Qdenga Vaccine India: डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा (Qdenga), 2026 में लॉन्च की जा सकती है. इस वैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल और भारत की सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी (CDSCO) से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. तकेदा फार्मा (Takeda Pharma) नाम की एक जापानी दवा कंपनी, 'मेक-इन-इंडिया' पहल के तहत हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई (Bio E) के साथ मिलकर TAK-003 को भारत में उपलब्ध कराएगी. डेंगू मच्छरों से फैलने वाली एक बीमारी है, जिसका प्रकोप भारत में हर मौसम में बढ़ता जा रहा है.
बायोइंफॉर्मेशन जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच डेंगू के मामलों में 39.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके अलावा, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में डेंगू के कई मामले एक साथ (Cluster Outbreaks) सामने आए हैं. डेंगू एक गंभीर बीमारी है, जिसके इलाज के लिए चौबीसों घंटे मेडिकल देखभाल और पूरी तरह ठीक होने के लिए मरीज की जरूरत के हिसाब से इलाज (Personalised Approach) की जरूरत पड़ती है.
क्यूडेंगा क्या है? | What is Qudenga?
एनडीटीवी ने एगिलस डायग्नोस्टिक्स में रिसर्च एंड डेवलपमेंट की जीएम और मॉलिक्यूलर इन्फेक्शस विभाग की प्रमुख डॉ. रश्मि खड़पकर से बात की. उन्होंने बताया कि "भारत में डेंगू का प्रकोप बहुत ज्यादा है (Hyperendemic). यहां वायरस के चारों सेरोटाइप मौजूद हैं, जिनकी वजह से बार-बार डेंगू फैलता रहता है, खासकर मॉनसून के मौसम में." यही वजह है कि डेंगू के बढ़ते मामलों और बीमारी के बोझ से निपटने के लिए क्यूडेंगा वैक्सीन एक बहुत जरूरी कदम है.
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किन देशों में मिल चुकी है मंजूरी?
इस वैक्सीन को पहले ही 40 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल चुकी है. इन देशों में यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, इंडोनेशिया और ब्राजीलल शामिल हैं.
भारत की आबादी बहुत बड़ी और विविध है और जलवायु परिवर्तन की वजह से मच्छरों के स्ट्रेन्स में बदलाव (mutations) हो रहे हैं, जिससे डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए इस समय एक वैक्सीन की सख्त जरूरत है.

60,000 से ज्यादा लोगों पर हो चुका है ट्रायल
क्यूडेंगा डेंगू की अब तक की सबसे ज्यादा और गहराई से जांची-परखी गई वैक्सीन है. दुनिया भर में 60,000 से ज्यादा लोगों पर इसका ट्रायल किया जा चुका है. इसे पहले ही 40 से ज्यादा देशों में मंजूरी मिल चुकी है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल गई है, जो इसकी सुरक्षा और असरदार होने पर दुनिया भर के भरोसे का संकेत है. इसे 2023 में लॉन्च किया गया था और इसकी 1 करोड़ डोज बेची जा चुकी हैं.
क्यूडेंगा वैक्सीन कैसे काम करती है?
NDTV ने डॉ. नेहा रस्तोगी से भी बात की, जो गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में इन्फेक्शियस डिज़ीज (संक्रामक रोग) की सीनियर कंसल्टेंट हैं. उन्होंने बताया कि क्यूडेंगा कैसे काम करता है: "इस वैक्सीन को खासतौर पर उन लोगों में भी असरदार होने के लिए डिजाइन किया गया है जिन्हें पहले कभी डेंगू का इन्फेक्शन हुआ हो. इसे आमतौर पर दो डोज में दिया जाता है, जिनके बीच कुछ महीनों का अंतर होता है. यह उन लोगों के लिए भी सही है जिन्हें पहले डेंगू का इन्फेक्शन हुआ हो या न हुआ हो; यह पिछली वैक्सीनों के मुकाबले एक बड़ा फायदा है."
"मेडिकल एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि हालांकि यह वैक्सीन उम्मीद जगाने वाली है, लेकिन यह अपने आप में कोई अकेला समाधान नहीं है. बचाव के उपाय, जैसे मच्छरों के पनपने पर रोक लगाना, रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और साफ-सफाई बनाए रखना, अब भी बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे. इस वैक्सीन को सुरक्षा की एक और परत के तौर पर देखा जाना चाहिए, खासकर उन इलाकों में जहां डेंगू का ज्यादा खतरा है या जहां यह बीमारी आम है."
इस वैक्सीन को देने के तरीके के बारे में डॉ. रश्मि खड़पकर ने बताया, उन्होंने कहा कि इसे "आम तौर पर दो डोज में इंजेक्ट किया जाता है, जिनके बीच आम तौर पर तीन महीने का अंतर होता है. इससे इन्फेक्शन का खतरा और अस्पताल में भर्ती होने जैसी गंभीर जटिलताएं, दोनों कम होने की उम्मीद है."
"क्लिनिकल डेटा से पता चला है कि यह वैक्सीन कापी सुरक्षा देती है, खासकर डेंगू के गंभीर मामलों में. यह ऐसे देश के लिए बहुत ज़रूरी है जहाँ डेंगू फैलने पर अस्पतालों पर अक्सर बहुत ज्यादा बोझ पड़ जाता है."

डॉक्टर ने बताया कि भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
डॉ. नेहा रस्तोगी ने इस वैक्सीन के बारे में विस्तार से बताया और इसके बारे में यह कहा, "हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स लोगों में जागरूकता फैलाने की अहमियत पर भी जोर देते हैं. एक बार जब यह वैक्सीन आ जाएगी, तो गाइडलाइंस में यह साफ बताया जाएगा कि सबसे पहले किसे यह वैक्सीन दी जानी चाहिए. इसमें शायद उन लोगों और इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां डेंगू फैलने का खतरा ज्यादा है या जहां यह बीमारी अक्सर फैलती रहती है. किसी भी वैक्सीन की तरह इस वैक्सीन से भी कुछ हल्के साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द या इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द. लेकिन, गंभीर साइड इफ़ेक्ट होने की संभावना बहुत कम होती है."
"कुल मिलाकर, भारत में क्यूडेंगा का आना पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम साबित हो सकता है. अगर इसे डेंगू से बचाव के मौजूदा तरीकों के साथ-साथ असरदार तरीके से लागू किया जाए, तो इसमें डेंगू का बोझ कम करने और अनगिनत लोगों की जान बचाने की पूरी क्षमता है."
इसे किसे लगवाना चाहिए?
- वे लोग जो ज्यादा रिस्क वाले ग्रुप में हैं, जैसे बच्चे, जिन्हें समय पर मदद नहीं मिल पाती, क्योंकि लक्षण दिखने में कुछ दिन लग जाते हैं.
- बुज़ुर्गों को भी जोखिम होता है, क्योंकि डेंगू एक बार शरीर में फैलने के बाद सेहत से जुड़ी गंभीर परेशानियां पैदा कर सकता है.
- यात्रियों को इसकी जरूरत होती है ताकि वे ऐसे इन्फेक्शन से बच सकें जो उनकी यात्रा की योजनाओं को खराब कर सकता है, क्योंकि यात्रा के दौरान लोग अक्सर बाहर घूमते हैं और उनका आस-पास का माहौल बदल जाता है.
- जो लोग खुली जगहों पर काम करते हैं, उन्हें इसे सबसे पहले लगवाना चाहिए, साथ ही शहरी आबादी को भी, क्योंकि डेंगू फैलाने वाला मच्छर आपको कभी भी काट सकता है.
- इस वैक्सीन से जुड़े दिशा-निर्देश इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) से आने की उम्मीद है.

वैक्सीन की सुरक्षा और साइड इफेक्ट
हर वैक्सीन को किसी संक्रामक बीमारी के खिलाफ इम्यूनिटी बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है और यह हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरह से असर कर सकती है. इसलिए, लोगों को इसके आम साइड इफ़ेक्ट के बारे में पता होना चाहिए, जिनमें बुखार, थकान और इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द शामिल है, जैसा कि ज्यादातर वैक्सीन के साथ होता है.
वैक्सीन की उपलब्धता और इसे लोगों तक पहुंचाने का प्लान
आमतौर पर, एक तय समय-सीमा होती है, जो सुरक्षित रूप से वैक्सीन लॉन्च करने और बड़ी आबादी तक इसे पहुंचाने में लगने वाले औसत समय के आधार पर तय की जाती है. जब वैक्सीन को मंजूरी देने और उसे लोगों तक पहुंचाने की सटीक योजनाओं की बात आती है, तो यह उम्मीद की जाती है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) इस बारे में जानकारी देंगे.
अलग-अलग राज्यों के स्वास्थ्य विभाग और वैक्सीन सेंटर, वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए भारत में वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिलने के बाद वे कितनी तेजी से काम करते हैं, यह बहुत मायने रखेगा.
डेंगू वैक्सीन का स्वास्थ्य पर असर
अभी, डेंगू को शहरी इलाकों में मच्छरों को मारने वाले केमिकल का रेगुलर रूप से छिड़काव करके और कुछ सावधानियां बरतकर काबू में रखा जाता है, जैसे कि मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना. लेकिन, एक बार जब यह वैक्सीन लोगों तक पहुंच जाएगी, तो डेंगू को काबू में करने के तरीकों में बदलाव आएगा. जब इस वैक्सीन को सुरक्षित रूप से लगाया जा सकेगा, तो इसे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए पहले से चल रहे कार्यक्रमों के साथ जोड़ना होगा, ताकि इसका ज्यादा से ज्यादा असर हो सके.
क्यूडेंगा से उम्मीद तो जगती है, लेकिन डेंगू से बचाव के लिए अभी भी कई तरह के उपायों पर ही निर्भर रहना होगा. ऐसा इसलिए है, क्योंकि डेंगू फैलाने वाले मच्छर को उसके पैदा होने की जगह पर ही मारना जरूरी है, तभी इस बीमारी के जोखिम को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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