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इबोला वायरस और भारत की तैयारी: क्या है मौजूदा स्थिति? एक्सपर्ट से जानें

Ebola Virus Alert: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की समीक्षा में पता चला है कि इस बार वायरस का स्ट्रेन अलग है। इसी कारण WHO ने इसे “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न” घोषित किया है। चिंता की बात यह भी है कि वर्तमान में इस बीमारी की कोई प्रभावी दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण इसकी मृत्यु दर 30% से 50% तक हो सकती है।

इबोला वायरस और भारत की तैयारी: क्या है मौजूदा स्थिति? एक्सपर्ट से जानें

Ebola Virus Update: अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के ताजा मामलों और WHO द्वारा इसे “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC)” घोषित किए जाने के बाद दुनिया भर में सतर्कता बढ़ गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के लिए भी खतरा है? इस पर पूर्व NCDC निदेशक डॉ. सुजीत सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

डॉ. सुजीत सिंह (पूर्व निदेशक, NCDC) के अनुसार, साल 1976 से अब तक कांगो में इबोला वायरस के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन वहां से इस बीमारी का बड़ा फैलाव भारत में नहीं हुआ है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सतर्कता बरतना अनिवार्य है।

WHO की चेतावनी और नया स्ट्रेन

युगांडा और दक्षिण सूडान में भी संदिग्ध मामले सामने आए हैं। 2 से 21 दिन के इनक्यूबेशन पीरियड को देखते हुए भारत में भी ट्रैवल से जुड़े संदिग्ध मामले आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

भारत की स्थिति और राहत की बात

WHO दो तरह की सिफारिशें जारी करता है:

1. उन देशों के लिए जहां खतरा ज्यादा है।
2. अन्य देशों के लिए गाइडलाइन और SOP।

भारत फिलहाल ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में नहीं आता, जो कि राहत की बात है। लेकिन भारत को WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी तैयारी पुख्ता रखनी चाहिए।

एयरपोर्ट स्क्रीनिंग क्यों है सबसे जरूरी?

डॉ. सिंह ने 2015-16 का एक उदाहरण साझा किया, जब वेस्ट अफ्रीकी देश से आए एक यात्री का RTPCR टेस्ट सामान्य था, लेकिन सीमेन जांच में वह पॉजिटिव मिला था। उसे 4 महीने तक निगरानी में रखा गया था।

इबोला रेस्पिरेटरी रूट (सांस) या मच्छरों से नहीं फैलता। यह मुख्य रूप से सिम्प्टमेटिक (लक्षण वाले) मरीजों से फैलता है, जिन्हें स्क्रीनिंग के जरिए आसानी से पकड़ा जा सकता है। सरकार ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल को नोडल अस्पताल बनाया है।

वर्तमान तैयारियां और सावधानी

निगरानी: प्रभावित देशों से यात्रा इतिहास वाले करीब 500 से 600 लोगों पर नजर रखी जा रही है।
अस्पताल: अस्पतालों में N95 मास्क, PPE किट और क्वॉरेंटाइन की पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए।
राज्यों को निर्देश: राज्यों को अपनी सुविधाओं का एक्सपर्ट टीम से निरीक्षण कराना चाहिए।
एडवाइजरी: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं और राज्यों व एयरपोर्ट्स के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।

बीमारी के लक्षण और गंभीरता

शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल जैसे होते हैं, जैसे:

  • बुखार
  • शरीर और जोड़ों में दर्द
  • उल्टी

स्थिति तब गंभीर होती है जब मरीज के स्टूल या उल्टी में खून आने लगे। संक्रमण का खतरा तब बढ़ता है जब लक्षण मौजूद हों और मरीज किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो।

कैसे फैलता है इबोला वायरस?

सबसे जरूरी बात- 

यह हवा से नहीं फैलता।
मच्छरों से भी नहीं फैलता।

संक्रमण होता है:

संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के तरल (body fluids) के संपर्क से और यह तभी फैलता है जब मरीज में लक्षण मौजूद हों।

क्या घबराने की जरूरत है?

फिलहाल भारत के लिए अभी कोई बड़ी चिंता या खतरे की बात नहीं है। सरकार की मौजूदा तैयारी और विशेषज्ञों के अनुभव को देखते हुए भारत इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूक रहना और एयरपोर्ट पर मजबूत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करना जरूरी है।

इबोला एक खतरनाक लेकिन कंट्रोल करने योग्य बीमारी है।

  • सही समय पर पहचान
  • सख्त निगरानी
  • और अस्पतालों की तैयारी
  • इनके जरिए इसका फैलाव रोका जा सकता है।

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन जागरूकता बेहद जरूरी है।

इनपुट: डॉ. सुजीत सिंह, पूर्व निदेशक, NCDC

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