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सिर्फ कुछ दवाइयां... न वेंटिलेटर और न भोजन, जानें हरीश राणा की इच्छामृत्यु पर AIIMS में अब तक क्या-क्या हुआ?

Harish Rana Health Update: हरीश राणा की देखभाल अब दस सदस्यीय डॉक्टरों की टीम कर रही है, जिसमें मनोचिकित्सकों की टीम भी शामिल है. हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी है.

सिर्फ कुछ दवाइयां... न वेंटिलेटर और न भोजन, जानें हरीश राणा की इच्छामृत्यु पर AIIMS में अब तक क्या-क्या हुआ?
हरीश राणा भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति
  • हरीश राणा की निगरानी अब दस सदस्यीय डॉक्टरों की टीम कर रही है, जिसमें मनोचिकित्सकों की टीम भी शामिल है
  • एम्स में उनकी न्यूट्रिशन सपोर्ट और वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम हटा दिया गया है और केवल दवाइयां दी जा रही हैं
  • परिवार को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए चिकित्सकों द्वारा काउंसिलिंग और भावनात्मक सहारा दिया जा रहा है
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नई दिल्‍ली:

Harish Rana Latest Health Update: हरीश राणा (32) की निगरानी अब 10 सदस्यी डॉक्टरों की टीम कर रही है. एम्स से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है. सूत्रों ने बताया कि मेडिकल बोर्ड में पांच और डॉक्‍टरों को जोड़ा गया है. इसमें खासकर मनोचिकित्सकों की टीम शामिल है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश राणा के परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए डॉक्‍टर्स परामर्श के साथ-साथ आध्यात्मिक मार्गदर्शन का भी सहारा लिया है. 

हरीश राणा भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हैं. पिछले सप्ताह अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को यह भी निर्देश दिया कि जीवन रक्षक प्रणाली को एक सुनियोजित तरीके से हटाया जाए, ताकि व्यक्ति की गरिमा का ध्यान रखा जा सके.

न्यूट्रिशन सपोर्ट सिस्टम हटाया गया

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (AIIMS) से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि भर्ती होने के बाद से हरीश के इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है. इसके तहत उनका न्यूट्रिशन सपोर्ट सिस्टम हटा लिया गया है. साथ ही, उन्हें किसी भी तरह का वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम नहीं दिया गया है. फिलहाल, इलाज के नाम पर उन्हें सिर्फ कुछ दवाइयां दी जा रही है जिसमें ब्रेन से संबंधित प्रमुख दवा हैं.

परिवार की हो काउंसिलिंग

सूत्रों ने बताया कि परिवार की काउंसिलिंग भी एम्स के चिकित्सकों द्वारा कि जा रही है. दरअसल, हरीश के भर्ती होने के दो मुख्य पहलू हैं. एक तो उसे सम्मानजनक मृत्यु प्रदान करना और दूसरा परिवार को मानसिक रूप से तैयार करना ताकि वे इस दुख को सहन कर सकें. इसके लिए AIIMS प्रशासन ने मनोचिकित्सकों की एक टीम बनाई है, जो प्रतिदिन हरीश के के माता-पिता और भाई से बातचीत कर रही है. इसका उद्देश्य उन्हें भावनात्मक सहारा देना, स्थिति को समझने में मदद करना और मानसिक रूप से मजबूत बनाना है.

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अंगों की हो रही जांच

सूत्रों ने जानकारी दी कि हरीश राणा के अंग बहुत स्थिति में नहीं है. ऐसे में अंग दान शायद ही संभव है. यही वजह है चिकित्सकों की टीम गहन जांच कर रही है ताकि पता लगाया जा सके कि क्या वाकाई में हरीश का शरीर अंग दान करने की स्थिति में है या नहीं. दरअसल हरीश के माता-पिता ने अपने बेटे की मौत के बाद उनके अंगों के दान का फैसला लिया था, ताकि जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिल सके. हरीश राणा को शनिवार (14 मार्च) को गजियाबाद स्थित घर से नई दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया है. यहां उसे पैलेटिव केयर यूनिट में रखा गया हैं, जहां फिलहाल उसकी हालत स्थिर है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसके इच्छामृत्यु् की प्रक्रिया शुरू की गई है.

एक व्यक्ति को साथ रहने की इजाजत

एम्स सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हरीश राणा के साथ परिवार के एक सदस्य को रहने की इजाजत दी गई है. हर वक्त परिवार का एक सदस्य उनके साथ रह सकता है. बताया जा रहा है कि हरीश की मां अपने बेटे के के साथ ज्यादातर वक्त बीता रही हैं. वहीं पिता, भाई और बहन भी उनसे मिलने आ रहे हैं. हरीश राणा साला 2013 से कोमा में हैं.

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