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Delhi Master Plan 2047: देर रात तक गुलजार रहेंगे बाजार और सुरक्षित होगी 'नाइटलाइफ़', स्लम-फ्री होगा शहर

DDA की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने प्राधिकरण द्वारा बनाई गई पुरानी दो-मंजिला रिहायशी इकाइयों के पुनर्विकास के लिए एक समान नीति लाने का भी फैसला किया.

Delhi Master Plan 2047: देर रात तक गुलजार रहेंगे बाजार और सुरक्षित होगी 'नाइटलाइफ़', स्लम-फ्री होगा शहर
दिल्ली मास्टर प्लान 2047
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

Delhi Master Plan 2047: DDA ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में आगामी 20-25 वर्षों के विकास का रोडमैप 'मास्टर प्लान-2047' (MPD-2047) पास कर केंद्र सरकार को भेज दिया है. बताया जा रहा है कि प्लान में यमुना तटीय क्षेत्रों का संरक्षण, मेट्रो व RRTS स्टेशनों के आसपास वॉक-टू-वर्क कल्चर, झुग्गियों की जगह पक्के मकान और सुरक्षित 'नाइट-टाइम इकोनॉमी' को बढ़ावा देने का खाका तैयार किया गया है.

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने प्राधिकरण द्वारा बनाई गई पुरानी दो-मंजिला रिहायशी इकाइयों के पुनर्विकास के लिए एक समान नीति लाने का भी फैसला किया.

दिल्ली की जनसंख्या बढ़ोतरी के मुताबिक मास्टर प्लान

डीडीए ने बताया कि 2047 तक दिल्ली की जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी होने के अनुमान को देखते हुए, मास्टर प्लान में आवास, आर्थिक विकास, आवागमन, पर्यावरण की स्थिरता, बुनियादी ढांचे, विरासत के संरक्षण, शहरी पुनर्विकास और नागरिकों पर केंद्रित शासन-व्यवस्था के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया गया है.

डीडीए ने बताया कि एमपीडी (दिल्ली मास्टर प्लान) 2021 के खत्म होने के बाद पहले वह एमपीडी 2041 पर काम कर रहा था, लेकिन अब इसे बदलकर ‘एमपीडी 2047' कर दिया गया है ताकि यह केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत 2047' की दृष्टि के अनुरूप हो सके.

कमजोर इमारतों को होगा पुनर्विकास

प्राधिकरण ने कहा, एमपीडी-1962 के तहत बनी डीडीए की कई पुरानी आवास योजनाओं में अलग-अलग भूखंडों पर बनी दो मंज़िला इमारतें शामिल हैं, जो 50 साल से ज़्यादा पुरानी हैं और बनावट के लिहाज से कमजोर हैं. जहां खाली रिहायशी भूखंड के लिए मौजूदा एमपीडी नियमों के तहत पुनर्विकास के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं, वहीं बनी-बनाई दो मंजिला इमारतों के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं था. डीडीए ने कहा कि इस मंज़ूरी के साथ, अब बनी-बनाई दो मंज़िला इमारतों को भी खाली रिहायशी भूखंड की तरह ही पुनर्विकास के अधिकार मिल गए हैं.

सस्टेनेबल और ग्रीन विजन

बैठक में बताया गया कि पॉल्यूशन-फ्री सर्विस सेक्टर, ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और पेडेस्ट्रियन (पैदल) कॉरिडोर विकसित कर दिल्ली को एक आधुनिक, हरित और विश्वस्तरीय शहर बनाने पर जोर रहेगा. हरित क्षेत्रों के विकास और प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया है. योजना में जल प्रबंधन और अपशिष्ट निपटान के लिए भी प्रावधान हैं.

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