Ebola Outbreak 2026: अफ्रीका के दो देशों कांगो और युगांडा में फैले इबोला के नए प्रकोप ने पूरी दुनिया को सतर्क कर दिया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजशन (WHO) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न यानी अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है. यह प्रकोप बंडीबुग्यो वायरस नाम के इबोला स्ट्रेन से जुड़ा है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है. चिंता की बात यह है कि इस वायरस के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है. तेजी से फैलते संक्रमण, रहस्यमयी मौतों और सीमाओं के पार पहुंच चुके मामलों ने दुनिया को कोविड महामारी की याद दिला दी है. हालांकि WHO ने अभी इसे पैंडेमिक इमरजेंसी नहीं माना है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.
आखिर क्या है बंडीबुग्यो वायरस?
बंडीबुग्यो वायरस इबोला वायरस की ही एक प्रजाति है. पहली बार इसकी पहचान साल 2007 में युगांडा के बंडीबुग्यो इलाके में हुई थी. यह वायरस इंसानों में गंभीर बुखार, शरीर से खून बहना, कमजोरी, उल्टी और कई अंगों के फेल होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है.
इबोला वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के फ्लूइड या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है. यही वजह है कि अस्पतालों और अंतिम संस्कारों के दौरान संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा रहता है.
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कितने मामले सामने आए?
WHO के अनुसार 16 मई 2026 तक कांगो के इतुरी प्रांत में 8 लैब से पुष्टि किए गए मामले सामने आए हैं, जबकि 246 संदिग्ध मामले और 87 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं. संक्रमण कम से कम तीन हेल्थ जोन बुनिया, र्वामपारा और मोंगबवालु तक फैल चुका है.
वहीं युगांडा की राजधानी कंपाला में भी दो संक्रमित मरीज मिले हैं, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है. दोनों मरीज कांगो से यात्रा करके आए थे. यही अंतरराष्ट्रीय फैलाव WHO की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है.
स्वास्थ्यकर्मियों की मौत ने बढ़ाया खतरा
इस प्रकोप में कम से कम चार स्वास्थ्यकर्मियों की मौत की खबर सामने आई है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अस्पतालों के अंदर संक्रमण तेजी से फैल सकता है. WHO का मानना है कि कई छोटे और अनौपचारिक क्लीनिकों में संक्रमण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं.
अगर स्वास्थ्यकर्मी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो मरीजों का इलाज और भी मुश्किल हो जाएगा. यही कारण है कि WHO ने PPE किट, प्रशिक्षण और अस्पतालों में संक्रमण रोकने के उपायों पर जोर दिया है.

क्यों डर रही है दुनिया?
विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संक्रमित लोगों की संख्या रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है. कई गांवों और दूरदराज इलाकों में लोग बिना जांच के मर रहे हैं. इसके अलावा कांगो के कई हिस्सों में हिंसा, असुरक्षा और मानवीय संकट पहले से मौजूद है, जिससे बीमारी पर नियंत्रण और मुश्किल हो गया है.
एक और बड़ी चिंता लोगों की आवाजाही है. कांगो और युगांडा के बीच व्यापार, यात्रा और सीमापार एक्टिविटी लगातार जारी रहती हैं. इससे वायरस दूसरे देशों तक भी पहुंच सकता है.
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WHO ने क्या सलाह दी?
WHO ने प्रभावित देशों को तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सक्रिय करने, व्यापक निगरानी शुरू करने और संक्रमित लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करने की सलाह दी है. साथ ही समुदायों को जागरूक करने, सुरक्षित अंतिम संस्कार कराने और सीमाओं पर स्क्रीनिंग बढ़ाने को कहा गया है.
WHO ने यह भी साफ किया है कि संक्रमित व्यक्ति या उनके संपर्क में आए लोग अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं कर सकते. एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमा चौकियों पर जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.
वैक्सीन नहीं होना सबसे बड़ी चुनौती:
कोविड महामारी के दौरान दुनिया ने वैक्सीन की ताकत देखी थी, लेकिन बंडीबुग्यो वायरस के लिए अभी कोई मंजूर वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. यही वजह है कि वैज्ञानिक तेजी से नई दवाओं और टीकों पर रिसर्च शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.
WHO ने क्लीनिकल ट्रायल्स शुरू करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की अपील की है ताकि जल्द से जल्द इलाज विकसित किया जा सके.
क्या दुनिया को फिर सतर्क हो जाना चाहिए?
हालांकि WHO ने अभी इसे महामारी घोषित नहीं किया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह चेतावनी का बड़ा संकेत है. अगर समय रहते संक्रमण नहीं रोका गया, तो यह अफ्रीका से बाहर भी फैल सकता है. कोविड के बाद दुनिया अब किसी भी नए वायरस को हल्के में लेने की स्थिति में नहीं है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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