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कुछ लोगों को एक पैग में ही क्यों चढ़ जाता है नशा? डॉक्‍टर ने बताया वैज्ञानि‍क कारण

कुछ लोगों को एक पैग में ही नशा क्यों चढ़ जाता है जबकि कुछ पर शराब का असर देर से होता है? डॉक्टर से जानिए शराब, शरीर के वजन, मेटाबॉलिज्म और Blood Alcohol Level का संबंध.

कुछ लोगों को एक पैग में ही क्यों चढ़ जाता है नशा? डॉक्‍टर ने बताया वैज्ञानि‍क कारण
1 पैग में ही आने लगता है नशा? इसके पीछे छिपे हैं शरीर के ये वैज्ञानिक कारण

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोगों को एक पैग शराब पीने के बाद ही नशा महसूस होने लगता है, जबकि कुछ लोग कई पैग लेने के बाद भी सामान्य नजर आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे शरीर का वजन, उम्र, लिंग, खाली पेट शराब पीना, पीने की गति और शरीर की अल्कोहल को तोड़ने की क्षमता जैसे कई वैज्ञानिक कारण जिम्मेदार होते हैं.

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग शराब की थोड़ी मात्रा लेने के बाद ही नशे में नजर आने लगते हैं, जबकि कुछ लोग उतनी ही मात्रा पीने के बावजूद सामान्य दिखाई देते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या इसका संबंध शरीर की क्षमता से है या फिर इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है? विशेषज्ञों के मुताबिक, शराब का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता.

इसे ज्‍यादा गहराई से समझने के लिए एनडीटीवी ने बात की डॉ. अश्वनी कंसल से. वे यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा में इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट हैं. उन्होंने बताया कि शरीर का वजन, उम्र, लिंग, खाली पेट या भोजन के बाद शराब पीना, पीने की गति, दवाएं और शरीर में अल्कोहल को तोड़ने की क्षमता जैसे कई कारक यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति को कितनी जल्दी नशा महसूस होगा.

शरीर का वजन भी डालता है असर

शराब शरीर में पहुंचने के बाद खून के जरिए अलग-अलग अंगों तक पहुंचती है. जिन लोगों के शरीर में पानी की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, उनमें समान मात्रा की शराब का रक्त में concentration अधिक हो सकता है. यही वजह है कि समान मात्रा पीने पर दो अलग-अलग लोगों में नशे की तीव्रता अलग हो सकती है.

शरीर का वजन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आमतौर पर कम वजन वाले व्यक्ति में समान मात्रा की शराब का असर अधिक तेजी से महसूस हो सकता है. हालांकि केवल वजन देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति को कितनी शराब से नशा होगा.

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खाली पेट शराब पीने से जल्दी चढ़ सकता है नशा

अगर कोई व्यक्ति खाली पेट शराब पीता है तो शराब तेजी से absorb हो सकती है. वहीं भोजन, खासकर प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन, शराब के पेट से छोटी आंत में पहुंचने की गति को प्रभावित कर सकता है. इसलिए खाली पेट शराब पीने पर कुछ लोगों को कम समय में ही नशे के लक्षण महसूस होने लगते हैं.

डॉ. अश्वनी कंसल के मुताबिक, “शराब का असर व्यक्ति की उम्र, शरीर के आकार, भोजन की स्थिति, पीने की गति और शरीर में alcohol metabolism की क्षमता पर निर्भर करता है. खाली पेट या कम समय में अधिक मात्रा में शराब लेने पर blood alcohol concentration तेजी से बढ़ सकता है और व्यक्ति को नशा जल्दी महसूस हो सकता है. यह मानना सही नहीं है कि जो व्यक्ति ज्यादा शराब पी सकता है, उसका शरीर शराब से सुरक्षित है. कई बार tolerance बढ़ जाने के कारण व्यक्ति कम नशे में दिखाई देता है, जबकि शरीर पर शराब का प्रभाव फिर भी पड़ रहा होता है. इसलिए किसी व्यक्ति की सहनशीलता को शराब पीने की सुरक्षित क्षमता नहीं समझना चाहिए.”

महिलाओं और पुरुषों में भी हो सकता है अंतर

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि समान मात्रा में शराब लेने पर पुरुषों और महिलाओं में blood alcohol concentration अलग हो सकता है. इसका संबंध शरीर की संरचना और शरीर में पानी की मात्रा सहित कई जैविक कारकों से है. यही कारण है कि केवल “एक पैग” जैसी मात्रा बताकर यह नहीं कहा जा सकता कि हर व्यक्ति पर इसका समान प्रभाव पड़ेगा.

पीने की स्पीड भी महत्वपूर्ण

डॉ. अश्वनी कंसल कहते हैं एक पैग को धीरे-धीरे पीने और कुछ ही मिनटों में पी जाने के बीच शरीर पर असर अलग हो सकता है. जब शराब कम समय में शरीर में पहुंचती है तो blood alcohol level तेजी से बढ़ सकता है. इसके कारण चक्कर, बोलने में लड़खड़ाहट, प्रतिक्रिया की गति कम होना और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने जैसे लक्षण जल्दी दिखाई दे सकते हैं.

इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से शराब पीते हैं, उनमें alcohol tolerance विकसित हो सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि शराब शरीर के लिए कम नुकसानदायक हो गई है. व्यक्ति को नशा कम महसूस हो सकता है, लेकिन alcohol फिर भी शरीर के मस्तिष्क, लिवर और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है.

दवाओं के साथ शराब ज्यादा खतरनाक

कुछ दवाओं के साथ शराब लेने पर इसका असर और ज्यादा हो सकता है. खासकर नींद की दवाएं, कुछ anti-anxiety medicines और ऐसी दवाएं जो central nervous system को प्रभावित करती हैं, शराब के साथ अत्यधिक उनींदापन और अन्य गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं.

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को थोड़ी मात्रा में शराब लेने के बाद ही बहुत अधिक नींद, चक्कर, उलझन, उल्टी या बेहोशी जैसी स्थिति होने लगे तो इसे सामान्य “कम tolerance” मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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नशा महसूस न होना भी सुरक्षा की गारंटी नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक शराब के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नशे की अनुभूति और शरीर पर शराब का प्रभाव एक ही चीज नहीं है. कोई व्यक्ति खुद को सामान्य महसूस कर सकता है, लेकिन उसकी reaction time और judgment पहले ही प्रभावित हो सकती है.

इसलिए शराब लेने के बाद वाहन चलाना सुरक्षित नहीं माना जाता, चाहे व्यक्ति को नशा महसूस हो या नहीं. किसी व्यक्ति को “एक पैग में चढ़ता है” या “कई पैग के बाद भी कुछ नहीं होता” के आधार पर उसकी शराब सहने की क्षमता का आकलन करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है.

एक्‍सपर्ट के बारे में : डॉ. अश्वनी कंसल, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा में इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट हैं. उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, संक्रमण संबंधी बीमारियों और वयस्कों की सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में व्यापक अनुभव है.

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