Diseases Spread By Pigeon: अक्सर आपने सुबह-सुबह कबूतर की गुटरगूं अपने घर की बालकनी में सुनी होगी. अगर आपको ये आवाज सुनना अच्छा लगता है? तो थोड़ा संभल जाइए. जिसे आप एक मासूम सा पक्षी समझ रहे हैं, वह असल में आपके और आपके परिवार के लिए गंभीर बीमारियों का घर हो सकता है. डॉक्टरों की चेतावनी के अनुसार, कबूतरों के पंख और उनकी बीट (मल) से हवा में ऐसे बैक्टीरिया और फंगस फैलते हैं, जो सीधे आपके फेफड़ों पर हमला करते हैं.

कैसे फैलती है बीमारी-
- डॉक्टर के अनुसार कबूतरों की ड्रोपिंग (बीट) जब सूख जाती है, तो वह बारीक कणों में बदल जाती है. जब कबूतर उड़ते हैं या हवा चलती है, तो ये कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं.
- हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस- यह फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी है जो कबूतरों की बीट से फैलती है. इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन लेने में दिक्कत होती है. खासकर बीमार, बच्चे और बुजुर्ग.
- लंग फेलियर का डर- अगर इसे समय पर न रोका जाए, तो फेफड़े सख्त होने लगते हैं (फाइब्रोसिस). इससे सांस फूलना, लगातार खांसी और थकान जैसी समस्याएं होती हैं और स्थिति जानलेवा भी हो सकती है.
किसे है सबसे ज्यादा खतरा?
- डॉक्टर के अनुसार जो लोग रोज कबूतरों को दाना डालते हैं.
- जिनके घर की बालकनी या खिड़की पर कबूतरों का बसेरा है.
- बुजुर्ग, बच्चे और जिन्हें पहले से अस्थमा या एलर्जी है.
कैसे करें बचाव-
- घर के पास या बालकनी में कबूतरों को दाना डालने से बचें.
- बालकनी और छतों को साफ रखें और कबूतरों को बैठने न दें.
- अगर सांस लेने में तकलीफ या लगातार खांसी हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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