पाकिस्तान के जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम के मेंटर्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके खराब प्रदर्शन के लिए ट्रेनिंग की कमी और लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने ओलंपिक चैंपियन से वापसी के लिए कड़ी मेहनत करने को कहा है. नदीम ने 2024 पेरिस ओलंपिक में 92.97 मीटर के थ्रो के साथ रिकॉर्ड तोड़े थे, लेकिन ग्लासगो में वह 12 खिलाड़ियों के फाइनल में नौवें स्थान पर रहे और उनका प्रदर्शन बिल्कुल भी अच्छा नहीं था, जिससे फैंस और कोचिंग स्टाफ हैरान रह गए.
अरशद की शुरुआत धीमी रही और क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 78.63 मीटर का थ्रो किया, जिससे वे बमुश्किल फाइनल के लिए क्वालिफाई कर पाए. उनका 77.41 मीटर का थ्रो मेडल की दौड़ में शामिल होने के लिए काफी नहीं था. यह प्रतियोगिता श्रीलंका के उभरते हुए स्टार रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ जीती.
नदीम को आगे बढ़ाने वाले ने किसे ठहराया जिम्मेदार
पिछले चार सालों से नदीम के करीबी प्रतिद्वंद्वी रहे भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि एक अन्य भारतीय यश वीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया. अकरम साही, जो 2018 की शुरुआत में नदीम को आगे बढ़ाने में मदद करने वाले पहले अधिकारी थे, ने उन लोगों को दोषी ठहराया जिन्होंने नदीम को अपने प्रभाव में ले लिया था.
लापरवाही और ट्रेनिंग की कमी
पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष साही ने 'टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट' को बताया, 'नदीम के ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने के बाद, कुछ लोगों के एक ग्रुप ने उन्हें अपने प्रभाव में ले लिया और उन्हें कभी मेरे पास नहीं आने दिया.' 'ग्लासगो का यह नतीजा उस खिलाड़ी के लिए बहुत निराशाजनक है जिसने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं, लेकिन पिछले कई महीनों से इसके संकेत मिल रहे थे क्योंकि लापरवाही बरती गई और ट्रेनिंग की कमी थी.'
'अरशद नदीम लापरवाह हो गए थे'
एक अन्य मेंटर, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, साही की बात से सहमत थे. उन्होंने कहा, 'अरशद नदीम लापरवाह हो गए थे और हमने देखा कि ट्रेनिंग की कमी थी. इस साल हज यात्रा में व्यस्त रहने के बाद उन्होंने ठीक से ट्रेनिंग नहीं की.' 'उन्होंने अपने दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरियस लीबेनबर्ग से अच्छी ट्रेनिंग लेने के बाद ओलंपिक जीता था. नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी पॉचेफस्ट्रूम में उनकी ट्रेनिंग ने भी उन्हें ओलंपिक गोल्ड जीतने में मदद की थी.'
सरकार का इंतजार, खुद पर नहीं किया निवेश
उन्होंने बताया कि, 'अब वे इस बात का इंतजार कर रहे थे कि फेडरेशन और सरकार उन्हें ट्रेनिंग के लिए दक्षिण अफ्रीका भेजे.' उन्होंने कहा, 'पेरिस शो के बाद उन्हें इनाम के तौर पर अच्छी-खासी रकम मिली थी, इसलिए उन्हें किसी और के भेजने का इंतजार करने के बजाय खुद पर निवेश करना चाहिए था.'
मेंटर ने नदीम के लिए सही कोच न होने को जिम्मेदार ठहराया. 'नदीम के मौजूदा कोच सलमान बट का जैवलिन थ्रो से कोई लेना-देना नहीं है; वह डिस्कस थ्रो के एक साधारण एथलीट थे जिनकी कोई खास उपलब्धि नहीं रही, लेकिन वह नदीम के साथ साये की तरह रहे हैं और इसका असर नदीम के प्रदर्शन पर पड़ा है.
30 करोड़ का इनाम और बिजनेस पर ध्यान
उन्होंने कहा कि, 'करीब 30 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (300 मिलियन PKR) का अच्छा-खासा नकद इनाम मिलने के बाद, नदीम का ध्यान बिजनेस की तरफ ज्यादा है और वह अपने होमटाउन मियान चन्नू में एक मैरिज हॉल और रेस्टोरेंट बनवा रहे हैं, जिसमें उनका समय और ध्यान लग रहा है. एक एथलीट को ऐसी चीज़ों में नहीं उलझना चाहिए.'
साउथ एशियन एथलेटिक्स फेडरेशन के चेयरमैन साही ने पाथिराज और वीर सिंह के उभरने पर खुशी जताई. "यह एक अच्छी बात है कि मेडल साउथ एशिया में ही रहे और कड़ी मेहनत के बाद श्रीलंका का एक खिलाड़ी उभरकर सामने आया.'
नदीम के प्रदर्शन से फैंस भी निराश
नदीम के फीके प्रदर्शन से फैंस भी निराश दिखे. गेम्स को एनालिस्ट के तौर पर फॉलो करने वाले अहसान मुनीब ने कहा, 'अहम लोगों ने उन्हें (नदीम को) सिर पर चढ़ा रखा था. उन्हें लाखों रुपये देकर बिगाड़ने के बजाय, सरकार और स्पोर्ट्स अथॉरिटीज को किसी अच्छे विदेशी कोच का इंतजाम करना चाहिए था और उन्हें जर्मनी, साउथ अफ़्रीका या इंग्लैंड जैसी जगहों पर सेटल करना चाहिए था, ताकि उन्हें बेहतर ट्रेनिंग मिल सके और वह वहां के माहौल में बेहतर ढंग से ढल सकें. 'उनके लिए वापसी करना लगभग नामुमकिन होगा.'
ये भी पढ़ें- आखिरी थ्रो से पहले यशवीर के पिता ने क्या कहा? बेटे ने अगले ही पल रच दिया इतिहास
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं