फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अपने चरम पर है. किन चार टीमों के बीच टूर्नामेंट का सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाएगा. उन चारों टीमों का निर्णय हो चुका है. टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल मुकाबला फ्रांस और स्पेन के बीच 14 जुलाई को डलास, जबकि दूसरा मुकाबला 15 जुलाई को इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच अटलांटा में खेला जाएगा. इन दोनों मुकाबलों में जिन दो टीमों को जीत मिलेगी. वह 19 जुलाई को ईस्ट रदरफोर्ड स्थित न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खिताब के लिए दो-दो हाथ करेगी.
60 साल बाद फिर से जगी इंग्लैंड की खिताब जीतने की आस
जारी टूर्नामेंट में इंग्लैंड की टीम ने अब तक जिस तरह से प्रदर्शन किया है. उसे देख वहां के फुटबॉल प्रेमियों को एक बार फिर से खिताब की आस जग गई है. पिछली और एकमात्र खिताब इंग्लिश टीम ने करीब 60 साल पहले 1966 में जीती थी. उसके बाद से इंग्लैंड ने कई बार क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल तक का सफर तय किया. मगर वह खिताब अपने नाम नहीं कर पाई.
हालांकि, जारी सीजन में हैरी केन की देख रेख में टीम ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है. उसे देख पूरी उम्मीद जग रही है कि इस बार 60 सालों से चला आ रहा इंग्लैंड का खिताबी सुखा खत्म हो जाएगा. कैप्टन केन खुद टीम की आगे बढ़कर अगुवाई कर रहे हैं. उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है.
संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत का शानदार उदाहरण बन गए हैं केन
मौजूदा समय में हैरी केन की गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ियों में होती है. मगर एक समय ऐसा भी था जब उन्हें प्रतिष्ठित क्लब आर्सेनल की युवा अकादमी से बाहर कर दिया गया था. जिससे वह बुरी तरह से टूट गए थे. लोगों को मानना था उनमें भविष्य का स्टार बनने की क्षमता नहीं है. मगर केन कहां हार मानने वाले थे. उन्होंने अपने कठिन परिश्रम और लगन से हर किसी को गलत साबित कर दिया और आज वह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.
केन के संघर्ष के दिन
हैरी केन का जन्म 28 जुलाई साल 1993 में इंग्लैंड के लंदन शहर में हुआ था. बचपन से ही उन्हें फुटबॉल खेलने का शौक था. बड़े होकर वह देश के लिए एक पेशेवर फुटबॉलर बनना चाहते थे. मगर उनका यह रास्ता शुरुआती दिनों में बिल्कुल आसान नहीं था. बचपन में पहले आर्सेनल की युवा अकादमी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया. जिसके बाद वह टॉटेनहम हॉटस्पर की अकादमी से जुड़ गए. यहां भी उन्हें तुरंत कामयाबी हाथ नहीं लग गई. उनके खेल को देखते हुए और ज्यादा से ज्यादा अनुभव हासिल करने के लिए कई छोटे-छोटे क्लबों में भेजा गया. जिनमें लेटन ओरिएंट, मिलवाल, नॉर्विच सिटी और लीसेस्टर सिटी का नाम प्रमुख है.
छोटे क्लबों में भी जुझते रहे केन
लेटन ओरिएंट, मिलवाल, नॉर्विच सिटी और लीसेस्टर सिटी जैसे छोटे क्लबों में भी केन का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. जिसकी वजह से उन्हें कई बार आलोचकों का सामना करना पड़ा. लोगों का मानना था कि वह टॉटेनहम की मुख्य टीम का कभी भी हिस्सा नहीं बन पाएंगे. मगर उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी कमजोरियों पर लगातार काम करते रहे.
2014-15 में केन ने दिखाया अपना असल रंग
केन के जीवन का असल रंग साल 2014-15 में उभरकर लोगों के सामने आया. उन्होंने टॉटेनहम की तरफ से शिरकत करते हुए गोलों की झड़ी लगा दी. बुरे दिनों में किए गए कठिन परिश्रम ने जल्द ही उन्हें एक स्टार स्ट्राइकर बना दिया. मौजूदा समय में वह इंग्लैंड के कप्तान हैं और टीम की जीत के सबसे बड़ी आस भी हैं.
केन ने 2018 में जीता गोल्डन बूट
इंटरनेशनल लेवल पर केन का जलवा 2018 में देखने को मिला. उस साल उन्होंने इंग्लैंड की तरफ से फीफा वर्ल्ड कप में शिरकत करते हुए कुल छह गोल दागे थे. जिसके लिए उन्हें गोल्डन बूट हासिल हुआ था. जिसे उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है. जारी सीजन में भी वह धमाल मचा रहे हैं और अपनी टीम की तरफ से छह गोल दाग चुके हैं. गोल्डन बूट की रेस में वह पांचवें पायदान पर काबिज हैं.
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