डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है, ये सिर्फ कहने के लिए ही नहीं बल्कि सच भी है. क्योंकि जब किसी जिंदगी को बचाने के लिए कोई रास्ता नजर नहीं आता तब डॉक्टर एक उम्मीद बनकर आते हैं. आज के समय में मेडिकल साइंस कहां पहुंच चुकी है, इसका एक जीता-जागता और दिल छू लेने वाला उदाहरण सामने आया है. नाइजीरिया की रहने वाली दो मासूम बहनें, गुडनेस (Goodness) और मर्सी (Mercy), जो जन्म से ही एक-दूसरे के सिर से जुड़ी हुई थीं, अब पूरी तरह से अलग हो चुकी हैं. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से डॉक्टरों ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. ये दोनों बच्चियां अब अपने घर पर बिना किसी परेशानी के अपना तीसरा जन्मदिन मना रही हैं.
जन्म से ही जुड़ी थीं दोनों बहनें-
गुडनेस और मर्सी का जन्म जून 2023 में नाइजीरिया के एक राज्य में हुआ था. जन्म से ही ये दोनों 'क्रैनियोपैगस ट्विंस' (Craniopagus Twins) थीं. इसका सीधा मतलब यह है कि दोनों के सिर आपस में जुड़े हुए थे. इतना ही नहीं, दोनों के दिमाग के कुछ हिस्से और खून की नसें भी आपस में जुड़ी हुई थीं. डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे मामले दुनिया में बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. हर 25 लाख बच्चों के जन्म में से किसी एक के साथ ऐसा होता है.

जन्म से दोनों बहनों से सिर आपस में जुड़े हुए थे. (Image NDTV)
लंदन की संस्था और कई देशों के डॉक्टर बने मसीहा-
जब ये बच्चियां 6 महीने की थीं, तब इनके माता-पिता को लंदन के मशहूर 'ग्रेट ऑर्मंड स्ट्रीट हॉस्पिटल' के डॉक्टर नूर उल ओवैस जिलानी के बारे में पता चला. डॉक्टर जिलानी 'जेमिनी अनट्वाइंड' (Gemini Untwined) नाम की एक संस्था चलाते हैं, जो सिर से जुड़े बच्चों को अलग करने का काम करती है. इस संस्था ने बच्चियों और उनके माता-पिता को लंदन बुलाने और उनके पूरे इलाज का खर्च उठाने का फैसला किया.
4 महीने में 4 बड़े ऑपरेशन और AI का कमाल-
साल 2025 में इन बच्चियों को अलग करने का सफर शुरू हुआ, जो मेडिकल इतिहास के सबसे मुश्किल ऑपरेशनों में से एक था. दोनों बहनों को पूरी तरह अलग करने के लिए 4 महीने के अंदर 4 बड़े ऑपरेशन किए गए. ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों ने कुल 40 घंटे बिताए.
इस पूरे मिशन में दुनिया के 20 अलग-अलग देशों के 60 से ज्यादा मेडिकल एक्सपर्ट्स शामिल थे. ऑपरेशन को सुरक्षित बनाने के लिए डॉक्टरों ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल रियलिटी (VR), और 3D मॉडलिंग जैसी सबसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया. इन तकनीकों की मदद से डॉक्टरों ने ऑपरेशन थियेटर में जाने से पहले ही बच्चियों के दिमाग और उनकी नसों का एक डिजिटल नक्शा तैयार कर लिया था, ताकि कोई गलती न हो.
अबू धाबी में हुआ आखिरी 12 घंटे का फाइनल ऑपरेशन-
बच्चियों को अलग करने का आखिरी और सबसे जरूरी ऑपरेशन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी शहर के 'शेख खलीफा मेडिकल सिटी' में हुआ. डॉक्टर जिलानी और उनके साथ मौजूद 12 अन्य टॉप सर्जनों की टीम ने लगातार 12 घंटे तक ऑपरेशन करके दोनों बहनों के सिर को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग कर दिया.
सर्जरी का जोखिम- (Risks in Separation Surgery)
- मस्तिष्क के साझा हिस्सों और नसों (जैसे सुपीरियर सैजिटल साइनस) को अलग करते समय भारी रक्तस्राव का जोखिम होता है.
- सर्जरी के दौरान न्यूरोलॉजिकल क्षति होने से लकवा या मानसिक समस्या का खतरा रहता है.
- पिछले कई दशकों में आधुनिक न्यूरोइमेजिंग, 3D प्रिंटिंग और (AI) के इस्तेमाल से सफलताओं में सुधार हुआ है.
अब कैसी हैं दोनों बच्चियां-
इस बेहद खतरनाक और मुश्किल सर्जरी के बाद दोनों बच्चियां न सिर्फ ठीक हैं, बल्कि बहुत तेजी से ठीक भी हुईं. आज वे दोनों अपने परिवार के साथ नाइजीरिया में हैं, खेल-कूद रही हैं और एक आम बच्चे की तरह जिंदगी जी रही हैं. डॉक्टर जिलानी ने बताया कि यह ऑपरेशन मेडिकल जगत के लिए एक मील का पत्थर है और नई तकनीकों की वजह से ही वे इन बच्चियों को एक नया भविष्य दे पाए हैं.
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