Dengue Hidden Sign: डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी, सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द जैसी समस्याओं से पहचाना जाता है. लेकिन, अब डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीजों में डेंगू की शुरुआत इन लक्षणों से नहीं, बल्कि पेट से जुड़ी परेशानियों से हो रही है. हाल के समय में अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जो शुरुआत में मतली, पेट फूलना, उल्टी, पेट दर्द और भूख कम लगने जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं. ये लक्षण गैस, अपच, फूड पॉइजनिंग या सामान्य वायरल इंफेक्शन जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें हल्के में ले लेते हैं. यही लापरवाही बाद में गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. खासतौर पर अब मानते हैं कि डेंगू के मौसम में पेट से जुड़ी परेशानियां भी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती हैं और इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.
डेंगू में पेट की समस्याएं क्यों बढ़ रही हैं?
डॉ. अर्पित जैन, इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के अनुसार डेंगू वायरस केवल ब्लड सेल्स को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह लिवर, आंतों, पेट और गॉलब्लैडर पर भी असर डाल सकता है. इसी वजह से कई मरीजों में तेज बुखार आने से पहले ही पाचन संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं.
डेंगू में दिखाई देने वाले आम पेट संबंधी लक्षण हैं:
- मतली
- उल्टी
- पेट फूलना
- पेट में भारीपन या दर्द
- भूख कम लगना
- पानी या खाना न पचा पाना
- पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
अक्सर लोग इन लक्षणों को साधारण गैस या बदहजमी समझ लेते हैं, लेकिन बरसात और उसके बाद के मौसम में इन्हें हल्के में लेना ठीक नहीं माना जाता.
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पेट दर्द हो सकता है गंभीर संकेत
डॉक्टर बताते हैं कि डेंगू में लगातार पेट दर्द होना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है. यह दर्द आमतौर पर पेट के ऊपरी हिस्से में महसूस होता है और समय के साथ बढ़ सकता है.
कुछ मरीजों में डेंगू के कारण शरीर की रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ बाहर निकलने लगता है, जिसे प्लाज्मा लीकेज कहा जाता है. इससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है और जरूरी अंगों पर दबाव बढ़ने लगता है. अगर समय रहते इलाज न मिले तो सांस लेने में तकलीफ, सीने या पेट में पानी भरना, ब्लड प्रेशर कम होना और यहां तक कि शॉक जैसी स्थिति भी बन सकती है. इसीलिए डेंगू के मौसम में लगातार पेट दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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बार-बार उल्टी से बढ़ सकता है खतरा
डॉक्टरों के अनुसार बार-बार उल्टी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है. लगातार उल्टी होने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी बढ़ती है और किडनी पर असर पड़ सकता है.
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से डायबिटीज, मोटापा या लिवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों में खतरा ज्यादा हो सकता है.
लिवर पर भी असर डाल सकता है डेंगू
डेंगू में लीवर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले अंगों में शामिल है. डॉक्टर बताते हैं कि वायरस सीधे लीवर में सूजन पैदा कर सकता है या शरीर की बहुत ज्यादा इम्यून रिएक्शन भी इसका कारण बन सकती है. इससे मरीज में ज्यादा कमजोरी, मतली, पेट दर्द, लिवर एंजाइम बढ़ने की समस्या होती है.
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इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें:
- लगातार या तेज पेट दर्द
- दिन में तीन या उससे ज्यादा बार उल्टी
- पानी न पी पाना
- मसूड़ों या नाक से खून आना
- काले रंग का मल
- पेशाब कम होना
- चक्कर आना या बेहोशी
- बहुत ज्यादा कमजोरी
- सांस लेने में दिक्कत
ये गंभीर डेंगू के संकेत हो सकते हैं.
खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी
डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग बुखार होने पर खुद ही दर्द निवारक दवाएं जैसे आइबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक या एस्पिरिन लेने लगते हैं. डेंगू में ये दवाएं खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं और पेट को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. डॉक्टर आमतौर पर पेरासिटामोल को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, लेकिन इसे भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.
पानी की कमी न होने दें
डेंगू में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी माना जाता है. हल्के मामलों में पानी, नारियल पानी, सूप और ORS जैसे तरल पदार्थ मददगार हो सकते हैं. लेकिन, बार-बार उल्टी, कमजोरी या डिहाइड्रेशन की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेंगू केवल प्लेटलेट्स की बीमारी नहीं है. मरीज की बॉडी फ्लूइड स्थिति, ब्लड प्रेशर, लिवर फंक्शन और अन्य संकेतों पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है.
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बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें.
- कूलर और नालियों की नियमित सफाई करें.
- मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें.
- बाहर जाते समय पूरे कपड़े पहनें.
- पानी की टंकियों को ढककर रखें.
- लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं.
डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू हर व्यक्ति में एक जैसा शुरू नहीं होता. कई बार पेट की समस्याएं ही इसका पहला संकेत बन जाती हैं. ऐसे में समय रहते सही पहचान और इलाज गंभीर रिस्क से बचा सकता है.
(डॉ. अर्पित जैन, इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम)
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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