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दिल्ली में हर 5 में से 1 मौत का कारण साफ नहीं! क्या हमारी हेल्थ जांच में है बड़ी कमी? जानिए क्या कहती है रिपोर्ट

इसका मतलब यह हुआ कि मरीज की मौत तो हुई, लेकिन बीमारी की जड़ तक पहुंचने वाली स्पष्ट वजह रिकॉर्ड में नहीं आ सकी. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी मौतों का प्रतिशत 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है.

दिल्ली में हर 5 में से 1 मौत का कारण साफ नहीं! क्या हमारी हेल्थ जांच में है बड़ी कमी? जानिए क्या कहती है रिपोर्ट
बीमारी की जड़ तक पहुंचने वाली स्पष्ट वजह रिकॉर्ड में नहीं आ सकी.

दिल्ली देश की राजधानी है, जहां बड़े-बड़े अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं. इसके बावजूद अगर यह सामने आए कि राजधानी में होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत से ज्यादा मौतों का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो पा रहा, तो यह चिंता का विषय है. हाल ही में सामने आए दिल्ली के जन्म और मृत्यु से जुड़े आधिकारिक आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं. यह स्थिति न सिर्फ हेल्थ सिस्टम पर सवाल खड़े करती है, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाती है.

दरअसल, मौत के कारणों को मेडिकल भाषा में दर्ज करने की प्रक्रिया को मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) कहा जाता है. दिल्ली में 2024 के दौरान जो संस्थागत मौतें दर्ज की गईं, उनमें एक बड़ा हिस्सा लक्षण, संकेत और असामान्य जांच रिपोर्ट (Symptoms, Signs and Abnormal Clinical Findings) जैसी श्रेणी में रखा गया. इसका मतलब यह हुआ कि मरीज की मौत तो हुई, लेकिन बीमारी की जड़ तक पहुंचने वाली स्पष्ट वजह रिकॉर्ड में नहीं आ सकी. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी मौतों का प्रतिशत 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है.

क्यों दर्ज नहीं हो पाता मौत का सही कारण?

इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं:

पहली वजह है देर से अस्पताल पहुंचना. कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल लाए जाते हैं, जहां डॉक्टरों को जांच और इलाज के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.

दूसरी बड़ी वजह है जांच की सीमाएं. हर केस में सभी जरूरी टेस्ट संभव नहीं हो पाते, खासकर जब मरीज की हालत बहुत नाजुक हो.

तीसरी वजह है डॉक्यूमेंटेशन की कमी और वर्कलोड. अस्पतालों में मरीजों की अधिक संख्या के कारण कई बार मौत के कारणों को विस्तार से दर्ज नहीं किया जा पाता.

हेल्थ सिस्टम पर इसका क्या असर पड़ता है?

जब मौत का सही कारण दर्ज नहीं होता, तो सरकार और हेल्थ विभाग को अधूरी तस्वीर मिलती है. इससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किन बीमारियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. नतीजतन, स्वास्थ्य नीतियां, बजट और संसाधन सही दिशा में नहीं पहुंच पाते.

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आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है यह जानकारी?

मौत के कारणों का सही रिकॉर्ड सिर्फ सरकारी आंकड़ों के लिए नहीं होता. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी बीमारियां चुपचाप जान ले रही हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है. साफ डेटा से समय पर जांच, इलाज और जागरूकता बढ़ती है.

क्या समाधान है?

जरूरी है कि अस्पतालों में मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ डेथ को और सख्ती से लागू किया जाए, डॉक्टरों को पर्याप्त ट्रेनिंग और समय मिले और जांच सुविधाओं को मजबूत किया जाए. साथ ही आम लोगों को भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

(यह लेख दिल्ली में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट - 2024 और दिल्ली का जनसांख्यिकीय स्वास्थ्य: पंजीकृत जन्म और मृत्यु का विश्लेषण, 2024 (अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार, जन्म और मृत्यु कार्यालय, एनसीटी दिल्ली सरकार) में आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है.)

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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