरभि कहती हैं कि दीवाली के दौरान पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण भी कुछ लोगों के लिए चिंता का कारण बनता है. अस्थमा, सांस से जुड़ी समस्याओं या माइग्रेन से परेशान लोगों को इस दौरान अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहना पड़ता है. तेज आवाज, धुआं और भीड़ के बीच रहने की आशंका उन्हें पहले से ही बेचैन कर सकती है.
किसे हो सकता है ज्यादा स्ट्रेस?
डॉक्टर कहती हैं वे लोग जो पहले से एंग्जायटी, डिप्रेशन या किसी अन्य मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए त्योहारों का समय अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है. अकेले रहने वाले लोग, हाल ही में किसी अपने को खोने वाले व्यक्ति या पारिवारिक तनाव से गुजर रहे लोगों को भी इस दौरान अकेलापन ज्यादा महसूस हो सकता है. हर समय खुश रहने की सामाजिक अपेक्षा उनकी भावनाओं को और दबा सकती है.
त्योहारों के बीच मेंटल हेल्थ का कैसे रखें ख्याल?
फेस्टिव स्ट्रेस से बचने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि त्योहार मनाने का कोई एक सही तरीका नहीं होता. अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार शॉपिंग करें और हर इंविटेशन को एक्सेप्ट करना जरूरी न समझें. घर की सफाई, सजावट और खरीदारी की जिम्मेदारियां परिवार के सदस्यों के बीच बांटें. सोशल मीडिया पर दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार त्योहार मनाएं.
इसके अलावा, पर्याप्त नींद लें, नियमित दिनचर्या बनाए रखने की कोशिश करें और अपनी पसंद की एक्टिविटी के लिए भी समय निकालें. अगर बेचैनी, उदासी, घबराहट या नींद की परेशानी लगातार बनी रहती है और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती है, तो एक्सपर्ट से सलाह लें.
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