कई सालों से दाईं तरफ के कुल्हे में असहनीय दर्द झेल रहे 36 वर्षीय अहमद अब्दुलमुईन कादिम के लिए चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया था. इराक में लंबे समय तक इलाज कराने के बावजूद भी उन्हें राहत नहीं मिल रही थी. हालत ऐसी हो गई थी कि रोजमर्रा के साधारण काम भी चुनौती बन गए थे. आखिरकार उनके परिवार ने भारत आने का फैसला किया और वे मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली में ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन एवं हेड डॉ. (प्रोफेसर) अनिल अरोड़ा से मिले.
अहमद का वजन 162 किलोग्राम था, जो इस सर्जरी को और भी चुनौतीपूर्ण बना रहा था. उन्हें राइट हिप में सेकेंडरी डिजनरेटिव आर्थराइटिस था, जिसके कारण लगातार दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी हो रही थी. किसी भी अस्पताल में टोटल हिप रिप्लेसमेंट कराने वाले सबसे अधिक वजन वाले मरीजों में उनका नाम शामिल था. अधिक वजन के कारण सर्जरी के दौरान सर्जिकल, एनेस्थीसिया और अन्य जटिलताओं का जोखिम भी काफी ज्यादा था.

जब वजन बना सबसे बड़ी चुनौती
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वजन बना सबसे बड़ी चुनौती
मरीज के मोटापे को देखते हुए सर्जिकल टीम के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं. डॉक्टरों को इम्प्लांट और फिक्सेशन स्ट्रेटजी का बेहद सावधानी से आकलन करना पड़ा ताकि लंबे समय तक स्थिरता और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें. रिप्लेस किए गए जॉइंट पर पड़ने वाले ज्यादा दबाव को ध्यान में रखते हुए स्टेबल फिक्सेशन, सही इम्प्लांट पोजिशन और जॉइंट के सामान्य फंक्शन को बहाल करने पर विशेष ध्यान दिया गया.
डॉ. अनिल अरोड़ा ने क्या कहा?
इस मामले को लेकर मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली के चेयरमैन एवं हेड ऑफ डिपार्टमेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट डॉ. (प्रोफेसर) अनिल अरोड़ा ने कहा, ‘162 किग्रा वजन के मरीज में टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी करना बहुत चुनौतीपूर्ण था. बहुत ज्यादा वजन के कारण सर्जिकल एक्सपोजर मुश्किल हो जाता है. इससे इम्प्लांट की पोजिशनिंग में दिक्कत हो सकती है साथ ही इससे इम्प्लांट किए गए आर्टिफिशियल जॉइंट पर दबाव भी बहुत ज्यादा पड़ता है. इस मामले में सावधानी के साथ प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, सही इम्प्लांट सेलेक्शन और प्रिसाइज सर्जिकल एक्जीक्यूशन की जरूरत थी. इन चुनौतियों के बावजूद हम सही इम्प्लांट प्लेसमेंट और स्टेबल फिक्सेशन में सफल रहे. सर्जरी के बाद मरीज की अच्छी रिकवरी हुई है."
सर्जरी सफल, रिकवरी भी रही बेहतर
सर्जरी बिना किसी परेशानी के पूरी हो गई. सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में कोई दिक्कत नहीं आई और फॉलो-अप एक्स-रे में हिप इम्प्लांट की पोजिशन और स्टेबिलिटी सही पाई गई. बहुत ज्यादा मोटापे वाले मरीज में हिप बायोमैकेनिक्स को ठीक करना बहुत मुश्किल होता है. डॉ. अरोड़ा ने बहुत ज्यादा मोटापे को ध्यान में रखते हुए कॉलर्ड स्टेम इम्प्लांट का इस्तेमाल किया. ऐसे मामले में सफल नतीजे के लिए अनुभवी और माहिर सर्जन की जरूरत रहती है. डॉ. (प्रोफेसर) अनिल अरोड़ा पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर रहे हैं.
बहुत ज्यादा मोटापे वाले मरीजों में हिप बायोमैकेनिक्स को सही करना आसान नहीं होता. इसी को ध्यान में रखते हुए डॉ. अरोड़ा ने कॉलर्ड स्टेम इम्प्लांट का इस्तेमाल किया. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे जटिल मामलों में सफलता के लिए अनुभवी और कुशल सर्जन की भूमिका बेहद जरूरी होती है. डॉ. (प्रोफेसर) अनिल अरोड़ा पिछले तीन दशक से से जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर रहे हैं.
सिर्फ 7 दिन में घर वापसी
सर्जरी के बाद अहमद की फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन शुरू किया गया. उन्हें ऐसे व्यायाम कराए गए जिनसे ऑपरेशन वाले जोड़ के आसपास की मांसपेशियां मजबूत हो सकें, जटिलताओं का खतरा कम हो और उनकी चलने-फिरने की क्षमता धीरे-धीरे वापस आ सके.
कुछ ही दिनों में उन्हें दर्द से काफी राहत मिलने लगी और उनकी दैनिक गतिविधियों में भी सुधार देखने को मिला. सफल रिकवरी के बाद सर्जरी के सिर्फ 7 दिनों के भीतर ही अहमद को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे अपने देश लौट गए.
मोटापा सर्जरी से रोकने की वजह नहीं
डॉ. अरोड़ा ने आगे कहा, "जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में बहुत ज्यादा मोटापा एक बड़ा फैक्टर होता है, क्योंकि इससे जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है और रिप्लेस किए गए जॉइंट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, सिर्फ मोटापे की वजह से गंभीर आर्थराइटिस और चलने-फिरने में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करने वाले मरीजों को इस तरह की सर्जरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाना चाहिए. मरीजों के सही चुनाव, पूरी मेडिकल जांच, बेहतरीन सर्जिकल तकनीक और सर्जरी के बाद सही देखभाल के साथ, कॉम्प्लेक्स जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सकती है. ऐसे जटिल मामलों में मल्टी डिसिप्लिनरी टीम के बीच तालमेल की जरूरत होती है साथ ही एक बड़े हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञता और आधुनिक सुविधाओं से इसमें मदद मिलती है. हमारे अस्पताल में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट समेत आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी नियमित रूप से की जाती है; इसीलिए, हम इस मामले को आसानी से संभाल पाए."
क्या होता है टोटल हिप रिप्लेसमेंट?
टोटल हिप रिप्लेसमेंट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें दर्द से राहत पाने और चलने-फिरने की क्षमता को वापस लाने के लिए हिप जॉइंट के खराब हिस्सों को आर्टिफिशियल कंपोनेंट्स से बदल दिया जाता है. इस प्रक्रिया का सुझाव आमतौर पर उन मरीजों को दिया जाता है, जिन्हें गंभीर आर्थराइटिस होता है या जिनके जोड़ों में बहुत ज्यादा डैमेज हो चुका होता है तथा दवा, फिजियोथेरेपी और अन्य सामान्य इलाज से पर्याप्त राहत नहीं मिलती है.
यह सफल सर्जरी मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली की ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, कार्डियोलॉजी, एनेस्थीसिया, फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन और नर्सिंग टीमों की साझा कोशिशों को दिखाता है, जिन्होंने तकनीकी रूप से मुश्किल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामले में मल्टी-डिसिप्लिनरी केयर प्रदान किया.
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