- उत्तर प्रदेश के सूर्या तिवारी ने मात्र डेढ़ साल की मेहनत से 13 सरकारी नौकरियां हासिल की हैं, बिना कोचिंग के
- सूर्या ने साल 2024 में बीएससी पूरी की और 2025 में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन कर तैयारी शुरू की
- केंद्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात हैं
Success Story: उत्तर प्रदेश के एक किसान के बेटे सूर्या तिवारी ने ऐतिहासिक कमाल कर दिखाया है. महज 21 साल की उम्र में 13 सरकारी नौकरियां हासिल कर ली हैं, वह भी सिर्फ करीब एक-डेढ़ साल की कड़ी मेहनत से. गर्व की बात तो यह है कि दोस्त से उधार लिए लैपटॉप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करके बिना किसी कोचिंग के यह कामयाबी पाई.
सूर्या तिवारी ने साल 2024 में बीएससी (B.Sc) की पढ़ाई पूरी की. साल 2025 में एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे और जमकर मेहनत की. रोजाना सात-आठ घंटे पढ़ाई की. नतीजा यह रहा कि उन्होंने लगभग सारे एग्ज़ाम निकाल दिए. साल 2026 खत्म होने से पहले सूर्या के हाथ में 13 सरकारी नौकरियां थीं.

माता-पिता के साथ सूर्या तिवारी
सूर्या तिवारी की 13 सरकारी नौकरियों की सूची
- असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) – केंद्रीय सचिवालय, दिल्ली (SSC CGL के जरिए)
- एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर – एम्स (AIIMS), दिल्ली
- स्टेशन मास्टर – रेलवे (NTPC ग्रेजुएट लेवल)
- ट्रैवलिंग टिकट परीक्षक (TT) – भारतीय रेलवे
- रेडियो ऑफिसर (RO) – रक्षा मंत्रालय (Defense)
- लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) – एमएसएमई (MSME) मंत्रालय
- यूपीएससी सीडीएस (UPSC CDS) – रक्षा सेवा
- यूपीएससी एनडीए (UPSC NDA) – प्रथम प्रयास
- यूपीएससी एनडीए (UPSC NDA) – द्वितीय प्रयास
- सब-इंस्पेक्टर (SI) – दिल्ली पुलिस
- एग्जीक्यूटिव ऑफिसर – गृह मंत्रालय (Home Ministry) - पद 1
- एग्जीक्यूटिव ऑफिसर – गृह मंत्रालय (Home Ministry) - पद 2
- क्लर्क – सीएसआईआर (CSIR)
सफलता का मंत्र: "मेहनत एक बार करो, फिर दिशा तय करो"
एनडीटीवी से खास बातचीत के दौरान सूर्या तिवारी ने अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का राज साझा किया. सूर्या बताते हैं, "मैंने जिस भी प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरा, उन सभी में मुझे सफलता मिली. मेरा मानना था कि कड़ी मेहनत केवल एक बार पूरी शिद्दत से करनी होती है, उसके बाद तो बस पाठ्यक्रम के हिसाब से खुद की तैयारी को सही दिशा देनी होती है. मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मुझे सिर्फ एक ही नौकरी चाहिए, बल्कि मेरा ध्यान अपनी तैयारी को इतना मजबूत करने पर था कि मैं अपनी मनचाही पोस्ट हासिल कर सकूं."

पिता संजय तिवारी ने बेटे सूर्या के माथे पर लगाया विजय तिलक
कौन हैं सूर्या तिवारी? जानिए उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि
सूर्या तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के असोथर ब्लॉक स्थित सरकंडी गांव के निवासी हैं. उनका जन्म 10 मई 2024 को किसान संजय तिवारी के घर हुआ था. सूर्या अपनी चार बहनों के इकलौते भाई हैं.
घर के आर्थिक हालात बेहद कमजोर थे, जिसके कारण उनकी चारों बहनें उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सकीं. लेकिन परिजनों ने सूर्या की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी और सूर्या ने भी परिवार के इस त्याग को व्यर्थ नहीं जाने दिया.
सूर्या की मां शशि तिवारी एक कुशल गृहिणी हैं, जबकि उनके पिता संजय तिवारी अपनी पुस्तैनी जमीन पर खेती-बाड़ी करके परिवार का गुजर-बसर करते हैं. केंद्रीय सचिवालय दिल्ली में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर बनने के बाद जब सूर्या 27 जुलाई 2026 को पहली बार अपने गांव सरकंडी पहुंचे, तो पूरे गांव ने उनका ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया.

Success Story Surya Tiwari up farmer son clears 13 government jobs
दोस्त का त्याग: उधार के लैपटॉप ने बदली किस्मत
सूर्या तिवारी की यह सफलता की कहानी उनके एक सच्चे मित्र के बिना अधूरी है. सूर्या बताते हैं कि उनके परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन तैयारी और मॉक इंटरव्यू के लिए लैपटॉप खरीद सकें.
जब यह बात उनके एक करीबी दोस्त को पता चली, तो उसने सूर्या की मदद करने की ठानी. उस दोस्त ने अपने परिजनों से पढ़ाई का बहाना बनाकर ज़िद करके एक नया लैपटॉप मंगवाया और चुपके से सूर्या को दे दिया. जब भी उस दोस्त के घरवाले उससे लैपटॉप के बारे में पूछते, तो वह झूठ बोल देता था कि लैपटॉप लाइब्रेरी में रखा है. वह दोस्त जानता था कि उस समय लैपटॉप की वास्तविक जरूरत उससे कहीं ज्यादा सूर्या को थी. दोस्त के इस निस्वार्थ सहयोग ने सूर्या की राह आसान कर दी.

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चाचा-चाची का संबल और पूरे गांव का गौरव
सूर्या के पिता पांच भाई हैं. संजय तिवारी, सुनील तिवारी (कोटेदार), सुशील तिवारी (होमगार्ड), हरिशंकर तिवारी (अध्यापक) और हरिमोहन तिवारी (लोको पायलट). सूर्या के दो चाचा हरिशंकर तिवारी और सुनील तिवारी फतेहपुर शहर में रहते हैं. सूर्या ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई फतेहपुर शहर में इन्हीं दोनों चाचा के पास रहकर पूरी की.
इसके बाद उन्होंने गांव के कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वे कभी गांव में रहते तो कभी फतेहपुर शहर में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई करते थे. परिवार के समाजसेवी इंद्रेश तिवारी ने बताया कि सूर्या की चाची स्वाति तिवारी भी एक सरकारी शिक्षिका हैं और उन्होंने भी सूर्या को हमेशा प्रेरित किया. आज सूर्या की इस स्वर्णिम उपलब्धि पर न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा फतेहपुर और सरकंडी गांव गर्व महसूस कर रहा है.
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