आपके घर के सामने या आसपास होने वाला अवैध निर्माण न केवल यातायात और सुरक्षा की समस्या पैदा करता है, बल्कि आपके संपत्ति अधिकारों का भी हनन करता है. यह समाज के लिए भविष्य में भी परेशानी पैदा करने वाली बात है. कई बार ऐसे अवैध निर्माण के खिलाफ शिकायत करने पर कई सारी परेशानियां भी होती है. लेकिन अगर आप अपनी पहचान उजागर किए बिना (गोपनीय तरीके से) इसकी शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, तो इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने कानूनी प्रावधानों के अनुसार कई विकल्प बताए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के वकील आदिदेव कुमार ने बताया कि अगर आपके घर के सामने कोई बिना अनुमति के अवैध निर्माण कर रहा है, तो सबसे पहले फोटो/वीडियो के जरिए और यदि संभव हो तो RTI के माध्यम से स्वीकृत नक्शे की प्रति लेकर प्रमाण सुरक्षित करें, क्योंकि निजी संपत्ति पर आगे कार्रवाई से पहले नोटिस दिया जाना कानूनन आवश्यक है.
नगर निगम या विकास प्राधिकरण में करें शिकायत
सुप्रीम कोर्ट के वकील आदिदेव ने बताया कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय नगर निगम या विकास प्राधिकरण की होती है. तो आप वहां की नगर पालिका के अध्यक्ष, नगर निगम या विकास प्राधिकरण में सम्पत्ति/खसरा संख्या और उल्लंघन का विवरण देते हुए लिखित शिकायत करें, क्योंकि संबंधित अधिनियम इन प्राधिकरणों को स्वीकृत नक्शे या भवन नियमों के उल्लंघन पर निर्माण कार्य पर रोक या ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करने का अधिकार देते हैं.
वहीं अगर आप नाम गोपनीय रखना चाहते हैं तो इसके लिए नगर निगम के पोर्टल या ऐप पर शिकायत का विकल्प होता है. इसके अलावा ई-नगरपालिका पोर्टल, राज्य लोक शिकायत निवारण प्रणाली या CM हेल्पलाइन ऐप जैसे ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का उपयोग करें. जो ट्रैकिंग नंबर देकर एक दस्तावेजी रिकॉर्ड बनाते हैं और जिनके आधार पर कई शहरों में शिकायतों व नोटिस के बाद नगर निगम टीमों ने अवैध निर्माण ध्वस्त किए हैं.
अतिक्रमण या रास्ता रोकने का मामले में क्या करें
आदिदेव ने बताया कि अगर मामला भूमि पर अतिक्रमण, रास्ता अवरुद्ध करने या तत्काल सुरक्षा जोखिम से जुड़ा हो तो पुलिस स्टेशन में उपद्रव, शरारत या अतिक्रमण संबंधी प्रावधानों 126, 270, 285, 324,BNS (भारतीय न्याय संहिता/पूर्व IPC) के तहत सूचना दें, जिससे कई मामलों में निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रुकवाया जा सका है.
आप डायल 112 पर कॉल करके सूचित कर सकते हैं कि अवैध निर्माण से सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध हो रहा है या शांति भंग हो रही है. आप पुलिस से अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध कर सकते हैं.
सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण हो तो क्या करें
अगर निर्माण सरकारी या नजूल भूमि, सड़क, नाली या पार्क पर हो या नगर निकाय जवाब न दे तो जिलाधिकारी (DM) या तहसीलदार को आवेदन दें, क्योंकि ये राजस्व अधिकारी भूमि अभिलेखों को नियंत्रित करते हैं और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने का आदेश दे सकते हैं. अगर बार-बार शिकायत के बावजूद स्थानीय निकाय कार्रवाई न करे, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में परमादेश (मैंडेमस) रिट याचिका दायर की जा सकती है, जिसमें संबंधित अधिकारियों, राज्य सरकार और निर्माणकर्ता को पक्षकार बनाया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट भी अवैध निर्माण और भूमि उपयोग उल्लंघन से संबंधित अपनी स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) कार्यवाही में (न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ, जो मार्च 2026 से इस मामले की निगरानी कर रही है) विकास प्राधिकरणों को निर्देश दे चुका है कि वे केवल सर्वेक्षण न करें बल्कि उल्लंघनकर्ताओं पर सीलिंग, ध्वस्तीकरण जैसी वास्तविक कार्रवाई का विवरण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सत्यापित शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करें, इसलिए हर चरण पर RTI उत्तर, शिकायत रसीद संख्या और नोटिस जैसे दस्तावेज साक्ष्य सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि एक क्रमिक और दस्तावेज शिकायत श्रृंखला प्राधिकरणों और अदालतों से तेज और गंभीर कार्रवाई सुनिश्चित करती है.
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