Toilet Paper Truth: हाई-टेक हेल्थ हैक्स के दौर में एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट लोगों को फिर से बुनियादी आदतों की ओर लौटने की सलाह दे रही हैं. या यूं कहें, बाथरूम की उन पुरानी आदतों की ओर जिन्हें हम आज के समय में पीछे छोड़ आए हैं. The Mel Robbins Podcast के एक एपिसोड में Dr Trisha Pasricha, जो Harvard Medical School में फिजिशियन-साइंटिस्ट हैं, ने एक ऐसा सच शेयर किया जिसे सुनकर लोग हैरत में पड़ सकते हैं. आज हम बात करेंगे वाशरूम में इस्तेमाल किए जाने वाले टॉयलेट पेपर की.
टॉयलेट पेपर पर सवाल
डॉ. पासरिचा ने बताया कि, अमेरिकन स्टाइल में सूखे टॉयलेट पेपर पर निर्भर रहना बिल्कुल भी सही नहीं है. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि टॉयलेट पेपर ही समाधान है. हमें वास्तव में बिडेट (पानी से साफ करने वाली सीट) की जरूरत है. और मुझे पता है कि अमेरिका में बहुत से लोग अभी इस बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं. लेकिन बिडेट आपकी जिंदगी बदल सकता है."
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पानी VS पेपर: क्या कहती है साइंस

उनका तर्क इस बात पर बेस्ड है कि पानी सफाई के मामले में पेपर से ज्यादा प्रभावी है. उन्होंने बताया कि बिडेट का काम बहुत आसान होता है एक नोजल जो पानी स्प्रे करके बाहरी हिस्से को साफ करता है. उन्होंने कहा, "साधारण बिडेट काफी सस्ते होते हैं और आप खुद भी इन्हें इंस्टॉल कर सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ लक्जरी बिडेट में हीटेड सीट जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. लेकिन असली बात यह है कि बिडेट आपके शरीर को उस तरीके से साफ करता है, जैसा टॉयलेट पेपर नहीं कर सकता."
उन्होंने 2023 की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा,"जब लोग टॉयलेट पेपर से साफ करते हैं, तो उनके हाथों पर ज्यादा माइक्रोब्स पाए गए, जबकि बिडेट इस्तेमाल करने वालों में यह कम था."
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सेंसटिव स्किन की सुरक्षा
डॉ. पासरिचा ने ये भी बताया कि बार-बार या जोर से पोंछने से शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने कहा, "हम शरीर के इतने नाजुक हिस्से के साथ इतना रफ व्यवहार क्यों करते हैं? ज्यादा रगड़ने से कई लोगों को वहां सेंसटिविटी या जलन हो सकती है."
जो लोग बिडेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, उनके लिए उन्होंने तरीका बदलने की सलाह दी. "रगड़ने के बजाय हल्के से 'डैब' (थपथपाकर साफ करना) करना चाहिए. इससे माइक्रोस्कोपिक में चोट नहीं लगती है. खासकर जिन लोगों को फिशर, बवासीर या डिलीवरी के बाद समस्या होती है, उनके लिए यह तरीका बेहतर है."
कब सतर्क होना है जरूरी
डॉ. पासरिचा ने रेक्टल ब्लीडिंग को लेकर भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा,"अगर खून आ रहा है और न तो बवासीर है, न ही फिशर, तो ऐसे में कोलोनोस्कोपी करवाना जरूरी हो जाता है."
महिलाओं के लिए सही तरीका
उन्होंने महिलाओं के लिए साफ-सफाई के सही तरीके पर भी जोर दिया."आमतौर पर महिलाओं को 'फ्रंट टू बैक' साफ करने की सलाह दी जाती है, ताकि पीछे के बैक्टीरिया आगे न पहुंचें और UTI (यूरिन इन्फेक्शन) का खतरा कम हो. आगे की तरफ भी हल्के से डैब करना बेहतर है, और अगर पीछे भी ऐसा ही किया जाए तो यह सबसे सुरक्षित तरीका है."
कुल मिलाकर, डॉ. पासरिचा का कहना है कि सही तकनीक और साफ-सफाई की आदतें न सिर्फ बेहतर हाइजीन देती हैं, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाव करती हैं.
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