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क्या डायबिटीज में दूध पी सकते हैं?

शुगर में दूध पीना चाहिए या नहीं? अगर आपने मन में ये सवाल है, तो यहां सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल से विस्तार से जानते हैं इस विषय को विस्तार से-

क्या डायबिटीज में दूध पी सकते हैं?
Can Drink Milk in Diabetes : क्या डायबिटीज में दूध पी सकते हैं?

डायबिटीज मरीजों को अपने डाइट पर खास ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि उनका शुगर कंट्रोल में रहे. लेकिन कई बार शुगर पेशेंट को खानपान को अपने खानपान को लेकर कई तरह से सवाल मन में रहते हैं. इन्हीं सवालों में से एक है, क्या डायबिटीज में दूध पी सकते हैं या नहीं? दरअसल, कई लोग मानते हैं कि दूध में डायबिटीज होने की वजह से इसे पूरी तरह छोड़ देना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. सही मात्रा और सही तरीके से दूध का सेवन करने पर यह डायबिटीज डाइट का हिस्सा बन सकता है.

गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर, डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबॉलिक क्लिनिक डॉ. पारस अग्रवाल का कहना है कि दूध में मौजूद प्राकृतिक लैक्टोज ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है, लेकिन ये शरीर को प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन B12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी प्रदान करता है. इसलिए इसे पूरी तरह बंद करने के बजाय संतुलित मात्रा में लेना अधिक उचित है. यहां जानते हैं इस विषय को विस्तार से-

दूध में मौजूद लैक्टोज बढ़ा सकता है ब्लड शुगर

डॉ. पारस का कहना है कि दूध में पाए जाने वाला लैक्टोज एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है. इसका मतलब है कि दूध पीने के बाद ब्लड शुगर में कुछ हद तक बढ़ोतरी हो सकती है. इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे अपने पूरे दिन के कार्बोहाइड्रेट सेवन का हिस्सा मानकर ही डाइट में शामिल करना चाहिए.

उनका कहना है कि शुगर में दूध पीना तब समस्या बनती है, जब दूध में अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है या फिर फ्लेवर्ड मिल्क, मिल्कशेक और मीठे डेयरी ड्रिंक्स का सेवन किया जाता है. इनमें शुगर और कैलोरी दोनों अधिक होती हैं, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है.

फुल-फैट या लो-फैट दूध, शुगर में कौन सा दूध पीना चाहिए?

डॉक्टर बताते हैं कि दूध का चुनाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है. अगर किसी को मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या हार्ट डिजीज का खतरा है, तो लो-फैट दूध अच्छा विकल्प हो सकता है. 

हालांकि, ये समझना जरूरी है कि लो-फैट दूध में फैट कम हो सकती है, लेकिन उसमें मौजूद लैक्टोज की मात्रा लगभग समान रहती है. इसलिए सिर्फ लो-फैट दूध चुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सर्विंग साइज और कुल डाइट पर भी ध्यान देना जरूरी है.

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