Cristiano Ronaldo vs Congo, FIFA WC 2026: "टीम को गोल करने की जरूरत होती है, आपको अकेले नहीं." फुटबॉल के दिग्गज थियरी हेनरी के ये शब्द बुधवार को कांगो के खिलाफ फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मैच में क्रिस्टियानो रोनाल्डो के संघर्ष को पूरी तरह बयां करते हैं. यह उस सुपरस्टार का एक बेहद साधारण प्रदर्शन था, जिसने अपने पूरे करियर में सिर्फ अपनी इच्छाशक्ति और विरोधी टीमों के दिलों में खौफ पैदा करके अपना नाम बनाया है. हालांकि, ह्यूस्टन स्टेडियम में फैंस ने जो देखा, वह उम्र के असर से जूझ रहे एक ऐसे खिलाड़ी की तस्वीर थी, जिसके लिए अपनी नई भूमिका में ढलना आसान नहीं हो रहा है.
पूरे मैच में सिर्फ 25 टच और एक भी शॉट टारगेट पर न होना ये आंकड़े किसी भी आम स्ट्राइकर के लिए खराब माने जाएंगे, लेकिन जब बात आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक की हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब सफर का अंत करीब है?
शुरुआत शानदार, लेकिन फिनिशिंग में चूका पुर्तगाल
पुर्तगाल के लिए मैच की शुरुआत एकदम मनमाफिक रही थी. मैच के शुरुआती पलों में ही जोआओ नेवेस ने हेडर के जरिए शानदार गोल दागकर टीम को बढ़त दिला दी थी. इसके बाद मैदान पर पुर्तगाल का ही दबदबा दिख रहा था. विटिन्या, ब्रूनो फर्नांडीस और बर्नार्डो सिल्वा जैसे स्टार खिलाड़ियों से सजे मिडफील्ड के पास क्रिएटिविटी की कोई कमी नहीं थी. मैच के शुरुआती 25 मिनटों के खेल में ही पुर्तगाल ने अपने विरोधियों की तुलना में 200 से अधिक पास आपस में खेल लिए थे. लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब इन मौकों को अंतिम गोल में बदलने की बारी आई.
क्रीज पर सुस्त दिखे रोनाल्डो, कांगो ने मारी बाजी
मुख्य स्ट्राइकर के रूप में खेल रहे क्रिस्टियानो रोनाल्डो मैदान पर काफी धीमे और सुस्त नजर आए. नेवेस के पहले गोल के बाद पूरे मैच में पुर्तगाल की टीम केवल छह और शॉट ही ले सकी. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि जब मैच 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ और कांगो ने एक ऐतिहासिक अंक हासिल किया, तो आंकड़ों के लिहाज से कांगो की टीम पुर्तगाल पर भारी दिख रही थी. कांगो ने मैच में कुल आठ शॉट लगाए जबकि पुर्तगाल केवल सात ही लगा सका. गोल पर शॉट के मामले में भी कांगो 2-1 से आगे था और उनका एक्सपेक्टेड गोल रेट भी 0.82 रहा, जो पुर्तगाल के 0.64 से कहीं बेहतर था.
क्या है असली 'रोनाल्डो समस्या'?
इस मैच में मैदान पर उतरते ही रोनाल्डो ने 41 साल और 132 दिन की उम्र में वर्ल्ड कप इतिहास में मैच शुरू करने वाले सबसे उम्रदराज आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. उन्होंने कनाडा के अतिबा हचिंसन का रिकॉर्ड तोड़ा, जो खेल के प्रति उनके लंबे समर्पण को दिखाता है. लेकिन अक्सर कहा जाने वाला मुहावरा कि "उम्र सिर्फ एक नंबर है", एथलीटों के खेल पर आखिरकार असर डाल ही देता है. अपनी युवावस्था में रोनाल्डो एक बेहद आक्रामक खिलाड़ी थे, जो अपनी रफ्तार, ड्रिब्लिंग और शारीरिक क्षमता से दुनिया को हैरान कर देते थे.
हालांकि, समय के साथ उन्होंने खुद को पूरी तरह से सेंटर फॉरवर्ड (मुख्य स्ट्राइकर) के रूप में ढाल लिया है, जहां वो डिफेंस में टीम की कोई मदद नहीं करते. पुर्तगाल के मौजूदा सिस्टम में वो गेम बनाने के लिए पीछे नहीं आते, उनका एकमात्र मकसद सिर्फ गोल करना रह गया है. लेकिन पिछले 10 वर्ल्ड कप और यूरो कप मैचों में उनके नाम एक भी गोल न होना साफ दिखाता है कि एक महान खिलाड़ी इस समय अपने करियर के सबसे बड़े संघर्ष से गुजर रहा है.
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