दिल्ली में मौतों से जुड़े ताज़ा सरकारी आंकड़े एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं. Annual Report on Registration of Births and Deaths, Delhi 2024 के मुताबिक, राजधानी में करीब हर पांच में से एक मौत ऐसी है, जिसकी वजह साफ तौर पर दर्ज नहीं हो पाई. यानी लगभग 20 प्रतिशत मामलों में यह साफ नहीं है कि व्यक्ति की मौत आखिर किस बीमारी या कारण से हुई. हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे हेल्थ सिस्टम गैप का बड़ा संकेत मान रहे हैं.
2023: हर पांचवीं मौत बनी सवाल-
रिपोर्ट बताती है कि साल 2023 में दिल्ली में कुल 3,01,168 मौतें दर्ज की गईं. इनमें से 60 हजार से ज्यादा मामलों में मौत का कारण साफ नहीं था. कई मामलों में वजह को 'ill-defined' लिखा गया या फिर मेडिकल सर्टिफिकेशन (MCCD) सही तरीके से नहीं किया गया. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसका मतलब है कि मौत से पहले मरीज की सही जांच, बीमारी की पहचान और मेडिकल रिकॉर्ड रखने में कमी रह गई.

2024: संख्या घटी, लेकिन समस्या बरकरार-
साल 2024 में कुल मौतों की संख्या घटकर 2,94,464 रह गई. हालांकि यह थोड़ा राहत की बात है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई. अब भी करीब 20 प्रतिशत मौतों का कारण साफ नहीं है, यानी 55 से 60 हजार मामलों में यह पता नहीं चल पाया कि मौत किस वजह से हुई. इससे साफ है कि हालात में खास सुधार नहीं हुआ है.
क्यों खतरनाक है यह-
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब मौतों की वजह सही तरह से दर्ज नहीं होती, तो बीमारियों की असली तस्वीर सामने नहीं आ पाती. इससे सरकार के लिए सही हेल्थ पॉलिसी बनाना, बजट तय करना और भविष्य में किसी महामारी से निपटने की तैयारी करना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स सरकारी और निजी अस्पतालों में मौत के कारण का मेडिकल सर्टिफिकेशन (MCCD) और सख्ती से लागू करने की जरूरत बता रहे हैं.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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